राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस
National Legal Service Day
आज का दिन : 9 नवंबर, 2022
- देश के हर व्यक्ति को न्याय मिले इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 में पारित किया गया। इसके बाद इसे पूर्णत: 9 नवंबर, 1995 को लागू किया गया। इसीलिए प्रतिवर्ष 9 नवंबर को नेशनल लीगल सर्विस डे मनाया जाता है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की जानकारी देने एवं कानूनी सहायता प्राप्त कर न्याय पाने के लिए जागरूक करना है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत 5 दिसंबर, 1995 को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) (National Legal Services Authority-NALSA) की स्थापना की गई।
- नालसा के गठन का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क विधि यानी कानून सेवाएं प्रदान करना है। इसके लिए नालसा द्वारा लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा अदालतों में मामलों में कमी लाना भी इसका एक मुख्य उद्देश्य है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक भारत के मुख्य न्यायाधीश होते हैं। वर्तमान यानी 2022 में नालसा के संरक्षक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उदय उमेश ललित हैं। प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के ही द्वितीय वरिष्ठ न्यायाधीश इसकी कमान संभालते हैं।
- नालसा की ओर से पात्र लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है तथा विवादों के सर्वमान्य हल निकालने के लिए लोक अदालतों का संचालन किया जाता है।
- नालसा के द्वारा नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने वाले वर्गों में औद्योगिक श्रमिक, विकलांग जन, महिलाएं और बच्चे, आपदाओं के शिकार लोग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोग, एक लाख से कम आय वर्ग के लोग शामिल हैं।
- राष्ट्रीय स्तर पर नालसा कार्यरत हैं। वहीं प्रदेश स्तर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण होता है। जिसके अध्यक्ष व मुख्य संरक्षक राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं। वहीं एक न्यायाधीश को इसका कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है।
22वें विधि आयोग का गठन
- 8 नवंबर, 2022 को 22वें विधि आयोग का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी को बनाया गया है। आयोग में केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति केटी शंकरन, प्रो. आनंद पालीवाल, प्रो. डीपी वर्मा, प्रो. (डॉ.) राका आर्य और श्री एम. करुणानिधि सदस्य बनाए गए हैं। 21वें विधि आयोग के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान थे।
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