सोमवार, 10 अगस्त 2026

10 अगस्त, 2026 : विश्व सिंह दिवस

विश्व सिंह दिवस

(World Lion Day)

आज का दिन : 10 अगस्त, 2026


  • प्रतिवर्ष 10 अगस्त को विश्व सिंह दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस मनाने का उद्देश्य लुप्त होती इस प्रजाति के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।
  • विश्व शेर दिवस मनाने की शुरुआत बिग कैट रेस्क्यू द्वारा की गई थी। 
  • जंगल का राजा कहा जाने वाला यह जीव भारत में मुख्य रूप से गुजरात के गिर अभयारण्य में पाया जाता है। तीन हजार वर्ग किमी में फैला यह नेशनल पार्क एशियाई शेरों का घर कहा जाता है। वर्तमान में देश में ग्रेटर गिर अवधारणा पर काम हो रहा है। इसके तहत पारंपरिक गिर राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य के अलावा भी शेरों के लिए अतिरिक्त उपयुक्त आवास विकसित किए जा रहे हैं। शेरों के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क का विस्तार करने के लिए गिरनार, पनिया और मिटियाला जैसे अभयारण्यों को अधिसूचित किया गया है।
  • शेर को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में लुप्त होती प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • देश में शेरों की पहली गणना 1936 में जूनागढ़ रियासत के नवाब ने करवाई थी। इसके बाद वन विभाग ने सन् 1965 में गणना करवाई। यह गणना प्रति पांच वर्ष में की जाती है। 1990 की गणना में 284 शेर थे, वहीं 2020 में हुई गणना में इनकी संख्या 674 हो गई है।

प्रोजेक्ट लायन

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2020 को 'प्रोजेक्ट लायन' की शुरुआत की थी। इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य एशियाई शेरों के संरक्षण करना है। इसके तहत एक स्थायी वातावरण बनाना है ताकि शेरों की संख्या में वृद्धि हो और पारिस्थितिकी तंत्र में उनका योगदान हो सके। परियोजना के तहत शेरों के आवास में सुधार, रेडियो कॉलिंग और कैमरा ट्रैप जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम निगरानी करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना शामिल है।

10 अगस्त 2026 : विश्व जैव ईंधन दिवस

विश्व जैव ईंधन दिवस

(World Biofuel Day)

आज का दिन : 10 अगस्त, 2026

world-biofuel-day-2021

  • दुनिया में हरित ईंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है।
  • इतिहास में जाएं तो डीजल इंजन के आविष्कारक सर रुडॉल्फ  डीजल ने 10 अगस्त 1893 को पहली बार पीनट ऑयल यानी मूंगफली तेल से मेकेनिकल इंजन को सफलतापूर्वक दौड़ाया था। इसी दिन की स्मृति में विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है।
  • विश्व जैव ईंधन दिवस मनाने का उद्देश्य पांरपरिक जीवाश्म ईंधनों के विकल्प के रूप में गैर-जीवाश्म ईंधनों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • बायोफ्यूल यानी फसलों से निकला ईंधन या कूड़े-कचरे से निकला ईंधन। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल को मिलाने का प्रोग्राम शुरू किया। इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिक्स करने से पिछले वर्ष देश को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। अब सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्ष में ये बचत करीब 12 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाना है। 'जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति 2018' में वर्ष 2030 तक हाई स्पीड डीजल में 5 प्रतिशत जैव डीजल (बायोडीजल) को मिश्रित करने के लक्ष्य की परिकल्पना की गई है।
  • 30 अप्रेल, 2019 को भारत सरकार की अधिसूचना के बाद राजस्थान देश में जैव ईंधन नीति लागू करने वाला पहला राज्य था।
  • जैव ईंधन कार्यक्रम भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया', स्वच्छ भारत और किसानों की आमदनी बढ़ाने से जुड़ी पहलों के पूरक के तौर पर भी है। अब इसमें आत्मनिर्भर भारत भी जुड़़ गया है। वर्ष 2014 से लेकर अब तक जैव ईंधनों का उत्पादन बढ़ाने एवं इन्हें मिश्रित करने के लिए अनेक पहल की गई हैं।

वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance)

  • वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, जी20 के अध्यक्ष के रूप में भारत की एक पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन से इतर 9 सितंबर, 2023 को सिंगापुर, बांग्लादेश, इटली, अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के साथ मिलकर वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) का शुभारंभ किया। प्रारंभ में इसे 19 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपना समर्थन दिया। वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का उद्देश्य जैव ईंधन को तेजी से अपनाने के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है। इस पहल से जैव ईंधनों को ऊर्जा परिवर्तन की कुंजी बनाने में भी सहायता मिलेगी।

    रविवार, 9 अगस्त 2026

    9 अगस्त 2026 : विश्व के मूलनिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

    विश्व के मूलनिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

    (International Day of the World's Indigenous Peoples)

    विश्व आदिवासी दिवस

    (World Tribal Day)

    आज का दिन : 9 अगस्त 2026


    • संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 1994 से प्रतिवर्ष 9 अगस्त को 'विश्व के मूलनिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस' मनाया जा रहा है।
      भारत में यह दिवस 'विश्व आदिवासी दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है।
    • 9 अगस्त, 1982 को पहली बार मूल निवासियों संबंधी संयुक्त राष्ट्र के उप-आयोग की पहली बैठक हुई थी। इसी उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है। 
    • संयुक्त राष्ट्र की ओर से 10 अगस्त, 2026 को विश्व के मूलनिवासी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस पर वर्चुअल आयोजन का आयोजन किया जाएगा।
    • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मूल निवासी लोगों यानी आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें बढ़ावा देना है।
    • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में इस समय लगभग 476 मिलियन लोग मूल निवासी हैं, जो 90 देशों में निवास कर रहे हैं। यह दुनिया की जनसंख्या का लगभग 6.2 प्रतिशत है। इन लोगों ने अपनी संस्कृति, अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं, भाषाओं और प्राचीन ज्ञान प्रणालियों को सहेजकर रखा है।
    • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 13 सितंबर, 2027 को स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र को अपनाया था। उस समय इसके पक्ष में 143 देशों ने मतदान किया था। जबकि चार देशों ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसके विपक्ष में वोट दिया। हालांकि बाद में ये चारों देश भी इस घोषणा पत्र को अपना चुके। यह दुनिया के स्वदेशी लोगों के अस्स्तिव, सम्मान और कल्याण के लिए न्यूनतम मानकों का एक सार्वभौमिक ढांचा स्थापित करता है।
    • देश में 9 अगस्त का दिन विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्यों ने प्रदेश में इस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने 15वें राष्ट्रपति का पदभार संभाला है।
    • संयुक्त राष्ट्र की ओर से 1994 से 2004 तक 'विश्व के मूल निवासी लोगों का दशक' (Decade of the World's Indigenous People) मनाया गया। इसके बाद वर्ष 2005 से 2014 तक दूसरा 'विश्व के मूल निवासी लोगों का दशक' मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र की ओर से अब वर्ष 2022 से 2032 तक के दशक को स्वदेशी भाषाओं के दशक (Decade of Indigenous Languages 2022 – 2032) के रूप में मनाया जा रहा है।
    • संयुक्त राष्ट्र की ओर वर्ष 2019 को International Year of Indigenous Languages के रूप में मनाया गया था।

      *विश्व के मूलनिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस-2026 का विषय/थीम*

      Honouring Indigenous Midwives: Safeguarding Life and Well-being

    9 अगस्त, 2026 : अगस्त क्रांति दिवस

    अगस्त क्रांति दिवस

    (August Kranti Diwas)

    आज का दिन : 9 अगस्त, 2026

    • देश में प्रतिवर्ष 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस मनाया जाता है। 9 अगस्त, 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी। अंग्रेजों के खिलाफ यह एक प्रकार से अंतिम जंग का ऐलान था। इसीलिए इस दिन को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 4 जुलाई, 1942 को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि यदि अंग्रेज भारत नहीं छोड़ते हैं तो उनके खिलाफ नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाया जाए। अगस्त क्रांति इसी का एक रूप थी।

    अरुणा आसफ अली ने फहराया था तिरंगा

    • अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के बम्बई सत्र में 8 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया गया।
    • आंदोलन के शुरू होने से पूर्व ही महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर पुणे के आगा खान पैलेस में कैद कर दिया।  इस दौरान लगभग सभी नेता गिरफ्तार कर लिए गए।
    • 9 अगस्त, 1942 को अरुणा आसफ अली ने मुंबई के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर भारत छोड़ो  आंदोलन का शंखनाद कर दिया। मुम्बई के जिस पार्क से यह आंदोलन शुरू हुआ उसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है।
    • अगस्त क्रांति एक प्रकार से भारतीय आजादी का अंतिम हथियार कही जा सकती है। इस आंदोलन के बाद अंग्रेजों से मुक्ति की राह मजबूती से प्रशस्त हुई।



    शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

    7 अगस्त, 2026 : राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस

    राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस

    (National Javelin Day)

    आज का दिन : 7 अगस्त, 2026

    • देश में प्रतिवर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस मनाया जाता है।
    • एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से यह दिवस मनाया जाता है।
    • प्रसिद्ध एथलीट नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त, 2021 को टोक्यो ओलंपिक-2020 में भाला फेंक में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। ओलंपिक में यह भारत का एथलेटिक्स का पहला पदक था। वो भी गोल्ड। इसलिए नीरज चोपड़ा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का सम्मान करने के लिए प्रतिवर्ष देश में यह दिवस मनाना शुरू किया गया। 
    • भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाला फेंक में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
    • फ्रांस के पेरिस में हुए ओलंपिक-2024 में भी नीरज चोपड़ा ने 8 अगस्त, 2024 को फाइनल में भाला फेंक कर रजत पदक जीता था।
    • स्कॉटलैण्ड के ग्लास्गो शहर में आयोजित कॉमनवैल्थ गेम्स-2026 में भी नीरज चोपड़ा ने 85.23 मीटर भाला फेंक कर रजत पदक जीता था।

    मंगलवार, 4 अगस्त 2026

    7 अगस्त, 2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

    राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

    (National Handloom Day)

    आज का दिन : 7 अगस्त, 2026

    • प्रतिवर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
    • प्रथम राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्घाटन 7 अगस्त 2015 को चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
    • 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 7 अगस्त, 2026 को राष्ट्र स्तरीय समारोह नई दिल्ली के राष्ट्रीय भवन सांस्कृतिक केन्द्र (आरबीसीसी) में आयोजित किया जाएगा। मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु होंगी। कार्यक्रम के दौरान हथकरघा क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पांच संत कबीर पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का उत्सव मनाने वाले चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे।
    • साथ ही समारोह के दौरान दो प्रकाशनों— अर्थ. रूट. थ्रेड आल डायड हैंडलूम टैक्सटाइल्स ऑफ सेंट्रल इंडियाव और हथकरघा पुरस्कार पुस्तक 2025 —का भी विमोचन किया जाएगा।
    • 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, देश भर में सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।  राज्य सरकारें, विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय के तहत बुनकर सेवा केंद्र, शीर्ष हथकरघा निकाय, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम, राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय आदि सहित शिक्षा संस्थान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं।
    • राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने की प्रेरणा 7 अगस्त, 1905 को शुरू किए गए स्वदेशी आंदोलन से मिली है। इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी उद्योगों और विषेश रूप से हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करना था।
    • हथकरघा देश की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और देश के ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण हिस्सों में आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस क्षेत्र में अधिकतम संख्या महिला श्रमिकों की है।
    • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य हथकरघा-बुनाई समुदाय के देश में सामाजिक व आर्थिक विकास में योगदान पर प्रकाश डालना हैं।

    रविवार, 2 अगस्त 2026

    2 अगस्त, 2026 : अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस

    अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस
    (International Day of Friendship)

    आज का दिन : 2 अगस्त, 2026
    (अगस्त का पहला रविवार)

    • भारत सहित आधी से अधिक दुनिया में अगस्त माह के पहले रविवार को अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में अगस्त का पहला रविवार 2 तारीख को आया है।
    • संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से प्रतिवर्ष 30 जुलाई को फ्रेंडशिप डे यानी अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस मनाया जाता है। 
    • अलग-अलग दिन मनाने के बावजूद फ्रेंडशिप डे की भावना एक ही है। माना जाता है कि इस दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई। सन् 1919 में हॉलमार्क कार्ड्स के संस्थापक जॉएस हॉल को जाता है। पश्चिमी दुनिया में जुलाई के आसपास कोई त्योहार न होने के कारण अगस्त माह के पहले रविवार को फ्रेंडशिप मनाने की शुरुआत की गई। सन् 1958 को 30 जुलाई को औपचारिक रूप से फ्रेंडशिप डे मनाने की शुरुआत हुई।
    • संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 2011 में 30 जुलाई को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र का इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों, देशों और संस्कृतियों के बीच मित्रता का सेतु तैयार कर दुनिया में शांति लाना है।
    • भारत और उसके पड़ोसी देशों में यह दिन अगस्त के प्रथम रविवार को मनाया जाता है। हमारी भारतीय संस्कृति में मित्रता को बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। श्रीकृष्ण व सुदामा यानी राजा और रंक की मित्रता का उदाहरण हमेशा दिया जाता रहा है।

    2 अगस्त, 2026 : दादरा व नगर हवेली मुक्ति दिवस

    दादरा व नगर हवेली मुक्ति दिवस

    (Independence Of Dadra Nagar Haveli)

    आज का दिन : 2 अगस्त, 2026

    • आजादी की चाह रखने वाली आम जनता ने 2 अगस्त, 1954 को पुर्तगालियों से दादरा और नगर हवेली को मुक्त कराया था। इसीलिए प्रतिवर्ष 2 अगस्त को दादरा व नगर हवेली मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    • 17 दिसंबर, 1779 को मराठा सरकार ने दादरा और नगर हवेली को पुर्तगालियों को सौंपा था। तब से आजादी मिलने तक इस पर पुर्तगालियों ने शासन किया।
    • स्वतंत्र होने के बाद 1954 से 1961 तक दादरा एवं नगर हवेली लगभग स्वतंत्र रूप से काम करता रहा, जिसे 'स्वतंत्र दादरा एवं नगर हवेली प्रशासन' ने चलाया।
    • 11 अगस्त, 1961 को यह राज्य भारतीय संघ में शामिल हो गया। तब से यह केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में भारतीय संघ का हिस्सा रहा।
    • 26 जनवरी, 2020 को दादरा और नगर हवेली तथा दमन व दीव का विलय होने के बाद एक नया केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आया। नवगठित केन्द्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन व दीव की राजधानी दमन को बनाया गया है। वर्तमान यानी 2026 में इसके प्रशासक प्रफुल्ल पटेल हैं।
    • दादरा और नगर हवेली गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों से घिरा हुआ है। इसके दो भाग हैं एक दादरा और दूसरा नगर हवेली।
    • दादरा एवं नगर हवेली की मुख्य भाषाएं- गुजराती, हिन्दी, मराठी एवं अंग्रेजी है।
    • सहयाद्री पर्वत से निकलने वाली दमनगंगा नदी यहां की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।

    शनिवार, 1 अगस्त 2026

    1 से 7 अगस्त, 2026 : विश्व स्तनपान सप्ताह

    विश्व स्तनपान सप्ताह

    (World Breastfeeding Week)

    आज का दिन : 1 से 7 अगस्त, 2026

    • नवजात शिशु के लिए मां के दूध का महत्व बताने वाला यह सप्ताह प्रतिवर्ष 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है।
    • अगस्त, 1990 में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और विभिन्न देशों की सरकारों ने विश्व स्तनपान सप्ताह मनाने का निर्णय किया।
    • विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर 4-5 अगस्त को विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ वेबिनार की मेजबानी करेंगे। इस वेबिनार का विषय/थीम Strengthening what works: new evidence to accelerate investment in breastfeeding रखी गई है।

    विश्व स्तनपान सप्ताह के उद्देश्य इस प्रकार हैं:

    • माता-पिता में स्तनपान को लेकर जागरूकता पैदा करना।
    • माता-पिता को स्तनपान को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
    • शुरुआत एवं अनन्य स्तनपान के महत्व को लेकर जागरुकता पैदा करना और पर्याप्त एवं उचित पूरक आहार।
    • स्तनपान के महत्व से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराना।

    भारत में राष्ट्रीय स्तनपान संवर्धन कार्यक्रम

    • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने नवजात और शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए रणनीति 'प्रजनन, मातृ, नवजात शिशु, बाल और किशोर स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण के तहत मां (मां का पूर्ण  स्नेह-MOTHER’S ABSOLUTE AFFECTION) के रूप में एक राष्ट्रीय स्तनपान प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

    स्तनपान महत्वपूर्ण है क्योंकि:

    • यह मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
    • यह प्रारंभिक अवस्था में दस्त और तीव्र श्वसन संक्रमण जैसे संक्रमणों को रोकता है और इससे शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।
    • यह मां में स्तन कैंसर, अंडाशय के कैंसर, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग विकसित होने के खतरे को कम करता है।
    • यह नवजात को मोटापे से संबंधित रोगों, डायबिटीज से बचाता है और आईक्यू बढ़ाता है।

    नवजात शिशु के लिए अमृत है माँ का दूध

    • नवजात शिशुओं के लिए माँ का दूध अमृत के समान है। शिशुओं को जन्म से छ: माह तक केवल माँ का दूध पिलाने के लिए महिलाओं को इस सप्ताह के दौरान विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।
    • शिशु के जन्म के पश्चात स्तनपान एक स्वाभाविक क्रिया है। लेकिन प्रथम बार मां बन रही माताओं को स्तनपान की जानकारी न होने कारण बच्चा कुपोषण एवं संक्रमण से पीडि़त हो सकता है।
    • मां के प्रथम दूध को 'कोलोस्ट्रम' कहा जाता है। यह गाढ़ा, पीला दूध होता है, जो शिशु को जन्म देने के 4-5 दिनों में उत्पन्न होता है।
    • मां के दूध में लेक्टोफोर्मिन नामक तत्व होता है, जो शिशु की आंत में लौह तत्व को बांध लेता है और लौह तत्व के अभाव में उसकी आंत में रोगाणु पनप नहीं पाते।

    शिशु और छोटे बच्चे को दूध पिलाने के सही तरीके:

    • जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान की शुरुआत।
    • जन्म के बाद पहले छह महीने तक अनन्य स्तनपान। अन्य प्रकार के दूध, आहार, पेय अथवा पानी को 'ना'।
    • स्तनपान को जारी रखते हुए छह महीने की आयु से उचित और पर्याप्त पूरक आहार।
    • दो वर्ष की आयु अथवा इसके बाद तक निरंतर स्तनपान।

    *विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 का विषय/थीम* 

    Breastfeeding for a sustainable start in life: strengthen what works

    बुधवार, 29 जुलाई 2026

    29 जुलाई 2026 : विश्व बाघ दिवस

    विश्व बाघ दिवस और भारत में टाइगर रिजर्व संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

    (World Tiger Day)

    आज का दिन : 29 जुलाई 2026

     

    • विश्व बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है।
    • सन् 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए वैश्विक बाघ सम्मेलन में विश्व बाघ दिवस यानी वल्र्ड टाइगर डे मनाने का निर्णय लिया गया था। इसे अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस और ग्लोबल टाइगर डे के नाम से भी जाना जाता है।
    • बाघ सम्मेलन में शामिल हुए 13 देशों ने सन् 2022 तक बाघों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था। दूसरी ग्लोबल टाइगर समिट या अंतरराष्ट्रीय बाघ फोरम अक्टूबर 2022 में रूस के व्लादिवोस्तोक में हुई। भारत सरकार की ओर से इस पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया।
    • विश्व बाघ दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का उद्देश्य बाघों के संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। 
    • वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के अनुसार वर्तमान में दुनिया में 5711 से अधिक बाघ हैं। इनमें भी सर्वाधिक बाघ भारत में हैं।
    • हमारा राष्ट्रीय पशु भी बाघ है। आजादी के बाद से सन् 1972 तक हमारा राष्ट्रीय पशु सिंह था। इसके बाद बाघ यानी रॉयल बंगाल टाइगर को आकर्षक सुन्दरता, ताकत, फुर्तीलेपन और अपार शक्ति के कारण भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में स्वीकार किया गया।
    • रॉयल बंगाल टाइगर यानी राजसी बाघ (Panthera Tigris) एक धारीदार जानवर है। इसकी मोटी पीली रोंयेदार चमड़ी पर गहरी काली धारियां होती हैं। यह बाघ परिवार की एक उप-प्रजाति है और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। 
    • वनों में शिकार और जरूरी संसाधनों की कमी के कारण देश में बाघों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 
    • भारत में बाघों के संरक्षण के लिए अप्रेल, 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (बाघ परियोजना) शुरू किया गया। इस परियोजना के तहत देश में अब तक (वर्ष 2026 तक) बाघों के लिए 58 आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई है। 2025 में 58वें बाघ संरक्षित क्षेत्र के रूप में मध्य प्रदेश में माधव टाइगर रिजर्व की अधिसूचना जारी की गई।
    • देश में बाघों के संरक्षण का काम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की देखरेख में ही चल रहा है।
    • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अनुसार भारत में बाघों को बचाने के लिए ‘बाघ बचाओ परियोजना’ के तहत चल रही परियोजनाएं 18 राज्यों में संचालित हैं।
    • अब तक बाघों की गणना को लेकर 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 में रिपोर्ट जारी हो चुकी है।
    • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना के अनुसार देश में बाघों की संख्या 3,682 है। यानी वर्तमान में भारत में दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत बाघ हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से प्रति चार वर्ष में यह गणना करवाई जाती है। देश में अभी  All India Tiger Estimation cycle 2026 शुरू हो चुकी है। सामान्य शब्दों में कहें तो यह छठी बाघ गणना है और इसकी तैयारी औपचारिक रूप से 22 अगस्त, 2025 को हुई थी। इसे एनटीसीए ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर शुरू किया है। हालांकि यह पिछली बाघ गणना की तरह नहीं होगी और इसमें बाघों की गिनती के साथ उनके शिकार, हैबिटाट आदि को भी व्यापक रूप से समझने पर जोर रहेगा।
    • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने दुनिया में 13 देशों की पहचान की है, जहां बाघ पाए जाते हैं। भारत ने इन 13 देशों में बाघ संरक्षण की मुहिम चलाने का निर्णय लिया है। ये 13 देश हैं- बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम।

    ग्लोबल टाइगर फोरम (जीटीएफ)

    • ग्लोबल टाइगर फोरम यानी जीटीएफ दुनिया का एकमात्र ऐसा अंतर-सरकारी संगठन है जो पूरी तरह से बाघों के संरक्षण के लिए समर्पित है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह संगठन 13 देशों—बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम—को एक मंच पर लाता है। यह फोरम बाघों, उनके शिकार रोकने और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए एक साझा तरीका अपनाता है। जीटीएफ वैश्विक बाघ संरक्षण में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करता है।
    • वर्ष 2026 में भारत सरकार Protecting Tigers, Preserving Ecosystems (बाघों की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण) संदेश के साथ विश्व बाघ दिवस मना रही है।

    भारत ने शुरू किया इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस

    • भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कर्नाटक के मैसूर में 9 अप्रैल, 2023 को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमारे ग्रह पर रहने वाली सात बिग कैट बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) का शुभारंभ किया।
    • इस एलायंस का उद्देश्य बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के प्राकृतिक आवासों को कवर करने वाले 97 रेंज देशों तक पहुंचना है। आईबीसीए वैश्विक सहयोग और जंगली जानवरों, विशेष रूप से बिग कैट संरक्षण की कोशिशों को और मजबूत करेगा।

    बाघों की 6 प्रमुख प्रजातियां

    • पूरी दुनिया में बाघों की मुख्यत: 6 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये इस प्रकार हैं-
    • साइबेरियन बाघ : यह प्रजाति साइबेरिया के सुदूर पूर्वी इलाके अमर-उसर में पाई जाती है। उत्तर-पूर्वी चीन में हुंचुन नेशनल साइबेरियाई टाइगर नेचर रिजर्व रूस के सुदूर पूर्व में भी यह साइबेरियन बाघ की प्रजाति पाई जाती है।
    • बंगाल टाइगर: इस प्रजाति को पेंथेरा टिगरिस के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। इसी प्रजाति के बाघ को हमारे राष्ट्रीय पशु होने का गौरव प्राप्त है।
    • इंडोचाइनीज बाघ : यह प्रजाति कंबोडिया, चीन, बर्मा, थाईलैंड और वियतनाम में पाई जाती है।
    • मलायन बाघ : यह प्रजाति मलय प्रायद्वीप में पाई जाती है।
    • सुमात्रा बाघ : यह प्रजाति सुमात्रा द्वीप में पाई जाती है।
    • साउथ चाइना बाघ : यह प्रजाति दक्षिण चीन में पाई जाती है।

    देश में अब 58 टाइगर रिजर्व

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2026 तक देश में कुल 58 टाइगर रिजर्व हैं। 58 टाइगर रिजर्व की राज्य अनुसार सूची इस प्रकार है-

    क्रमराज्यटाइगर रिजर्वअधिसूचना वर्ष
    1आंध्र प्रदेशनागार्जुनसागर सागर2007
    2अरुणाचल प्रदेशनाम्दफा 1987
    3अरुणाचल प्रदेशपक्के2012
    4अरुणाचल प्रदेशकमलांग2017
    5असमनामेरी2000
    6असमकाजीरंगा2007
    7असममानस2008
    8असमओरांग2016
    9बिहारवाल्मीकि2012
    10छत्तीसगढ़इंद्रावती2009
    11छत्तीसगढ़उदंती सीतानदी2009
    12छत्तीसगढ़अचानकमार2009
    13छत्तीसगढ़गुरु घासीदास तमोर पिंगला 56वां2024
    14झारखंडपलामू2012
    15कर्नाटकनागरहोल2007
    16कर्नाटकबांदीपुर2007
    17कर्नाटककाली2007
    18कर्नाटकबिलिगिरी रंगनाथ मंदिर2007
    19कर्नाटकभद्रा2007
    20केरलपरम्बिकुलम2009
    21केरलपेरियार2007
    22मध्य प्रदेशबांधवगढ़2007
    23मध्य प्रदेशपन्ना2007
    24मध्य प्रदेशकान्हा2007
    25मध्य प्रदेशपेंच2007
    26मध्य प्रदेशसतपुड़ा2007
    27मध्य प्रदेशसंजय धुबरी2011
    28मध्य प्रदेशवीरांगना दुर्गावती (54वां)2023
    29मध्य प्रदेशरातापानी (57वां)2024
    30मध्य प्रदेशमाधव2025
    31महाराष्ट्रमेलघाट2007
    32महाराष्ट्रतड़ोभा अंधारी2007
    33महाराष्ट्रपेंच-एमएच2007
    34महाराष्ट्रबोर2012
    35महाराष्ट्रसहयाद्रि2012
    36महाराष्ट्रनवेगांव नागजीरा2013
    37मिजोरमदम्पा2007
    38ओडिसासिमलीपाल2007
    39ओडिसासतकोशिया2007
    40राजस्थानरणथम्भौर2007
    41राजस्थानसरिस्का2007
    42राजस्थानमुकुन्दरा2013
    43राजस्थानरामगढ़ विषधारी (52वां)2022
    44राजस्थानधौलपुर-करौली (55वां)2023
    45उत्तराखंडकॉर्बेट2010
    46उत्तराखंडराजाजी2015
    47उत्तर प्रदेशदूधवा2010
    48उत्तर प्रदेशपीलीभीत2014
    49उत्तर प्रदेशरानीपुर (53वां)2022
    50तमिलनाडुसत्यमंगलम2013
    51तमिलनाडुश्रीविल्लिपुथुर मेगामलाई2021
    52तमिलनाडुकलाकड़ मुंडनथुराई2007
    53तमिलनाडुअनामलाई2007
    54तमिलनाडुमुदुमलई2007
    55तेलंगानाकवल2012
    56तेलंगानाअमराबाद2015
    57पश्चिम बंगालसुंदरबन2007
    58पश्चिम बंगालबुक्सा2009

    सोमवार, 27 जुलाई 2026

    27 जुलाई 2026 : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस

    केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस
    (Central Reserve Police Force Foundation Day)

    आज का दिन : 27 जुलाई 2026

    • प्रतिवर्ष 27 जुलाई को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस मनाया जाता है।
    • 27 जुलाई, 1939 को ब्रिटिश सरकार ने 'क्राउन रिप्रेंजेन्टेटिव पुलिस' के नाम से नीमच (मध्य प्रदेश) में प्रथम बटालियन का गठन किया। इस बल का कार्य भारत की तत्कालीन रियासतों में आंदोलनों एवं राजनीतिक अशांति तथा साम्राज्यिक नीति के रूप में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना था।
    • स्वतंत्रता के बाद 28 दिसम्बर, 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल का नाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (के.रि.पु. बल) कर दिया गया। जिसे सीआरपीएफ के नाम से भी जाना जाता है।
    • वर्तमान यानी सन् 2026 में सीआरपीएफ के महानिदेशक जी पी सिंह हैं।


    200 से अधिक बटालियनें लगी हैं देश सेवा में

    • आजादी के बाद सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन का गठन किया गया। इसके बाद सन् 1956 में तीसरी बटालियन बनी। वर्तमान में यह बल 246 बटालियनों (203 जी डी बटालियन, 5 वी आई पी सुरक्षा बटालियन, 06 महिला बटालियन, 15 आर.ए.एफ. बटालियन, 10 कोबरा बटालियन, 5 बेतार बटालियन, 1 विशेष ड्यूटी ग्रुप और 1 संसदीय ड्यूटी ग्रुप), 43 ग्रुप केंद्रों, 22 प्रशिक्षण संस्थानों, 3 सी.डब्ल्यू.एस., 7 ए.डब्ल्यू.एस., 3 एस.डब्ल्यू.एस., 100 बिस्तर वाले 04 संयुक्त अस्पतालों और 50 बिस्तर वाले 18 संयुक्त अस्पतालों एवं 06 फील्ड अस्पतालों के गठन से बना हुआ एक बड़ा संगठन है।
    • बल के प्रमुख कार्यों में कानून व्यवस्था में राज्यों का सहयोग करना तथा देश के आंतरिक हिस्सों में असामाजिक तत्वों से निपटना है। इसके अलावा अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसी बल का कार्य है।
    • सन् 1950 में ही पूर्व भुज, तत्कालीन पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ (पीईपीएसयू) तथा चंबल के बीहड़ों के इलाकों में सीआरपीएफ की टुकडिय़ों द्वारा किये गये कार्यों को सर्वत्र सराहना मिली। पाकिस्तानी घुसपैठियों के हमलों के दौरान भी बल को पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया गया। 
    • भारत के हॉट स्प्रिंग (लदाख) पर पहली बार 21 अक्तूबर 1959 को चीनी हमले को केरिपुबल ने नाकाम किया। केरिपुबल के एक छोटे से गश्ती दल पर चीन द्वारा घात लगाकर हमला किया गया जिसमें बल के दस जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की याद में देश भर में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    • 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान एक बार फिर बल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को सहायता प्रदान की। इस आक्रमण के दौरान सीआरपीएफ के 8 जवान शहीद हुए। पश्चिमी और पूर्वी दोनों सीमाओं पर 1965 और 1971 में भारत पाक युद्ध में भी बल ने भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया।
    • श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के साथ भी सीआरपीएफ की महिलाओं की एक टुकड़ी सहित 13 कंपनियां गई थीं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के एक अंग के रूप में हैती, नामीबिया, सोमालिया और मालद्वीप में भी सीआरपीएफ जवानों ने अपनी भूमिका अदा की है। सीआरपीएफ की स्थापना से लेकर आज तक 2340 सीआरपीएफ कर्मियों ने बलिदान दिया है।
    • चाहे 80 के दशक का पंजाब का आतंकवाद हो या नक्सल ग्रस्त अशांत इलाके सीआरपीएफ ने इन जगहों पर शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है और कर रहा है।


    जय हिन्द

    रविवार, 26 जुलाई 2026

    26 जुलाई 2026 : कारगिल विजय दिवस

    कारगिल विजय दिवस

    (Kargil Vijay Diwas)

    आज का दिन : 26 जुलाई 2026

    • प्रतिवर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
    • भारतीय सेना के वीरों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को 26 जुलाई, 1999 को 'कारगिल युद्ध' में वापस भागने पर मजबूर कर दिया था। इसी विजय के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाता है।
    • वर्ष 2026 में 27वां कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है।
    • इस दिवस को प्रतिवर्ष मनाने का उद्देश्य देश के वीर सपूतों की वीरता और उनके बलिदान को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करना है।
    • केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख (उस समय जम्मू और कश्मीर राज्य) के कारगिल की पहाडिय़ों पर मई, 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों (पाकिस्तानी सैनिकों) ने कब्जा जमा लिया। इसका जवाब देते हुए भारतीय थल सेना और वायु सेना ने इन्हें खदेड़कर पुन: क्षेत्र पर तिरंगा लहराया। 26 जुलाई, 1999 को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए कारगिल युद्ध में जीत हासिल की। 
    • कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत 14 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक 13 दिवसीय च्च्शौर्य विजय यात्राज्ज् को हरी झंडी दिखाई।

    चरवाहे ताशी नामग्याल ने दी थी घुसपैठ की सूचना

    • एक चरवाहे ताशी नामग्याल ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ कर कब्जा जमा लेने की सूचना 3 मई 1999 को दी थी। नामग्याल उस इलाके में अपने याक को ढूंढऩे गए थे, तब उनकी नजर पाकिस्तानी घुसपैठियों पर गई और उन्होंने इसकी सूचना भारतीय सैनिकों को दी।
    • भारतीय सेना को कारगिल के युद्ध में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाडिय़ों पर बैठे थे और हमारे सैनिकों को गहरी खाई में रहकर उनसे मुकाबला करना था। भारतीय जवानों को आड़ लेकर या रात में चढ़ाई कर ऊपर पहुंचना पड़ रहा था, यह बहुत जोखिमपूर्ण था।
    • कारगिल युद्ध में हमारे 527 जवान शहीद हुए और 1363 जवान घायल हुए।
    • द्रास में कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों की स्मृति में 'वॉर मेमोरियल' बनाया गया है।
    • कारगिल युद्ध के बाद भारतीय वीरों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे (मरणोपरांत), द ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, जम्मू कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टन विक्रम बत्रा (मरणोपरांत) को सम्मानित किया गया।
    • भारतीय वायुसेना के वीरों ने कारगिल में जिस ऑपरेशन के तहत दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया, उसे 'सफेद सागर' नाम दिया गया था।
    • कारगिल युद्ध के दौरान नौसेना ने भी दुश्मन के छक्के छुड़ाने में योगदान दिया था। नौसेना की ओर से 'ऑपरेशन तलवार' नाम से रक्षा अभियान चलाया गया था।
    • पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी.पी. मलिक ने कारगिल युद्ध पर एक पुस्तक लिखी है, जिसका नाम है- 'कारगिल : एक अभूतपूर्व विजय'
    • कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे।
    • बॉलीवुड ने भी कारगिल युद्ध पर कई फिल्मों का निर्माण किया है। इनमें एलओसी कारगिल (2003), स्टम्प्ड (2003), लक्ष्य (2004), मौसम (2011) शामिल हैं।

     
    जय हिन्द! जय हिन्द की सेना!!

    शनिवार, 25 जुलाई 2026

    25 जुलाई 2026 : अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस

    अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस
    (International Day on Judicial Well-being)

    आज का दिन : 25 जुलाई 2026

    • प्रतिवर्ष 25 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार यह दिवस 25 जुलाई 2025 को मनाया गया था।
    • यूएन ने मार्च 2025 में यह दिवस मनाने की घोषणा की थी।
    • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
    • 25 जुलाई को यह दिवस मनाने का कारण नाउरू घोषणा है। नाउरू दक्षिण प्रशांत महासागर में माइक्रोनेशिया में स्थित दुनिया का सबसे छोटा द्वीप गणराज्य है। 25 जुलाई 2024 को नाउरू घोषणा (Nauru Declaration on Judicial Well-being) को अपनाया गया था। इसके अनुसार न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक कल्याण जरूरी है।


    • नाउरू घोषणा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में किए गए संकल्पों को आगे बढ़ाने के लिए 20-22 अगस्त 2025 को पोर्ट मोरेस्बी, पापुआ न्यू गिनी में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सत्यनिष्ठा एवं कल्याण सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में विश्वभर के न्याय क्षेत्रों के विद्वानों ने भाग लेकर न्यायालयों में न्यायिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां और प्रभावी उपाय विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।


    *अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस-2026 का विषय/थीम*
    न्याय की शुरुआत कल्याण से होती है
    Justice begins with well-being

    25 जुलाई 2026 : वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (विश्व डूबने से बचाव दिवस)

    आज का दिन : 25 जुलाई 2026

    वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (विश्व डूबने से बचाव दिवस)

    (World Drowning Prevention Day)


    • प्रतिवर्ष 25 जुलाई को विश्व डूबने से बचाव दिवस मनाया जाता है।
    • अप्रेल 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वल्र्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे मनाने संबंधित प्रस्ताव पारित किया था।
    • वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (World Drowning Prevention Day) मनाने का कारण इससे होने वाली जन हानि है।
    • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक वर्ष लगभग 3,00,000 लोगों की डूबने से मृत्यु हो जाती हैं। इनमें 82,000 बच्चे एक से 14 वर्ष की आयु के हैं। इसलिए डूबना दुनिया भर में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है। इसमें अधिकतर 1-24 वर्ष की आयु के बच्चों और युवाओं के लिए डूबना विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
    • डूबना एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण पिछले दशक में 2.5 मिलियन से अधिक मौतें हुई हैं।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अनजाने में हुई चोट से होने वाली मौतों में डूबना तीसरा प्रमुख कारण है। 
    • भारत में दिसंबर, 2023 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने ‘डूबने की घटनाओं की रोकथाम के लिए रणनीतिक ढांचे’ (Strategic Framework for Drowning Prevention) का अनावरण किया था।

    *विश्व डूबने से बचाव दिवस-2026 का विषय/थीम*

    Unite to turn the tide



    मंगलवार, 21 जुलाई 2026

    22 जुलाई 2026 : राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस

    राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस

    National Flag Adoption Day

    आज का दिन : 22 जुलाई 2026

    • देश में प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस मनाया जाता है।
    • 22 जुलाई 1947 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज को अंगीकृत किया था, इसी कारण प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    • प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। यह एक विशेष संरचना यानी डिजाइन होती है, जिसकी अपनी अलग विशेषता और पहचान होती है।

    तिरंगे का इतिहास

    • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रथम ध्वज वर्ष 1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता द्वारा बनाया गया था। जिसे 7 अगस्त, 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की हरी पट्टी में आठ कमल, नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद और बीच की पीली पट्टी पर वन्देमातरम् लिखा था।
    • द्वितीय ध्वज 1907 को पेरिस में मैडम भीखाजी कामा और उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था।
    • तृतीय ध्वज 1917 में डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था।
    • चौथा ध्वज आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने कांग्रेस के बेजवाड़ा सत्र में गांधी जी को दिया था। यह ध्वज लाल व हरे रंग का था। बाद में गांधी जी के कहने पर 1931 में इस ध्वज को केसरिया, सफेद, हरा करके मध्य में चरखे को रखा गया।
    • अंत में 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज तिरंगे को 'भारतीय राष्ट्रीय ध्वज' के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया।
    • मुख्यत: तिरंगा राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाता है। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति दिल्ली के राजपथ पर और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हैं।
    • भारत की आम जनता को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने का श्रेय नवीन जिंदल को जाता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए संघर्ष किया, जिसके बाद भारत सरकार ने 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन करके आम जन को नियमों के साथ ध्वज फहराने का अधिकार दिया।
    • गृह मंत्रालय ने भारतीय झंडा संहिता 2002 में संशोधन किया कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते गए और हाथ से बुने या मशीन से बने, कपास / पॉलिएस्टर / ऊन / रेशम / खादी बंटिंग से बना होगा। यह संशोधन 30 दिसंबर, 2021 को लागू हुआ। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज आयुध वस्त्र फैक्टरी, शाहजहांपुर द्वारा निर्मित एक रेशमी झंडा है, जो झंडा संहिता के अनुरूप है। इसके अलावा तिरंगा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए और उस पर मानक चिह्न अंकित होना आवश्यक है। राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली खादी संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं-
      - कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ फेडरेशन, हुबली, कर्नाटक
      - मध्य भारत खादी संघ, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
      - खादी डायर्स एंड प्रिंटर्स, बोरीवली, महाराष्ट्र
      - धारवाड़ तालुक गरग क्षेत्रीय सेवा संघ, कर्नाटक।
       

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