बुधवार, 29 जुलाई 2026

29 जुलाई 2026 : विश्व बाघ दिवस

विश्व बाघ दिवस और भारत में टाइगर रिजर्व संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

(World Tiger Day)

आज का दिन : 29 जुलाई 2026

 

  • विश्व बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है।
  • सन् 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए वैश्विक बाघ सम्मेलन में विश्व बाघ दिवस यानी वल्र्ड टाइगर डे मनाने का निर्णय लिया गया था। इसे अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस और ग्लोबल टाइगर डे के नाम से भी जाना जाता है।
  • बाघ सम्मेलन में शामिल हुए 13 देशों ने सन् 2022 तक बाघों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था। दूसरी ग्लोबल टाइगर समिट या अंतरराष्ट्रीय बाघ फोरम अक्टूबर 2022 में रूस के व्लादिवोस्तोक में हुई। भारत सरकार की ओर से इस पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया।
  • विश्व बाघ दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का उद्देश्य बाघों के संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। 
  • वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के अनुसार वर्तमान में दुनिया में 5711 से अधिक बाघ हैं। इनमें भी सर्वाधिक बाघ भारत में हैं।
  • हमारा राष्ट्रीय पशु भी बाघ है। आजादी के बाद से सन् 1972 तक हमारा राष्ट्रीय पशु सिंह था। इसके बाद बाघ यानी रॉयल बंगाल टाइगर को आकर्षक सुन्दरता, ताकत, फुर्तीलेपन और अपार शक्ति के कारण भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में स्वीकार किया गया।
  • रॉयल बंगाल टाइगर यानी राजसी बाघ (Panthera Tigris) एक धारीदार जानवर है। इसकी मोटी पीली रोंयेदार चमड़ी पर गहरी काली धारियां होती हैं। यह बाघ परिवार की एक उप-प्रजाति है और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। 
  • वनों में शिकार और जरूरी संसाधनों की कमी के कारण देश में बाघों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 
  • भारत में बाघों के संरक्षण के लिए अप्रेल, 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (बाघ परियोजना) शुरू किया गया। इस परियोजना के तहत देश में अब तक (वर्ष 2026 तक) बाघों के लिए 58 आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई है। 2025 में 58वें बाघ संरक्षित क्षेत्र के रूप में मध्य प्रदेश में माधव टाइगर रिजर्व की अधिसूचना जारी की गई।
  • देश में बाघों के संरक्षण का काम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की देखरेख में ही चल रहा है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अनुसार भारत में बाघों को बचाने के लिए ‘बाघ बचाओ परियोजना’ के तहत चल रही परियोजनाएं 18 राज्यों में संचालित हैं।
  • अब तक बाघों की गणना को लेकर 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 में रिपोर्ट जारी हो चुकी है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना के अनुसार देश में बाघों की संख्या 3,682 है। यानी वर्तमान में भारत में दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत बाघ हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से प्रति चार वर्ष में यह गणना करवाई जाती है। देश में अभी  All India Tiger Estimation cycle 2026 शुरू हो चुकी है। सामान्य शब्दों में कहें तो यह छठी बाघ गणना है और इसकी तैयारी औपचारिक रूप से 22 अगस्त, 2025 को हुई थी। इसे एनटीसीए ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर शुरू किया है। हालांकि यह पिछली बाघ गणना की तरह नहीं होगी और इसमें बाघों की गिनती के साथ उनके शिकार, हैबिटाट आदि को भी व्यापक रूप से समझने पर जोर रहेगा।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने दुनिया में 13 देशों की पहचान की है, जहां बाघ पाए जाते हैं। भारत ने इन 13 देशों में बाघ संरक्षण की मुहिम चलाने का निर्णय लिया है। ये 13 देश हैं- बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम।

ग्लोबल टाइगर फोरम (जीटीएफ)

  • ग्लोबल टाइगर फोरम यानी जीटीएफ दुनिया का एकमात्र ऐसा अंतर-सरकारी संगठन है जो पूरी तरह से बाघों के संरक्षण के लिए समर्पित है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह संगठन 13 देशों—बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम—को एक मंच पर लाता है। यह फोरम बाघों, उनके शिकार रोकने और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए एक साझा तरीका अपनाता है। जीटीएफ वैश्विक बाघ संरक्षण में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करता है।
  • वर्ष 2026 में भारत सरकार Protecting Tigers, Preserving Ecosystems (बाघों की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण) संदेश के साथ विश्व बाघ दिवस मना रही है।

भारत ने शुरू किया इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस

  • भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कर्नाटक के मैसूर में 9 अप्रैल, 2023 को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमारे ग्रह पर रहने वाली सात बिग कैट बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) का शुभारंभ किया।
  • इस एलायंस का उद्देश्य बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के प्राकृतिक आवासों को कवर करने वाले 97 रेंज देशों तक पहुंचना है। आईबीसीए वैश्विक सहयोग और जंगली जानवरों, विशेष रूप से बिग कैट संरक्षण की कोशिशों को और मजबूत करेगा।

बाघों की 6 प्रमुख प्रजातियां

  • पूरी दुनिया में बाघों की मुख्यत: 6 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये इस प्रकार हैं-
  • साइबेरियन बाघ : यह प्रजाति साइबेरिया के सुदूर पूर्वी इलाके अमर-उसर में पाई जाती है। उत्तर-पूर्वी चीन में हुंचुन नेशनल साइबेरियाई टाइगर नेचर रिजर्व रूस के सुदूर पूर्व में भी यह साइबेरियन बाघ की प्रजाति पाई जाती है।
  • बंगाल टाइगर: इस प्रजाति को पेंथेरा टिगरिस के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। इसी प्रजाति के बाघ को हमारे राष्ट्रीय पशु होने का गौरव प्राप्त है।
  • इंडोचाइनीज बाघ : यह प्रजाति कंबोडिया, चीन, बर्मा, थाईलैंड और वियतनाम में पाई जाती है।
  • मलायन बाघ : यह प्रजाति मलय प्रायद्वीप में पाई जाती है।
  • सुमात्रा बाघ : यह प्रजाति सुमात्रा द्वीप में पाई जाती है।
  • साउथ चाइना बाघ : यह प्रजाति दक्षिण चीन में पाई जाती है।

देश में अब 58 टाइगर रिजर्व

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2026 तक देश में कुल 58 टाइगर रिजर्व हैं। 58 टाइगर रिजर्व की राज्य अनुसार सूची इस प्रकार है-

क्रमराज्यटाइगर रिजर्वअधिसूचना वर्ष
1आंध्र प्रदेशनागार्जुनसागर सागर2007
2अरुणाचल प्रदेशनाम्दफा 1987
3अरुणाचल प्रदेशपक्के2012
4अरुणाचल प्रदेशकमलांग2017
5असमनामेरी2000
6असमकाजीरंगा2007
7असममानस2008
8असमओरांग2016
9बिहारवाल्मीकि2012
10छत्तीसगढ़इंद्रावती2009
11छत्तीसगढ़उदंती सीतानदी2009
12छत्तीसगढ़अचानकमार2009
13छत्तीसगढ़गुरु घासीदास तमोर पिंगला 56वां2024
14झारखंडपलामू2012
15कर्नाटकनागरहोल2007
16कर्नाटकबांदीपुर2007
17कर्नाटककाली2007
18कर्नाटकबिलिगिरी रंगनाथ मंदिर2007
19कर्नाटकभद्रा2007
20केरलपरम्बिकुलम2009
21केरलपेरियार2007
22मध्य प्रदेशबांधवगढ़2007
23मध्य प्रदेशपन्ना2007
24मध्य प्रदेशकान्हा2007
25मध्य प्रदेशपेंच2007
26मध्य प्रदेशसतपुड़ा2007
27मध्य प्रदेशसंजय धुबरी2011
28मध्य प्रदेशवीरांगना दुर्गावती (54वां)2023
29मध्य प्रदेशरातापानी (57वां)2024
30मध्य प्रदेशमाधव2025
31महाराष्ट्रमेलघाट2007
32महाराष्ट्रतड़ोभा अंधारी2007
33महाराष्ट्रपेंच-एमएच2007
34महाराष्ट्रबोर2012
35महाराष्ट्रसहयाद्रि2012
36महाराष्ट्रनवेगांव नागजीरा2013
37मिजोरमदम्पा2007
38ओडिसासिमलीपाल2007
39ओडिसासतकोशिया2007
40राजस्थानरणथम्भौर2007
41राजस्थानसरिस्का2007
42राजस्थानमुकुन्दरा2013
43राजस्थानरामगढ़ विषधारी (52वां)2022
44राजस्थानधौलपुर-करौली (55वां)2023
45उत्तराखंडकॉर्बेट2010
46उत्तराखंडराजाजी2015
47उत्तर प्रदेशदूधवा2010
48उत्तर प्रदेशपीलीभीत2014
49उत्तर प्रदेशरानीपुर (53वां)2022
50तमिलनाडुसत्यमंगलम2013
51तमिलनाडुश्रीविल्लिपुथुर मेगामलाई2021
52तमिलनाडुकलाकड़ मुंडनथुराई2007
53तमिलनाडुअनामलाई2007
54तमिलनाडुमुदुमलई2007
55तेलंगानाकवल2012
56तेलंगानाअमराबाद2015
57पश्चिम बंगालसुंदरबन2007
58पश्चिम बंगालबुक्सा2009

सोमवार, 27 जुलाई 2026

27 जुलाई 2026 : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस
(Central Reserve Police Force Foundation Day)

आज का दिन : 27 जुलाई 2026

  • प्रतिवर्ष 27 जुलाई को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस मनाया जाता है।
  • 27 जुलाई, 1939 को ब्रिटिश सरकार ने 'क्राउन रिप्रेंजेन्टेटिव पुलिस' के नाम से नीमच (मध्य प्रदेश) में प्रथम बटालियन का गठन किया। इस बल का कार्य भारत की तत्कालीन रियासतों में आंदोलनों एवं राजनीतिक अशांति तथा साम्राज्यिक नीति के रूप में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना था।
  • स्वतंत्रता के बाद 28 दिसम्बर, 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल का नाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (के.रि.पु. बल) कर दिया गया। जिसे सीआरपीएफ के नाम से भी जाना जाता है।
  • वर्तमान यानी सन् 2026 में सीआरपीएफ के महानिदेशक जी पी सिंह हैं।


200 से अधिक बटालियनें लगी हैं देश सेवा में

  • आजादी के बाद सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन का गठन किया गया। इसके बाद सन् 1956 में तीसरी बटालियन बनी। वर्तमान में यह बल 246 बटालियनों (203 जी डी बटालियन, 5 वी आई पी सुरक्षा बटालियन, 06 महिला बटालियन, 15 आर.ए.एफ. बटालियन, 10 कोबरा बटालियन, 5 बेतार बटालियन, 1 विशेष ड्यूटी ग्रुप और 1 संसदीय ड्यूटी ग्रुप), 43 ग्रुप केंद्रों, 22 प्रशिक्षण संस्थानों, 3 सी.डब्ल्यू.एस., 7 ए.डब्ल्यू.एस., 3 एस.डब्ल्यू.एस., 100 बिस्तर वाले 04 संयुक्त अस्पतालों और 50 बिस्तर वाले 18 संयुक्त अस्पतालों एवं 06 फील्ड अस्पतालों के गठन से बना हुआ एक बड़ा संगठन है।
  • बल के प्रमुख कार्यों में कानून व्यवस्था में राज्यों का सहयोग करना तथा देश के आंतरिक हिस्सों में असामाजिक तत्वों से निपटना है। इसके अलावा अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसी बल का कार्य है।
  • सन् 1950 में ही पूर्व भुज, तत्कालीन पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ (पीईपीएसयू) तथा चंबल के बीहड़ों के इलाकों में सीआरपीएफ की टुकडिय़ों द्वारा किये गये कार्यों को सर्वत्र सराहना मिली। पाकिस्तानी घुसपैठियों के हमलों के दौरान भी बल को पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया गया। 
  • भारत के हॉट स्प्रिंग (लदाख) पर पहली बार 21 अक्तूबर 1959 को चीनी हमले को केरिपुबल ने नाकाम किया। केरिपुबल के एक छोटे से गश्ती दल पर चीन द्वारा घात लगाकर हमला किया गया जिसमें बल के दस जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की याद में देश भर में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान एक बार फिर बल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को सहायता प्रदान की। इस आक्रमण के दौरान सीआरपीएफ के 8 जवान शहीद हुए। पश्चिमी और पूर्वी दोनों सीमाओं पर 1965 और 1971 में भारत पाक युद्ध में भी बल ने भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया।
  • श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के साथ भी सीआरपीएफ की महिलाओं की एक टुकड़ी सहित 13 कंपनियां गई थीं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के एक अंग के रूप में हैती, नामीबिया, सोमालिया और मालद्वीप में भी सीआरपीएफ जवानों ने अपनी भूमिका अदा की है। सीआरपीएफ की स्थापना से लेकर आज तक 2340 सीआरपीएफ कर्मियों ने बलिदान दिया है।
  • चाहे 80 के दशक का पंजाब का आतंकवाद हो या नक्सल ग्रस्त अशांत इलाके सीआरपीएफ ने इन जगहों पर शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है और कर रहा है।


जय हिन्द

रविवार, 26 जुलाई 2026

26 जुलाई 2026 : कारगिल विजय दिवस

कारगिल विजय दिवस

(Kargil Vijay Diwas)

आज का दिन : 26 जुलाई 2026

  • प्रतिवर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
  • भारतीय सेना के वीरों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को 26 जुलाई, 1999 को 'कारगिल युद्ध' में वापस भागने पर मजबूर कर दिया था। इसी विजय के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाता है।
  • वर्ष 2026 में 27वां कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है।
  • इस दिवस को प्रतिवर्ष मनाने का उद्देश्य देश के वीर सपूतों की वीरता और उनके बलिदान को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करना है।
  • केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख (उस समय जम्मू और कश्मीर राज्य) के कारगिल की पहाडिय़ों पर मई, 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों (पाकिस्तानी सैनिकों) ने कब्जा जमा लिया। इसका जवाब देते हुए भारतीय थल सेना और वायु सेना ने इन्हें खदेड़कर पुन: क्षेत्र पर तिरंगा लहराया। 26 जुलाई, 1999 को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए कारगिल युद्ध में जीत हासिल की। 
  • कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत 14 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक 13 दिवसीय च्च्शौर्य विजय यात्राज्ज् को हरी झंडी दिखाई।

चरवाहे ताशी नामग्याल ने दी थी घुसपैठ की सूचना

  • एक चरवाहे ताशी नामग्याल ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ कर कब्जा जमा लेने की सूचना 3 मई 1999 को दी थी। नामग्याल उस इलाके में अपने याक को ढूंढऩे गए थे, तब उनकी नजर पाकिस्तानी घुसपैठियों पर गई और उन्होंने इसकी सूचना भारतीय सैनिकों को दी।
  • भारतीय सेना को कारगिल के युद्ध में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाडिय़ों पर बैठे थे और हमारे सैनिकों को गहरी खाई में रहकर उनसे मुकाबला करना था। भारतीय जवानों को आड़ लेकर या रात में चढ़ाई कर ऊपर पहुंचना पड़ रहा था, यह बहुत जोखिमपूर्ण था।
  • कारगिल युद्ध में हमारे 527 जवान शहीद हुए और 1363 जवान घायल हुए।
  • द्रास में कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों की स्मृति में 'वॉर मेमोरियल' बनाया गया है।
  • कारगिल युद्ध के बाद भारतीय वीरों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे (मरणोपरांत), द ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, जम्मू कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टन विक्रम बत्रा (मरणोपरांत) को सम्मानित किया गया।
  • भारतीय वायुसेना के वीरों ने कारगिल में जिस ऑपरेशन के तहत दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया, उसे 'सफेद सागर' नाम दिया गया था।
  • कारगिल युद्ध के दौरान नौसेना ने भी दुश्मन के छक्के छुड़ाने में योगदान दिया था। नौसेना की ओर से 'ऑपरेशन तलवार' नाम से रक्षा अभियान चलाया गया था।
  • पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी.पी. मलिक ने कारगिल युद्ध पर एक पुस्तक लिखी है, जिसका नाम है- 'कारगिल : एक अभूतपूर्व विजय'
  • कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे।
  • बॉलीवुड ने भी कारगिल युद्ध पर कई फिल्मों का निर्माण किया है। इनमें एलओसी कारगिल (2003), स्टम्प्ड (2003), लक्ष्य (2004), मौसम (2011) शामिल हैं।

 
जय हिन्द! जय हिन्द की सेना!!

शनिवार, 25 जुलाई 2026

25 जुलाई 2026 : अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस

अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस
(International Day on Judicial Well-being)

आज का दिन : 25 जुलाई 2026

  • प्रतिवर्ष 25 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार यह दिवस 25 जुलाई 2025 को मनाया गया था।
  • यूएन ने मार्च 2025 में यह दिवस मनाने की घोषणा की थी।
  • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • 25 जुलाई को यह दिवस मनाने का कारण नाउरू घोषणा है। नाउरू दक्षिण प्रशांत महासागर में माइक्रोनेशिया में स्थित दुनिया का सबसे छोटा द्वीप गणराज्य है। 25 जुलाई 2024 को नाउरू घोषणा (Nauru Declaration on Judicial Well-being) को अपनाया गया था। इसके अनुसार न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक कल्याण जरूरी है।


  • नाउरू घोषणा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में किए गए संकल्पों को आगे बढ़ाने के लिए 20-22 अगस्त 2025 को पोर्ट मोरेस्बी, पापुआ न्यू गिनी में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सत्यनिष्ठा एवं कल्याण सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में विश्वभर के न्याय क्षेत्रों के विद्वानों ने भाग लेकर न्यायालयों में न्यायिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां और प्रभावी उपाय विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।


*अंतरराष्ट्रीय न्यायिक कल्याण दिवस-2026 का विषय/थीम*
न्याय की शुरुआत कल्याण से होती है
Justice begins with well-being

25 जुलाई 2026 : वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (विश्व डूबने से बचाव दिवस)

आज का दिन : 25 जुलाई 2026

वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (विश्व डूबने से बचाव दिवस)

(World Drowning Prevention Day)


  • प्रतिवर्ष 25 जुलाई को विश्व डूबने से बचाव दिवस मनाया जाता है।
  • अप्रेल 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वल्र्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे मनाने संबंधित प्रस्ताव पारित किया था।
  • वर्ल्ड ड्राउनिंग प्रिवेन्शन डे (World Drowning Prevention Day) मनाने का कारण इससे होने वाली जन हानि है।
  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक वर्ष लगभग 3,00,000 लोगों की डूबने से मृत्यु हो जाती हैं। इनमें 82,000 बच्चे एक से 14 वर्ष की आयु के हैं। इसलिए डूबना दुनिया भर में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है। इसमें अधिकतर 1-24 वर्ष की आयु के बच्चों और युवाओं के लिए डूबना विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • डूबना एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण पिछले दशक में 2.5 मिलियन से अधिक मौतें हुई हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अनजाने में हुई चोट से होने वाली मौतों में डूबना तीसरा प्रमुख कारण है। 
  • भारत में दिसंबर, 2023 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने ‘डूबने की घटनाओं की रोकथाम के लिए रणनीतिक ढांचे’ (Strategic Framework for Drowning Prevention) का अनावरण किया था।

*विश्व डूबने से बचाव दिवस-2026 का विषय/थीम*

Unite to turn the tide



मंगलवार, 21 जुलाई 2026

22 जुलाई 2026 : राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस

राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस

National Flag Adoption Day

आज का दिन : 22 जुलाई 2026

  • देश में प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस मनाया जाता है।
  • 22 जुलाई 1947 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज को अंगीकृत किया था, इसी कारण प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। यह एक विशेष संरचना यानी डिजाइन होती है, जिसकी अपनी अलग विशेषता और पहचान होती है।

तिरंगे का इतिहास

  • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रथम ध्वज वर्ष 1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता द्वारा बनाया गया था। जिसे 7 अगस्त, 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की हरी पट्टी में आठ कमल, नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद और बीच की पीली पट्टी पर वन्देमातरम् लिखा था।
  • द्वितीय ध्वज 1907 को पेरिस में मैडम भीखाजी कामा और उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था।
  • तृतीय ध्वज 1917 में डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था।
  • चौथा ध्वज आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने कांग्रेस के बेजवाड़ा सत्र में गांधी जी को दिया था। यह ध्वज लाल व हरे रंग का था। बाद में गांधी जी के कहने पर 1931 में इस ध्वज को केसरिया, सफेद, हरा करके मध्य में चरखे को रखा गया।
  • अंत में 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज तिरंगे को 'भारतीय राष्ट्रीय ध्वज' के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया।
  • मुख्यत: तिरंगा राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाता है। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति दिल्ली के राजपथ पर और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हैं।
  • भारत की आम जनता को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने का श्रेय नवीन जिंदल को जाता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए संघर्ष किया, जिसके बाद भारत सरकार ने 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन करके आम जन को नियमों के साथ ध्वज फहराने का अधिकार दिया।
  • गृह मंत्रालय ने भारतीय झंडा संहिता 2002 में संशोधन किया कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते गए और हाथ से बुने या मशीन से बने, कपास / पॉलिएस्टर / ऊन / रेशम / खादी बंटिंग से बना होगा। यह संशोधन 30 दिसंबर, 2021 को लागू हुआ। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज आयुध वस्त्र फैक्टरी, शाहजहांपुर द्वारा निर्मित एक रेशमी झंडा है, जो झंडा संहिता के अनुरूप है। इसके अलावा तिरंगा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए और उस पर मानक चिह्न अंकित होना आवश्यक है। राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली खादी संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं-
    - कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ फेडरेशन, हुबली, कर्नाटक
    - मध्य भारत खादी संघ, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
    - खादी डायर्स एंड प्रिंटर्स, बोरीवली, महाराष्ट्र
    - धारवाड़ तालुक गरग क्षेत्रीय सेवा संघ, कर्नाटक।
     

जय हिन्द

सोमवार, 20 जुलाई 2026

20 जुलाई 2026 : अंतरराष्ट्रीय चन्द्रमा दिवस

अंतरराष्ट्रीय चन्द्रमा दिवस

(International Moon Day)

आज का दिन : 20 जुलाई 2026

  • 20 जुलाई, 2022 को पहला अंतरराष्ट्रीय चन्द्रमा दिवस मनाया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 दिसंबर, 2021 को 'बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में अंतरराष्ट्रीय सहयोग' पर अपने संकल्प 76/76 में 20 जुलाई को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय चंद्रमा दिवस मनाने की घोषणा की थी।
  • संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस का चयन इसलिए किया है क्योंकि आज ही के दिन 20 जुलाई, 1969 (भारतीय समयानुसार 21 जुलाई, रात 1:47) को पहली बार मनुष्य ने चन्द्रमा पर पहला कदम रखा था।
  • 20 जुलाई, 1969 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के यान अपोलो-11 में चार दिन की उड़ान पूरी करने के बाद अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्डिन ने पहली बार चांद पर कदम रखा था। दोनों अंतरिक्षयात्री चांद पर लगभग 21 घंटे से ज्यादा समय तक रहे थे। अब तक चन्द्रमा पर 12 धरती वासी कदम रख चुके हैं।
  • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य चंद्रमा संबंधी खोज और उपयोग के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है।

चन्द्रमा से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • चन्द्रमा, पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है।
  • यह सौर मंडल का पाँचवां सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है। 
  • पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी लगभग 384,403 किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी के व्यास का 30 गुना है। 
  • चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से 1/6 है। 
  • यह पृथ्वी कि परिक्रमा 27.3 दिन में पूरा करता है।

भारत का मिशन चंद्रयान

  • चन्द्रमा के लिए भारत का प्रथम अभियान चन्द्रयान-प्रथम 22 अक्टूबर, 2008 को लॉन्च किया गया। इस मिशन का उद्देश्य चांद पर पानी की खोज करना था। 29 अगस्त, 2009 को इससे सम्पर्क टूट गया था। 
  • भारत ने चन्द्रमा के लिए अपने मिशन को आगे बढ़ाते हुए चन्द्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया था। इसरो ने इस अभियान में स्वदेशी ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भेजा था। यह मिशन चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए था। हालांकि जब लैंडर विक्रम दक्षिणी धु्रव पर उतर रहा था तब उसका संपर्क टूट गया। बाद में नासा और इसरो दोनों ने इसका मलबा दक्षिणी ध्रुव पर खोज निकाला था। यह अभियान 80 प्रतिशत तक सफल रहा था।
  • इसरो ने 14 जुलाई, 2023 को देश का तीसरा चन्द्रमा मिशन चन्द्रयान-3 आंध्र-प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। चन्द्रयान-3 निर्धारित 41 दिनों की यात्रा के बाद 23 अगस्त को चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। इसी के साथ भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश बना। इस उपलब्धि के साथ भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना। भारत सरकार ने इस उपलब्धि के लिए प्रतिवर्ष 23 अगस्त को 'राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस' मनाने की घोषणा की।
  • हाल ही इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 की घोषणा की। चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने एकत्र कर पृथ्वी पर लाना है। वहीं चंद्रयान-5 जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए के साथ सहयोगात्मक मिशन है।

20 जुलाई 2026 : विश्व शतरंज दिवस

विश्व शतरंज दिवस

(World Chess Day)

आज का दिन : 20 जुलाई 2026

  • प्रतिवर्ष 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस मनाया जाता है।
  • 20 जुलाई, 1924 को शतरंज की अंतरराष्ट्रीय संस्था 'विश्व शतरंज फेडरेशन' (फीडे) की स्थापना के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है।
  • यह दिवस अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के रूप में सन् 1966 से ही मनाया जा रहा है, लेकिन यूनेस्को की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 12 दिसंबर, 2019 को इस दिवस को आधिकारिक रूप से मनाने का प्रस्ताव पारित किया।
  • भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने वर्ष 2020 में पहले विश्व शतरंज दिवस पर यूएन की ओर से आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया था। फीडे का मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है।
  • बुद्धि कौशल के खेल शतरंज का जन्मदाता भारत को माना जाता है। प्राचीन भारत में शतरंज के खेल को चतुरंग के नाम से जाना जाता था।
  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत वयस्क आबादी (भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस) ने जीवन में कभी-न-कभी शतरंज खेला है। आज भी 604 मिलियन लोग नियमित रूप से शतरंज खेलते हैं। शतरंज के खेल में प्रतिद्वन्द्वी को मात्र दो चालों में चेकमेट करना संभव है।


भारत ने 2022 में की थी शतरंज ओलंपियाड की मेजबानी

  • शतरंज की अंतरराष्ट्रीय संस्था फीडे ने 44वें शतरंज ओलंपियाड की मेजबानी पहली बार भारत को सौंपी थी।
  • शतरंज ओलंपियाड का आयोजन 28 जुलाई से 10 अगस्त, 2022 तक चेन्नई में हुआ। शतरंज ओलंपियाड की शुरुआत वर्ष 1927 में हुई।
  • फीडे की ओर से पहली बार मशाल रिले का आयोजन भारत से ही शुरू किया गया है। साथ ही फीडे ने तय किया है कि आगामी शतरंज ओलंपियाड सत्रों में भी मशाल रिले की शुरुआत भारत से ही होगी।
  • चेन्नई में 44वें शतरंज ओलंपियाड में 188 देशों के 2000 से अधिक खिलाडिय़ों ने भाग लिया।
  • भारत ने वर्ष 1956 में मॉस्को में हुए शतरंज ओलंपियाड में पहली बार हिस्सा लिया था। तब भारत 27वें स्थान पर रहा था। 
  • भारत ने वर्ष 2024 में हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित 45वें शतरंज ओलंपियाड में महिला और पुरुष दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीता।

हरिकृष्णन बने 87वें ग्रैंडमास्टर

  • हाल ही 13 जुलाई, 2025 को हरिकृष्णन ए रा भारत के 87वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। हरिकृष्णन ने फ्रांस के ला प्लेन अंतरराष्ट्रीय शतरंज महोत्सव में अपना तीसरा ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर यह उपलब्धि पाई। हरिकृष्णन से पहले श्रीहरि एलआर भारत के 86वें ग्रैंडमास्टर बने थे।

सोमवार, 29 जून 2026

29 जून 2026 : अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंध दिवस

अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंध दिवस

(International Day of the Tropics)

आज का दिन : 29 जून 2026

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  • प्रतिवर्ष 29 जून को अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंध दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रथम अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंध दिवस 29 जून, 2016 को मनाया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 जून, 2016 को इस दिवस को मनाने का संकल्प पारित किया।
  • अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंध दिवस उष्णकटिबंधीय देशों की असाधारण विविधता एवं विशिष्ट चुनौतियों और अवसरों को रेखांकित करते हुए उनके प्रति जागरूकता पैदा करता है।
  • उष्णकटिबंध (Tropics) दुनिया का वह ताप-कटिबंध है जो उत्तर में कर्क रेखा और दक्षिण में मकर रेखा के बीच भूमध्य रेखा के आसपास स्थित है। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि कर्क और मकर रेखा के बीच का क्षेत्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र है। यह पृथ्वी का सबसे गर्म क्षेत्र है क्योंकि सूर्य की किरणें लम्बवत् (सीधी) गिरती हैं।
  • भारत भी अपनी जलवायु के कारण उष्णकटिबंधीय देशों में शामिल है।
  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2050 तक उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में दुनिया की अधिकांश जनता और दो-तिहाई बच्चे रहेंगे। दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के लोग अल्पपोषण के अधिक शिकार हैं। साथ ही उष्णकटिबंधीय देशों में शहरी जनसंख्या के अनुपात में झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वालों की संख्या अधिक है। सबसे बड़ी बात उष्णकटिबंधीय क्षेत्र दुनिया के क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है और इसी हिस्से में विश्व की 80 प्रतिशत जैव विविधता पाई जाती है।
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विश्व के लगभग 95 प्रतिशत मैंग्रोव वन और 99 प्रतिशत मैंग्रोव प्रजातियां पाई जाती हैं।

29 जून 2026 : सांख्यिकी दिवस

 सांख्यिकी दिवस

(Statistics Day)

आज का दिन : 29 जून 2026

  • सांख्यिकी दिवस प्रतिवर्ष 29 जून को मनाया जाता है। पहली बार यह दिवस सन् 2007 में मनाया गया।
  • इसे राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस भी कह सकते हैं, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी 20 अक्टूबर को विश्व सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics & Programme Implementation) की ओर से भारतीय सांख्यिकी के जनक प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती 29 जून को सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दैनिक जीवन में सांख्यिकी के उपयोग को लोकप्रिय बनाना है। साथ ही यह दिवस देश की सांख्यिकीय प्रणाली में प्रो. महालनोबिस के अमूल्य योगदान को भी रेखांकित करता है।
  • केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन (एमओएसपीआई) की ओर से सांख्यिकी दिवस-2026 का राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किया जाएगा।
  • वर्तमान यानी वर्ष 2026 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रति पांच वर्ष में 20 अक्टूबर को 'विश्व सांख्यिकी दिवस' मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग की ओर से पहला सांख्यिकी दिवस वर्ष 2010 में, दूसरा 2015 में और तीसरा दिवस 2020 में मनाया गया।


पद्म विभूषण प्रो. पी.सी. महालनोबिस

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  • सांख्यिकीविद् प्रो. पी.सी. महालनोबिस का जन्म कलकत्ता में 29 जून 1893 को हुआ था। पद्म विभूषण से सम्मानित प्रो. महालनोबिस स्वतंत्रता के बाद गठित मंत्रिमंडल में सांख्यिकी सलाहकार बनाए गए थे।
  • सांख्यिकी के क्षेत्र में दो डेटा सेटों के बीच तुलनात्मक माप को 'महालनोबिस दूरी' के नाम से जाना जाता है। इस माप को स्वयं प्रो. महालनोबिस ने तैयार किया था। द्वितीय पंचवर्षीय योजना को तैयार करने में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।
  • प्रो. महालनोबिस ने कलकत्ता में 17 दिसंबर, 1931 को भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की। 

 *सांख्यिकी दिवस-2026 का विषय/थीम*

Unlocking the Potential of Administrative Data

(प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता का दोहन)

सोमवार, 22 जून 2026

22 जून 2026 : विश्व ऊंट दिवस

विश्व ऊंट दिवस

(World Camel Day)

आज का दिन : 22 जून 2026
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  • प्रतिवर्ष 22 जून को विश्व ऊंट दिवस मनाया जाता है।
  • विश्व ऊंट दिवस मनाने का उद्देश्य लुप्त होते इस पशु के संरक्षण की दिशा में लोगों को जागरूक करना है।
  • माना जाता है कि प्रथम ऊंट दिवस 2009 में पाकिस्तान में मनाया गया। वैसे तो ऊंट का प्राकृतिक आवास गर्म प्रदेश हैं, जहां 21 जून का दिन विश्व का सबसे बड़ा दिन होता है। लेकिन वर्ष 2009 में 21 जून को रविवार को फादर्स डे होने के कारण विश्व ऊंट दिवस को एक दिन आगे बढ़ाकर 22 जून कर दिया गया। तब से यह दिवस प्रतिवर्ष 22 जून को मनाया जाता है। 21 जून और 22 जून में दिन की विशालता के मामले में मात्र 2 सैकंड का अंतर है।
  • ऊंट के प्राकृतिक आवास वाले देशों में 22 जून को विश्व ऊंट दिवस मनाया जाता है।
  • र्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का अयोजन बीकानेर में 9 से 11 जनवरी, 2026 तक किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2024 को अंतरराष्ट्रीय ऊंट वर्ष (International Year of Camelids,2024) के रूप में मनाया गया था। 20 दिसंबर, 2017 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2024 को अंतराष्ट्रीय ऊंट वर्ष के रूप में मनाने संबंधी प्रस्ताव 72/210 पारित किया।

ऊंटों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत में शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में ऊंट की अहम भागीदारी रही है।
  • भारत सरकार ने राजस्थान के बीकानेर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीन 5 जुलाई, 1984 को उष्ट्र परियोजना निदेशालय की स्थापना की। इसके बाद 20 सितम्बर, 1995 को इसे क्रमोन्नत कर राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का नाम दिया गया। यह बीकानेर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर जोड़बीड़ क्षेत्र में स्थित है।
  • 'रेगिस्तान का जहाज' उपनाम से प्रसिद्ध यह पशु वाकई में जहाज का ही काम करता है। इसे एक बार चारा-पानी देने के बाद लगातार 40 दिन तक रेगिस्तान में परिवहन का कार्य करवाया जा सकता है।
  • सन् 1889 में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने ऊंट सवार फौज तैयार की थी, जिसे गंगा रिसाला नाम दिया गया था। इसमें 500 ऊंट सवार सैनिक शामिल थे। गंगा रिसाला की ऊंट सवार फौज ने प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन की ओर से भाग लिया था।
  • वर्ष 1948 में भारतीय सेना में ऊंट दस्ते को शामिल किया गया। इसके बाद 1975 में भारतीय सेना ने इसे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया। वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल में ऊंट सवार जवानों का एक दस्ता शामिल है। यह दस्ता मरुस्थल से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पेट्रोलिंग में जुटा हुआ है। पहली बार 1976 में 90 ऊंटों की टुकड़ी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनी थी।
  • ऊंट राजस्थान का राज्य पशु है। राजस्थान सरकार ने 30 जून, 2014 को ऊंट को पशुधन श्रेणी में राज्य पशु घोषित किया। इसकी अधिसूचना 19 सितम्बर, 2014 को जारी की गई। चिंकारा राजस्थान का वन्य जीव श्रेणी में राज्य पशु है।
  • राजस्थान सरकार ने ऊंट को मारने पर 5 साल की सजा वाला कानून भी लागू कर रखा है।
  • भारत में ऊंटों की 9 से अधिक नस्लें पाई जाती हैं। राजस्थान में बीकानेरी, मारवाड़ी, जैसलमेरी, मेवाड़ी, जालोरी, गुजरात में कच्छी और खराई, मध्य प्रदेश में मालवी और हरियाणा में मेवाती नस्ल के ऊंट पाए जाते हैं। सबसे प्रसिद्ध बीकानेरी व जैसलमेरी नस्ल है। यह एक कूबड़ वाला ऊंट है, जिसे अरबी ऊंट भी कहा जाता है। देश के कुल ऊंटों की आधी से अधिक संख्या राजस्थान में पाई जाती है।
  • दो कूबड़ वाला ऊंट केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की नूब्रा घाटी के ठंडे रेगिस्तान में पाया जाता है। इसे बैक्ट्रीयन ऊंट कहा जाता है।
  • अब सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा की निगरानी के लिए दो कूबड़ वाले ऊंट के उपयोग की रणनीति बनाई है।
  • राजस्थान के बीकानेर में प्रतिवर्ष जनवरी माह में ऊंट उत्सव का आयोजन किया जाता है। यहां मुख्यत: राईका व रैबारी समाज इस पशु का पालन करता है।
  • संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में ऊंटों का पहला अस्पताल खोला गया। यहां अलग से ऊंटनी के दूध की डेयरी भी स्थापित की गई है।
  • ऊंटनी का दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही टीबी, डायबिटीज, ऑटिज्म, दस्त, गठिया आदि के निदान में भी उपयोगी है। ऊंटनी के दूध में लौह तत्व विटामिनों का भंडार है, इसीलिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसे खाद्य आहार के रूप में मान्यता दी है।
  • आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में लगभग 50 देशों में 3 करोड़ से अधिक ऊंट हैं। लेकिन भारत में यह संख्या कम होती जा रही है। देश में 2019 में की गई 20वीं पशुधन गणना के अनुसार देश में मात्र 2.5 लाख ऊंट ही मौजूद थे। इनमें राजस्थान में 2.13 लाख ऊंट थे। जबकि 2012 की गणना में देश में लगभग 4 लाख और राजस्थान में 3.26 लाख ऊंट थे। गणना के अनुसार ऊंटों की गणना में बीकानेरी नस्ल का योगदान 29.6 प्रतिशत है।


रविवार, 21 जून 2026

जून माह का तीसरा रविवार : पितृ दिवस

पितृ दिवस

(Father's Day)

आज का दिन : जून माह का तीसरा रविवार
 

fathers-day

  • प्रतिवर्ष जून माह के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है।
  • सन् 1966 से फादर्स डे यानी पितृ दिवस मनाया जा रहा है।
  • वर्ष 2026 में जून माह का तीसरा रविवार 21 जून को आया है। इसलिए 21 जून को फादर्स डे मनाया जा रहा है।
  • आज पूरी दुनिया के सौ से अधिक देशों में मनाए जा रहे फादर्स डे की मूल परिकल्पना अमेरिका की है। सबसे पहले फादर्स डे 19 जून, 1909 को मनाया गया।
  • अमेरिका के वाशिंगटन के स्पोकेन शहर में सोनोरा डॉड ने अपने पिता की स्मृति में फादर्स डे मनाने की शुरुआत की थी। उन्हें फादर्स डे मनाने की प्रेरणा मदर्स डे से मिली।
  • सन् 1916 में अमेरिका राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने फादर्स डे मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सन् 1924 में राष्ट्रपति कैल्विन कुलिज ने फादर्स डे को राष्ट्रीय आयोजन घोषित किया।
  • फिर आया सन् 1966 जब अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने पहली बार जून माह के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाने का फैसला किया। इसके बाद सन् 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने फादर्स डे को नियमित अवकाश के रूप में घोषित किया।
  • विश्व के अधिकांश देशों में जून माह के तीसरे रविवार को ही फादर्स डे मनाया जाता है। पितृ दिवस पर पिता को उपहार देना, पिता के लिये विशेष भोज एवं पारिवारिक गतिविधियां शामिल हैं। फादर्स डे मनाने का मूल उद्देश्य पिता के प्रति प्रेम और सम्मान प्रदर्शित करना है। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में बच्चों के पास अपने पिता के लिए समय नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर पितृ दिवस मनाने की परंपरा का आरम्भ हुआ।
  • हमारी सनातन संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैसे आज्ञाकारी पुत्र हुए हैं, जिन्होंने अपने पिता के वचन की रक्षा के लिए 14 वर्ष का वनवास लिया। इसी प्रकार श्रवण कुमार जैसे मातृ-पितृ भक्त भी प्रेरणा के स्रोत हैं।

21 जून 2026 : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

(International Day of Yoga)

आज का दिन : 21 जून 2026
antarrashtriya-yog-diwas-2023-ki-theme
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम
Yoga for Healthy Ageing


  • प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से सम्पूर्ण विश्व में प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
  • योग दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को इस 5,000 साल पुरानी भारतीय शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक पद्धति के प्रति आकर्षित करना है। यह पद्धति मानव शरीर और मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में दिए अपने पहले भाषण में योग दिवस मनाने का आह्वान किया था।
  • 11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई तथा 21 जून, 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया।
  • 21 जून, 2026 को 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने योग को 'शारीरिक गतिविधि के एक्शन प्लान 2018-2030 : एक स्वस्थ दुनिया के लिए और अधिक सक्रिय लोग' में भी शामिल किया हुआ है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ राष्ट्रीय योग कार्यक्रम

  • वर्ष 2015 का पहला राष्ट्रीय स्तर का योग कार्यक्रम राजधानी दिल्ली के राजपथ पर हुआ था। आयुष मंत्रालय की ओर से वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का राष्ट्र स्तरीय मुख्य समारोह पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से कोलकाता में आयोजित किया गया। 21 जून, 2026 को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्य समारोह का नेतृत्व किया।

योग पुरस्कार-2026

  • भारत सरकार का आयुष मंत्रालय प्रतिवर्ष ‘योग प्रोत्साहन और विकास में असाधारण योगदान के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार’ प्रदान करता है। ये 4 पुरस्कार दो श्रेणियों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय में प्रदान किए जाते हैं। विजेताओं के नामों की घोषणा 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर की जाएगी।

21 जून को होता है वर्ष का सबसे लम्बा दिन

  • 21 जून वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है। इस दिन सूर्य का तेज सबसे अधिक होता है। प्रकृति के इसी रूप को सम्मान देते हुए इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया।
  • योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'युज्' से हुई है, जिसका अर्थ समाधि, जोड़ या सामंजस्य है। योग एक समग्र अवधारणा है, जो कि शरीर, मन, भावना और ऊर्जा के स्तर पर काम करता है।
  • योग को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है : कर्म योग- जिसमें हम शरीर का उपयोग करते हैं; ज्ञान योग- जिसमें हम मन का उपयोग करते हैं; भक्ति योग- जिसमें हम भावनाओं का उपयोग करते हैं तथा क्रिया योग- जहां हम ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
  • प्राचीन काल में महर्षि पंतजलि ने उस समय के प्रचलित प्राचीन योग अभ्यासों को व्यवस्थित व वर्गीकृत करते हुए 'पातंजलयोगसूत्र' नामक ग्रन्थ की रचना की थी।
  • योग भारतीय सनातन संस्कृति के छह दर्शनों- 1. न्याय, 2. वैशेषिक, 3. सांख्य, 4. योग, 5. मीमांसा और  6. वेदान्त में से एक है।

*अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 का विषय/थीम*

Yoga for Healthy Ageing

शनिवार, 20 जून 2026

20 जून 2026 : विश्व शरणार्थी दिवस 2026 की थीम व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

विश्व शरणार्थी दिवस

(World Refugee Day)

आज का दिन : 20 जून 2026

world-refugee-day-2025-in-hindi
विश्व शरणार्थी दिवस 2026 : Until Everyone Is Safe
  • प्रतिवर्ष 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने प्रथम विश्व शरणार्थी दिवस 20 जून, 2001 को मनाया था।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व शरणार्थी दिवस मनाने का संकल्प 12 फरवरी, 2001 को अपनाया। यह दिवस मनाने का उद्देश्य शरणार्थियों के प्रति सम्मान प्रकट करना और उनकी समस्याओं के प्रति लोगों व सरकारों का ध्यान आकर्षित करना है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 1951 में हुए रिफ्यूजी कन्वेंशन और इसके बाद 1967 के प्रोटोकॉल से शरणार्थियों के हितों की रक्षा की जा रही है।
  • 1951 के रिफ्यूजी कन्वेंशन के अनुसार एक शरणार्थी वह है जिसे अपनी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी विशेष सामाजिक समूह में सदस्यता या राजनीतिक विचारधारा के कारण उत्पीडऩ के भय से अपना घर और देश छोडऩा पड़ा हो।
  • पलायन को मजबूर का सम्मान करना ही इस दिवस को मनाने की सार्थकता सिद्ध करता है।
  • दुनिया में अशांति फैलने के साथ ही रिफ्यूजी यानी शरणार्थियों की समस्या भी विकराल होती जा रही है। इसी समस्या पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने और शरणार्थियों के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र यह दिवस मनाता है।

1951 की शरणार्थी कन्वेन्शन

  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से दूसरे विश्व युद्ध के बाद पैदा हुए हालात के कारण 14 दिसंबर, 1950 को यह संधि लाई गई। 
  • जुलाई 1951 में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने इस संधि के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए जिनेवा में बैठक की थी। इसी कन्वेशन के तहत शरणार्थियों की परिभाषा तय की गई और उनकी सुरक्षा, सहायता और अधिकार निर्धारित किए गए हैं। 
  • वर्ष 1967 में एक प्रोटोकॉल के तहत इसका दायरा बढ़ाया गया। शरणार्थियों के बारे में वर्ष 1969 में अफ्रीका में शरणार्थी कन्वेशन, 1984 में लैटिन अमेरिका में हुआ कार्टाजेना घोषणा-पत्र और योरोपीय संघ की साझा शरणार्थी प्रणाली उल्लेखनीय है। 
  • 1951 के शरणार्थी कन्वेन्शन के सिद्धान्तों के लिये, दिसम्बर 2018 में हुए 'शरणार्थियों पर ग्लोबल कॉम्पैक्ट' के जरिए फिर से शरणार्थियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के संकल्प व्यक्त किए गए।

विश्व शरणार्थी दिवस-2026 का विषय/थीम
Until Everyone Is Safe


सोमवार, 15 जून 2026

विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस 2026 की थीम व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस

(World Day to Combat Desertification and Drought)

आज का दिन : 17 जून 2026

  • प्रतिवर्ष 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार 'विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस' 17 जून, 1995 को मनाया गया।
  • यह दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ रहे मरुस्थलीकरण व सूखे को रोकना है।
  • वर्ष 2026 के विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस पर वैश्विक समारोह की मेजबानी केन्या सरकार द्वारा की जा रही है।

रियो सम्मेलन में पड़ी थी इस दिवस को मनाने की नींव

  • 'विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस' को मनाने की नींव ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरियो में 3 से 14 जून, 1992 तक हुए पृथ्वी सम्मेलन में रखी गई। इस पृथ्वी सम्मेलन को रियो समिट, रियो कॉन्फ्रेंस और अर्थ समिटि के नाम से भी जाना जाता है।
  • रियो पृथ्वी सम्मेलन के 2 वर्ष बाद 19 दिसंबर, 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 17 जून को 'विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस' मनाने का प्रस्ताव पारित किया। इसी समय महासभा ने 'संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय/कन्वेंशन' (UNCCD) की स्थापना की, जो पर्यावरण और विकास को स्थायी भूमि प्रबंधन से जोडऩे वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है।  भारत ने वर्ष 2019 से 2022 तक यूएनसीसीडी की अध्यक्षता की है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2010-2020 के दशक को 'मरुस्थल और मरुस्थलीकरण के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र दशक' (United Nations Decade for Deserts and the fight against Desertification) के रूप में मनाया था।

देश में 1952 में हुई थी काजरी की स्थापना

  • देश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की ओर से 1952 में केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) की स्थापना राजस्थान के जोधपुर में की गई। बढ़ते मरुस्थल एवं सूखा क्षेत्रों को रोकने के लिए काजरी की स्थापना की गई। शुरुआत में यह मरु वनीकरण केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ, लेकिन बाद में इसका विस्तार करते हुए इसे केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के रूप में 1959 में पूर्ण संस्थान का दर्जा दिया गया। दिसंबर, 2020 में केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में काजरी का क्षेत्रीय केंद्र शुरू हुआ। यानी अब काजरी के वैज्ञानिक रेतीले मरुस्थल के साथ ही शीत मरुस्थल में भी अनुसंधान करेंगे।

विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस-2026 की थीम

Rangelands: Recognize. Respect. Restore.