शुक्रवार, 27 मार्च 2026

27 मार्च 2026 : विश्व रंगमंच दिवस

विश्व रंगमंच दिवस

(World Theatre Day)

आज का दिन : 27 मार्च 2026

  • प्रतिवर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (International Theatre Institute-ITI) की ओर से पहली बार 27 मार्च, 1962 को विश्व रंगमंच दिवस मनाया गया।
  • विश्व रंगमंच दिवस (World Theatre Day) को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में रंगमंच को बढ़ावा देना और लोगों को रंगमंच के सभी रूपों के मूल्यों से अवगत कराना है।
  • रंगमंच से संबंधित संस्थाओं और समूहों द्वारा इस दिन को विश्व रंगमंच दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है।
  • विश्व रंगमंच दिवस-2026 पर अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) द्वारा मुख्य कार्यक्रम का आयोजन 25 से 27 मार्च, 2026 तक लक्जमबर्ग शहर में आयोजित किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश

  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान प्रतिवर्ष विश्व रंगमंच दिवस पर दुनिया के किसी विशिष्ट रंगकर्मी को विश्व के रंगकर्मियों को संदेश देने के लिए आमंत्रित करता है।
  • सन् 1962 में पहला अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश फ्रांस की जीन काक्टे ने दिया था।
  • वर्ष 2002 में अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड द्वारा दिया गया था।


अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (आईटीआई)

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  • सन् 1948 में अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान की स्थापना यूनेस्को की सहायता से थिएटर और नृत्य की दुनिया से जुड़े लोगों ने की।
  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान 100 से अधिक केंद्रों और दुनिया भर में सहयोग से प्रदर्शित कला के सबसे बड़े संगठन के रूप में विकसित हुआ।
  • आईटीआई यूनेस्को, पेरिस में हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस और विश्व रंगमंच दिवस का आयोजन करता है।

भारत में नाट्यकला

  • ऐसा माना जाता है कि नाट्यकला का विकास सर्वप्रथम भारत में ही हुआ।
  • प्राचीन वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद के कतिपय सूत्रों में यम और यमी, पुरुरवा और उर्वशी आदि के कुछ संवाद हैं। इन संवादों में नाट्यजगत से जुड़े लोग नाटक के विकास का चिह्न पाते हैं।
  • कहा जाता है कि ऋग्वेद के इन्हीं संवादों से प्रेरणा ग्रहण कर नाटककारों ने नाटकों की रचना की और क्रमश: नाट्यकला का विकास होता गया।
  • इसी विकास क्रम में भरतमुनि ने उसे शास्त्रीय रूप प्रदान किया। भरतमुनि ने भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ 'नाट्यशास्त्र' लिखा है।
  • संस्कृत के प्रसिद्ध नाटककार कालिदास को 'भारत का शेक्सपीयर' कहा जाता है।

सोमवार, 23 मार्च 2026

23 मार्च 2026 : विश्व मौसम विज्ञान दिवस

विश्व मौसम विज्ञान दिवस

(World Meteorological Day)

आज का दिन : 23 मार्च 2026

विश्व मौसम विज्ञान दिवस-2026 की थीम

"Observing today, protecting tomorrow."

  • प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्वभर में विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की एक इकाई के रूप में विश्व मौसम विज्ञान संगठन की स्थापना दिवस 23 मार्च, 1950 को की गई थी। इसलिए प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस (World Meteorological Day) मनाया जाता है।
  • विश्व मौसम विज्ञान दिवस (vishw mausam vigyan diwas) को मनाने का उद्देश्य लोगों को मौसम विज्ञान तथा जलवायु में हो रहे परिवर्तनों के बारे में जागरूक करना है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार पिछले 50 वर्षों में 11000 से अधिक मौसम आधारित प्राकृतिक आपदाओं में 2 मिलियन से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इन आपदाओं से 3.64 ट्रिलियन यूएस डॉलर का आर्थिक नुकसान भी हुआ है। इसका मुख्य कारण दुनिया के प्रति 3 व्यक्तियों में से एक का पूर्व चेतावनी प्रणाली यानी अर्ली वार्निंग सिस्टम से नहीं जुड़ा होना रहा।
  • 11 अक्टूबर, 1947 को हुई संधि के अनुसार 23 मार्च, 1950 को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की स्थापना करना तय किया गया। इसके बाद 23 मार्च, 1950 को इस संगठन की स्थापना की गई।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

  • अंग्रेजी शासनकाल में 15 जनवरी, 1875 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में भारतीय मौसम विभाग की स्थापना की गई। सन् 1905 में इसे शिमला, 1928 में पुणे और 1944 में दिल्ली स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्यरत विभाग है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का मुख्य कार्य मौसम संबंधी अनुमान लगाना और मौसम की भविष्यवाणी करना है। वर्तमान यानी 2026 में मृत्युंजय महापात्र भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक हैं।

 *विश्व मौसम विज्ञान दिवस-2026 का विषय/थीम*

"Observing today, protecting tomorrow."

23 मार्च 2026 : शहीद दिवस

शहीद दिवस (बलिदान दिवस)

(Shaheed Diwas)

आज का दिन : 23 मार्च 2026

  • देश में प्रतिवर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस (बलिदान दिवस) मनाया जाता है।
  • 23 मार्च, 1931 को अंग्रेज सरकार ने भारत माता के तीन सपूतों- भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी थी। उन्हीं अमर शहीदों की याद में 23 मार्च का दिन शहीद दिवस/बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन तीनों वीरों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए ही शहीद दिवस मनाया जाता है।
  • अदालती आदेश के मुताबिक भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च, 1931 को सुबह करीब 8 बजे फांसी लगाई जानी थी। लेकिन अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च, 1931 को ही इन तीनों को लाहौर सेंट्रल जल में देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी और शव रिश्तेदारों को न देकर रातों रात ले जाकर सतलुज नदी के किनारे जला दिए।
  • अंग्रेजी हुकूमत ने भगतसिंह और अन्य क्रांतिकारियों की बढ़ती लोकप्रियता और 24 मार्च को होने वाले विद्रोह की वजह से 23 मार्च को ही भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी थी।
  • शहीद भगत सिंह सेवा दल (एसबीएस फाउंडेशन) की ओर से शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में 'बसंती चोला दिवस' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एसबीएस फाउंडेशन की स्थापना 1995 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जितेन्द्र सिंह शंटी ने की थी।
  • पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वर्ष 2022 के शहादत दिवस से राज्य में इस दिन सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थी।
  • देश में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से 23 मार्च, 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद में युवाओं की अगुवाई वाली राष्ट्रव्यापी शहीद दिवस पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। वर्ष 2026 के शहीद दिवस की थीम/विषय च्च्मेरा भारत, मेरी जिम्मेदारीज्ज् रखी गई है।

भगतसिंह

भगतसिंह

  • सिक्ख परिवार में पंजाब के लायलपुर में 28 सितंबर, 1907 को शहीद-ए-आजम भगतसिंह का जन्म हुआ।
  • भगतसिंह के पिता गदर पार्टी के नाम से प्रसिद्ध एक संगठन के सदस्य थे, जो भारत की आजादी के लिये काम करता था।
  • भगतसिंह ने अपने साथियों- राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव और जय गोपाल के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज के खिलाफ  लड़ाई की।
  • 8 अप्रैल, 1929 को अपने साथियों के साथ केन्द्रीय विधायी सभा में 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाते हुए बम फेंक दिया था। यह बम विस्फोट किसी की जान लेने के लिए नहीं बल्कि कुंभकर्णी नींद में डूबी अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए किया गया था।
  • क्रांतिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और 23 मार्च, 1931 को लाहौर के जेल में शाम 7:33 बजे फांसी पर लटका दिया गया। उनके शरीर का दाह संस्कार सतलुज नदी के किनारे हुआ था। वर्तमान में हुसैनवाला (भारत-पाकिस्तान सीमा) में राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर, एक बहुत बड़े शहीदी मेले का आयोजन उनके जन्म स्थान फिरोजपुर में किया जाता है।

राजगुरु

राजगुरु
  • राजगुरु का पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरु था।
  • राजगुरु का जन्म 24 अगस्त 1908 को पुणे जिले के खेडा गाँव में हुआ।
  • 6 वर्ष की आयु में पिता का निधन हो जाने से बहुत छोटी उम्र में ही ये वाराणसी विद्याध्ययन करने एवं संस्कृत सीखने आ गये थे। इन्होंने हिन्दू धर्म-ग्रंन्थों तथा वेदों का अध्ययन तो किया ही लघु सिद्धान्त कौमुदी जैसा क्लिष्ट ग्रन्थ बहुत कम आयु में कण्ठस्थ कर लिया था।
  • राजगुरु को कसरत (व्यायाम) का बेहद शौक था और वे छत्रपति शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली के बड़े प्रशंसक थे।
  • वाराणसी में विद्याध्ययन करते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ। चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गये।
  • आजाद की पार्टी के अन्दर इन्हें रघुनाथ के छद्म-नाम से जाना जाता था; राजगुरु के नाम से नहीं।
  • राजगुरु एक अच्छे निशानेबाज भी थे। साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव का पूरा साथ दिया था।

सुखदेव

सुखदेव

  • महान क्रांतिकारी सुखदेव का पूरा नाम सुखदेव थापर था।
  • सुखदेव का जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में 15 मई 1907 को हुआ।
  • लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिये जब योजना बनी तो साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा राजगुरु का पूरा साथ दिया था।
  • सुखदेव ने सन् 1929 में जेल में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किये जाने के विरोध में राजनीतिक बन्दियों द्वारा की गयी व्यापक हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग भी लिया था।
  • गांधी-इर्विन समझौते के सन्दर्भ में इन्होंने एक खुला खत गांधी के नाम अंग्रेजी में लिखा था जिसमें इन्होंने महात्मा जी से कुछ गम्भीर प्रश्न किये थे।

रविवार, 22 मार्च 2026

22 मार्च 2026 : बिहार दिवस

बिहार दिवस

(Bihar Diwas)

आज का दिन : 22 मार्च 2026


  • प्रतिवर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है।
  • 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर बिहार राज्य की स्थापना की गई थी। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। यह 114वां बिहार दिवस है। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से च्च्उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहारज्ज् थीम पर तीन दिवसीय बिहार दिवस का आयोजन 22 से 24 मार्च, 2026 तक किया जा रहा है।
  • सन् 1935 में उड़ीसा (ओडिशा) को इससे अलग कर राज्य बनाया गया।
  • बिहार को राज्य का दर्जा 26 जनवरी 1950 को मिला।
  • सन् 2000 में झारखंड को इससे अलग कर राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
  • वर्तमान यानी सन् 2026 में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) हैं।


बिहार के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • बिहार 21077' उत्तरी अक्षांश से 27031' उत्तरी अक्षांश व 83020' से 88017' पूर्व देशान्तर के मध्य स्थित है। 
  • बिहार के पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखण्ड एवं उत्तर में नेपाल है।
  • बिहार की राजधानी- पटना।
  • बिहार का कुल क्षेत्रफल है- 94,163 वर्ग किलोमीटर।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की जनसंख्या- 10,40,99,452
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में लिंगानुपात- 918/1000 पुरुष पर।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में साक्षरता दर- 61.8 प्रतिशत।
  • बिहार में उच्च न्यायालय पटना में स्थित है।
  • बिहार का राज्य पशु-गौर और राज्य पक्षी-गौरेया या घरेलू गौरेया है।
  • दो छोटे स्वास्तिक के मध्य बोधि वृक्ष बिहार का राजकीय चिह्न है।
  • बिहार की मुख्य भाषाएं- हिन्दी, मगही [मागधी], भोजपुरी, अंगिका, मैथिली हैं।
  • बिहार में द्विसदनीय विधायिका है। इसके अंतर्गत विधानसभा में 243 सदस्य एवं विधान परिषद् में 75 सदस्य हैं। 
  • बिहार से लोकसभा के लिए 40 एवं राज्यसभा के लिए 16 सदस्य चुने जाते हैं।

*बिहार दिवस-2025 का विषय/थीम*
'उन्नत बिहार, विकसित बिहार'

गुरुवार, 19 मार्च 2026

19 मार्च 2026 : राजस्थान दिवस (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, संवत् 2083)

राजस्थान दिवस

(Rajasthan Day)


आज का दिन : 19 मार्च 2026

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, संवत् 2083

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  • प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ‘राजस्थान दिवस’ मनाया जाता है।
  • वर्ष 2024 तक 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता रहा है। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2025 में विक्रम संवत् की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को यह दिवस मनाने का निर्णय किया था।
  • वर्ष 2026 में 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (संवत् 2083) है, इसलिए इसी दिन राजस्थान दिवस मनाया जा रहा है।
  • राजस्थान सरकार के अनुसार संवत् 2006 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर राजस्थान की स्थापना की हुई थी और उस दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में तिथि 30 मार्च 1949 थी।
  • 30 मार्च, 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसी बड़ी रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था। इसी दिन को राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है।
  • राजस्थान दिवस-2026 पर राजस्थान सरकार की ओर से 17 से 19 मार्च तक तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है।
  • वर्तमान यानी सन् 2026 में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं।

ऐसे हुए राजस्थान का गठन

  • देश की आजादी के समय राजस्थान या राजपूताना में 22 देशी रियासतें थीं। इनमें एक रियासत अजमेर मेरवाडा प्रांत को छोड़ कर शेष देशी रियासतों पर देशी राजा महाराजाओं का ही राज था। अजमेर-मेरवाडा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का कब्जा था। राजस्थान के एकीकरण में भारत सरकार के तत्कालीन देशी रियासत और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी. पी. मेनन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इनकी सूझबूझ से ही राजस्थान के वर्तमान स्वरूप का निर्माण हुआ।
  • 18 मार्च 1948 को शुरू हुई राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया कुल सात चरणों में 1 नवंबर 1956 को पूरी हुई।
  • राजस्थान के एकीकरण के सात चरण
  • 18 मार्च, 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों का विलय होकर ‘मत्स्य संघ’ बना। धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदयसिंह राजप्रमुख व अलवर राजधानी बनी।
  • 25 मार्च, 1948 को कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़ व शाहपुरा का विलय होकर राजस्थान संघ बना।
  • 18 अप्रेल, 1948 को उदयपुर रियासत का विलय। नया नाम ‘संयुक्त राजस्थान संघ’ रखा गया। उदयपुर के तत्कालीन महाराणा भूपाल सिंह राजप्रमुख बने।
  • 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था। यही दिन राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। अब इसे हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाएगा।
  • 15 अप्रेल, 1949 को ‘मत्स्य संघ’ का वृहत्तर राजस्थान संघ में विलय हो गया।
  • 26 जनवरी, 1950 को सिरोही रियासत को भी वृहत्तर राजस्थान संघ में मिलाया गया।
  • 1 नवंबर, 1956 को आबू, देलवाड़ा तहसील का भी राजस्थान में विलय हुआ, मध्य प्रदेश में शामिल सुनेल टप्पा का भी विलय हुआ।

राजस्थान के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • राजस्थान 2303’ उत्तर अक्षांश से 30012’ उत्तरी अक्षांश एवं 69030’ पूर्वी देशान्तर से 78017’  पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है।
  • राजस्थान का क्षेत्रफल- 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है।
  • राजस्थान की राजधानी जयपुर है। इसे पिंकसिटी यानी गुलाबीनगर के नाम से भी जाना जाता है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या- 6,85,48,437 है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात- 928/1000 पुरुष पर है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर- 66.1 प्रतिशत है।
  • राजस्थान के दो राज्य पशु हैं- चिंकारा एवं ऊंट। चिंकारा वन्य जीव श्रेणी में तो ऊंट पालतू पशु श्रेणी में राज्य पशु है।
  • राजस्थान का राज्य पक्षी- गोडावण है।
  • राजस्थान का राज्य वृक्ष- खेजड़ी है।
  • राजस्थान का राज्य खेल- बास्केटबॉल है।
  • राजस्थान का राज्य पुष्प- रोहिड़ा है।
  • राजस्थान का अधिकांश भाग मरुस्थलीय है। यहां थार का रेगिस्तान है।
  • राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश एवं दक्षिण पश्चिम में गुजरात है।
  • राजस्थान में बेड़च, बनास, गम्भीरी, कोठारी, चम्बल, पार्वती, बाणगंगा, काली सिन्ध, खारी, माही, लूणी, घग्घर प्रमुख नदियां हैं।
  • राजस्थान में डीडवाना, सांभर, पंचभद्रा, लूणकरणसर, जयसमंद, राजसमंद, पिछोला, पुष्कर, आनासागर, नक्की एवं सिलिसेढ़ प्रमुख झीलें हैं।
  • राजस्थान में गुरु शिखर [माउंट आबू], सेर [माउंट आबू], अचलगढ़ [सिरोही], तारागढ़ [अजमेर] प्रमुख पर्वत चोटियां हैं। ये सभी विश्व की प्राचीन वलित पर्वत शृंखला अरावली की चोटियां हैं। अरावली का अधिकांश भाग राजस्थान में ही है।
  • राजस्थान की विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है।
  • राजस्थान से लोकसभा के लिए 25 सदस्य चुने जाते हैं। वहीं राज्यसभा के लिए 10 सदस्य चुने जाते हैं।
  • राजस्थान में राष्ट्रीय अभयारण्य - रणथम्भौर नेशनल पार्क (सवाई माधोपुर), केवलादेव नेशनल पार्क (भरतपुर), सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर) और मुकुंदरा राष्ट्रीय अभयारण्य (कोटा-चित्तौडगढ़़)। बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व चौथा और धौलपुर-करौली राज्य का पांचवां टाइगर रिजर्व है।
  • देश में राजस्थान का सीमेंट उत्पादन में प्रमुख स्थान है।
  • राजस्थान देश का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है।

रविवार, 15 मार्च 2026

15 मार्च 2026 : विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस

(World Consumer Rights Day)

आज का दिन : 15 मार्च 2026

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस थीम 2026

  • प्रतिवर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है।
  • विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना है।
  • यह दिवस कन्ज्यूमर्स इंटरनेशनल की ओर से मनाया जाता है। वर्तमान में 100 देशों में इसके 200 से अधिक उपभोक्ता समूह सदस्य हैं।
  • विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने की प्रेरणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी से मिली। अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद में कैनेडी ने 15 मार्च 1962 को उपभोक्ताओं के अधिकारों की आवाज उठाई थी। इसी विशेष दिन की स्मृति में यह दिवस 15 मार्च को मनाया जाता है।
  • पहली बार विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 1983 को मनाया गया।
  • भारत में 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
  • हमारे देश में सबसे पहले 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986' लागू किया गया। इसमें कई संशोधन किए गए। वर्तमान में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की जगह उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 लागू किया गया है। इसे लोकसभा ने 30 जुलाई, 2019 को और राज्यसभा ने 06 अगस्त, 2019 को पारित किया तथा इसे 20 जुलाई, 2020 को लागू किया गया। संसद में इसे तत्कालीन उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने पेश किया था। इस अधिनियम का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं की समस्याओं को हल करने के लिए जरूरी कदम उठाना है।
  • उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 के अनुसार उपभोक्ता उस व्यक्ति को माना गया है जो अपनी आवश्यकताओं के लिए वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और उपभोग करता है। वाणिज्यिक उद्देश्य यानी बेचने के लिए क्रय करने वाले को उपभोक्ता नहीं माना गया है। अधिनियम में ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों ही प्रकार के लेन-देन को शामिल किया गया है।


*विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस-2026 का विषय/थीम*

Safe Products, Confident Consumers

शनिवार, 14 मार्च 2026

14 मार्च 2026 : अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस

अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस
(International Day of Mathematics)

आज का दिन : 14 मार्च 2026


  • यूनेस्को की ओर से प्रतिवर्ष 14 मार्च को अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है।
  • यूनेस्को के 12 से 27 नवंबर, 2019 तक आयोजित जनरल कॉन्फ्रेंस के 40वें सत्र में इस दिवस को मनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद पहला अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस 14 मार्च 2020 को मनाया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस को पाई दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
  • वर्तमान दौर में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा आदि में गणितीय ज्ञान के महत्व को देखते हुए इसके प्रति वैश्विक जागरुकता पैदा करना आवश्यक है।
  • यूनेस्को की ओर से 14 मार्च 2023 को इंडस्ट्रियल मैथेमेटिक्स पर वेबिनार का आयोजन किया गया था।
  • हमारे देश में महान गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन की जयंती 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है।


*अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस-2026 का विषय/थीम*

Mathematics and Hope

गुरुवार, 12 मार्च 2026

आज का दिन : मार्च का दूसरा गुरुवार

विश्व गुर्दा दिवस

(World Kidney Day)

आज का दिन : मार्च का दूसरा गुरुवार

  • प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को विश्व गुर्दा दिवस मनाया जाता है।
  • वर्ष 2026 में मार्च का दूसरा गुरुवार 12 मार्च को है, इसलिए इस दिन विश्व किडनी दिवस मनाया जा रहा है।
  • विश्व किडनी दिवस मनाने की शुरुआत इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन ने की थी।
  • पहली बार विश्व किडनी दिवस वर्ष 2006 में मनाया गया।
  • किडनी का कार्य शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को छानकर उन्हें बाहर निकालना होता है।
  • किडनी मानव शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। लोगों को इसके बारे में जागरुक करने के लिए ही यह दिवस मनाया जाता है।

 
*विश्व गुर्दा दिवस-2026 का विषय/थीम*
Kidney Health for All: Caring for People, Protecting the Planet.

रविवार, 8 मार्च 2026

8 मार्च 2026 : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

(International Women's Day)

आज का दिन : 8 मार्च 2026
  • प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
  • विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा अर्जित की गई उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके प्रति सम्मान, प्रशंसा और समानता का भाव प्रकट करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 1975 को 'अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष' के रूप में मनाया था। इसे मनाने के दौरान प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की घोषणा की गई थी।
  • इससे पहले 28 फरवरी, 1909 को संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया।
  • 19 मार्च, 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया।
  • सन् 1917 में रूसी महिलाओं ने ऐतिहासिक हड़ताल की। रोटी और शांति की मांग को लेकर की गई इस हड़ताल के बाद जार (रूसी राजा) ने महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया। यह हड़ताल जूलियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी के आखिरी रविवार को थी। आज सम्पूर्ण विश्व में प्रचलित ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह तारीख 8 मार्च है।
  • विश्व के अनेक देशों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है। कुछ देशों में इस दिन महिलाओं के लिए अवकाश रहता है।
  • विश्व के कुछ देशों में इस दिन को मातृ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने लैंगिक समानता (Gender Equality) को लेकर 'ग्रह 50-50 सन् 2030' (Planet 50-50 by 2030) नाम से अभियान चला रखा है।

भारत में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

  • भारत में भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। अनेक राज्य सरकारें इस दिन महिलाओं को विशेष सहूलियतें देती हैं। जैसे रोडवेज बसों में नि:शुल्क यात्रा आदि। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से केंद्रीय संरक्षित स्मारकों व संग्रहालयों और पुरातत्व स्थलों पर विदेशी और भारतीय महिला आगंतुकों को निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2019 के महिला दिवस से यह पहल शुरू की थी।
  • भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 8 मार्च 2026 को ‘शक्ति वॉक #SheLeadsBharat’ शीर्षक से एक महिला-नेतृत्व वाली वॉक का आयोजन किया गया।

नारी शक्ति पुरस्कार

  • भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय की ओर से प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा किये जाने वाले उत्कृष्ट योगदानों को मान्यतास्वरूप नारी शक्ति पुरस्कार (Nari Shakti Puraskar) प्रदान किये जाते हैं। ये पुरस्कार उन महिलाओं को दिए जाते हैं, जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महती कार्य किया हो। हालांकि अभी तक पुरस्कारों की घोषणा नहीं की गई है।

*अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2026 का विषय/थीम*

Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls

शनिवार, 7 मार्च 2026

7 मार्च 2026 : जन औषधि दिवस

जन औषधि दिवस

(Jan Aushadhi Diwas)

आज का दिन : 7 मार्च 2026

jan-aushadhi-diwas-2025

  • देश में प्रतिवर्ष 7 मार्च को जन औषधि दिवस मनाया जाता है।
  • भारत सरकार की ओर से 7 मार्च, 2019 को पहला जन औषधि दिवस मनाया गया। यह सातवां जन औषधि दिवस है। 
  • जन औषधि दिवस को मनाने का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता लाना और उनके उपयोग को बढ़ावा देना है। 
  • भारत सरकार के औषध विभाग द्वारा 'प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना' चलाई जा रही है, जो आम लोगों को किफायती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने में जुटी है। 
  • 'प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना' का कार्यान्वयन ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) के पास है। 
  • जन औषधि दिवस पर स्वास्थ्य जांच शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। 
  • देश में अब तक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्रों (पीएमबीजेके) की संख्या बढ़कर 15,000 से अधिक हो गई है। सरकार ने 31 मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है।
  • प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्रों पर उपलब्ध दवाओं की कीमत ब्रांडेड कीमतों की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत कम है।
  • जन औषधि दिवस सप्ताह-2026

  • देश में 1 से 7 मार्च 2026 तक जन औषधि दिवस सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान पूरे देश में 1 से 5 मार्च 2026 तक 250 से अधिक नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया गया।

*जन औषधि दिवस-2026 का विषय/थीम*
जन औषधि सस्ती भी, भरोसेमंद भी - सेहत की बात, बचत के साथ

बुधवार, 4 मार्च 2026

4 मार्च 2026 : राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा)

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा)

(National Safety Day)

आज का दिन : 4 मार्च 2026
 

  • देश में प्रतिवर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। 
  • यह दिवस पहली बार 4 मार्च 1972 को मनाया गया।
  • देश में बढ़ते औद्योगिक वातावरण में श्रमिकों व अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति चेतना जगाने के लिए प्रतिवर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। 
  • भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के अधीन 4 मार्च, 1966 को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Safety Council-NSC) की स्थापना की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के स्थापना दिवस को ही राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रथम औद्योगिक सुरक्षा संगोष्ठी का आयोजन सन् 1965 में किया गया। इसमें राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने औद्योगिक सुरक्षा पर जोर दिया।
  • कार्यस्थलों पर सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है।
  • इस दौरान देश में 4 मार्च से 10 मार्च तक राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के दौरान स्कूलों, संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें श्रमिकों व कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही जाती है।
  • सन् 1948 में भारत में कारखाना अधिनियम लागू हुआ।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का मुख्यालय महाराष्ट्र के नवी मुंबई में स्थित है।
  • भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति की नियुक्ति की जाती है। वर्तमान यानी सन् 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष एस. एन. सुब्रहमण्यन और डायरेक्टर जनरल ललित आर. गाभने हैं।

    *राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस-2026 का विषय/थीम*

    Engage, Educate & Empower People to Enhance Safety.

    राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस पर ली जाने वाली प्रतिज्ञा

    • आज के दिन, मैं सत्यनिष्ठापूर्वक प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं पुन: अपने आपको सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के बचाव के प्रति समर्पित करूंगा और नियमों, विनियमों तथा कार्यविधियों के पालन हेतु यथाशक्ति प्रयत्न करूंगा और निश्चित रूप से इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये प्रेरणादायक अभिवृत्तियों तथा आदतों का विकास करूंगा।
    • मेरी यह पूर्ण रूप से मान्यता है कि दुर्घटनाएँ तथा बीमारियाँ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को दुर्बल बनाती हैं तथा यह विकलांगता, मृत्यु, स्वास्थ्य के लिये हानिकारक एवं सम्पत्ति की क्षति, सामाजिक कष्ट तथा पर्यावरण के अपकृष्ट का कारण बनती हैं।
    • मैं स्वयं अपने, परिवार, संगठन, समाज एवं राष्ट्र के हित में दुर्घटनाओं, व्यावसायिक बीमारियों की रोकथाम तथा पर्यावरण के बचाव के लिये हर संभव प्रयत्न करूंगा।

मंगलवार, 3 मार्च 2026

3 मार्च 2026 : विश्व श्रवण दिवस

आज का दिन : 3 मार्च 2026

विश्व श्रवण दिवस

(World Hearing Day)

  • प्रतिवर्ष 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय कान देखभाल दिवस द्वारा पहली सन् 2007 में विश्व श्रवण दिवस मनाया गया। 2016 से पूर्व यह दिवस अंतराष्ट्रीय कर्ण देखभाल दिवस के नाम से जाना जाता था।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से बहरेपन के प्रति जागरुकता लाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापे से ग्रसित लोगों में बहरेपन का खतरा अधिक होता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की 5 प्रतिशत आबादी खासकर 65 वर्ष से ऊपर की आयु वाले लोग इस बीमारी से अधिक पीडि़त हैं। इनमें भी अधिकतर मरीज दक्षिण एशिया, एशिया प्रशांत और अफ्रीकी देशों में हैं।
  • वर्तमान में ध्वनि प्रदूषण, मोबाइल में ईयरफोन लगाकर संगीत सुनने से भी इस बीमारी को बढ़ावा मिला है। शिशुओं में भी यह बीमारी बढ़ रही है। शिशुओं में यूनिवर्सल न्यू बोर्न हियरिंग स्क्रीनिंग से श्रवण शक्ति की पहचान आसानी से हो सकती है।
  • श्रवण दोष से पीडि़तों के लिए केंद्र सरकार ने देश में वर्ष 2006 में 'राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम' आरंभ किया था।

*विश्व श्रवण दिवस-2026 का विषय/थीम*

From communities to classrooms: hearing care for all children.

3 मार्च 2026 : विश्व वन्यजीव दिवस

आज का दिन : 3 मार्च 2026

विश्व वन्यजीव दिवस

(World Wildlife Day)

  • प्रतिवर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर, 2013 को अपने 68वें अधिवेशन में विश्व वन्यजीव दिवस मनाने के लिए 3 मार्च का दिन चुना था।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मार्च का दिन इसलिए चुना क्योंकि इसी दिन सन् 2013 में वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आयोजित सम्मेलन में थाईलैंड ने यह प्रस्ताव रखा था। बैंकॉक में आयोजित कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कोप) की 16वीं बैठक में थाईलैंड ने 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाने संबंधी एक प्रस्ताव रखा था।
  • विश्व वन्यजीव दिवस मनाने का उद्देश्य वन्यजीवों के प्रति लोगों में जागरुकता उत्पन्न करने के साथ उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora-CITES) सचिवालय से विश्व वन्य जीव दिवस को क्रियान्वित करने का आग्रह किया था।
  • विकसित और विकासशील देशों में अरबों लोग प्रतिदिन भोजन, ऊर्जा, सामग्री, दवा, मनोरंजन, प्रेरणा और मानव कल्याण के लिए वन्य प्रजातियों के उपयोग से लाभान्वित होते हैं। लेकिन हमारे लिए बेहद उपयोगी यह जैव विविधता आज संकट में है। वर्तमान में पौधों और जानवरों की एक लाख प्रजातियां विलुप्त होने का सामना कर रही हैं।
  • विश्व वन्यजीव दिवस जंगली जीवों और वनस्पतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर है।
  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में 50,000 जंगली प्रजातियां अरबों लोगों की जरूरतों को पूरा करती हैं।
  • दुनिया का हर 5 में से 1 व्यक्ति आय और भोजन के लिए जंगली प्रजातियों पर निर्भर है, जबकि 2.4 बिलियन लोगों को जंगलों से खाना पकाने के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी प्राप्त होती है।
  • भारत में प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह को वन्य जीव सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।
  • देश में सन् 1982 में भारतीय वन्यजीव संस्थान की स्थापना 1982 में की गई। यह संस्थान केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधीन एक स्वशासी संस्थान है।  इस संस्थान को वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र के प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान के रूप में मान्यता दी गई है।


*विश्व वन्यजीव दिवस-2026 का विषय/थीम*

“Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods”

रविवार, 1 मार्च 2026

1 मार्च 2026 : नागरिक लेखा दिवस

नागरिक लेखा दिवस

(Civil Accounts Day)

आज का दिन : 1 मार्च 2026

  • देश में प्रतिवर्ष 1 मार्च को नागरिक लेखा दिवस यानी सिविल अकाउंट्स डे मनाया जाता है।
  • वर्ष 2026 में 50वां नागरिक लेखा दिवस मनाया जा रहा है।
  • भारतीय सिविल लेखा सेवा (Indian Civil Accounts Service-ICAS) की ओर से यह दिवस मनाया जाता है। 
  • 1 मार्च, 1976 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार के खातों को लेखा परीक्षा कार्यों से अलग करने संबंधी अध्यादेश जारी किए थे।
  • केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में वर्ष 1976 में व्यापक सुधारों की शुरुआत की। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक को केंद्र सरकार के खाते तैयार करने की जिम्मेदारी देकर लेखा परीक्षा और लेखा कार्यों को अलग कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय नागरिक लेखा सेवा (आईसीएएस) की स्थापना हुई। आईसीएएस को शुरुआत में सी एंड एजी (कर्तव्यों, शक्तियों और सेवा की शर्तों) संशोधन अधिनियम, 1976 को संशोधित करने वाले एक अध्यादेश के माध्यम से भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा (इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस) से लिया गया था। इसके बाद केंद्रीय लेखा (कार्मिक स्थानांतरण) अधिनियम, 1976 के विभागीयकरण को संसद द्वारा अधिनियमित किया गया और 8 अप्रैल 1976 को राष्ट्रपति ने इसे स्वीकृति प्रदान की थी। इस अधिनियम को 1 मार्च, 1976 से प्रभावी माना गया था। यही वजह है कि आईसीएएस हर साल 1 मार्च के दिन को 'नागरिक लेखा दिवस' के रूप में मनाता है।
  • वर्तमान यानी 2026 में लेखा महानियंत्रक विश्वजीत सहाय है।
  • भारतीय नागरिक लेखा सेवा, पीएफएमएस (सार्वजनिक वित्तीय प्रबन्धन प्रणाली) के विकास और प्रबन्धन सहित डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में सुधारों का नेतृत्व कर रहा है। पीएफएमएस एकीकृत और एकमात्र आईटी प्लेटफ़ॉर्म है, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार से संबंधित भुगतान और लेखा कार्य किए जाते हैं।
  • कोविड महामारी के दौरान धन का निर्बाध प्रवाह, न केवल चिकित्सा और कानूनों का पालन करवाने जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ज़रूरी था, बल्कि अर्थव्यवस्था को निरंतर गति से आगे बढ़ाने के लिए भी ज़रूरी था, क्योंकि मांग और खपत के बीच असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई थी।
  • भारतीय नागरिक लेखा संगठन ने बिलों और दावों के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को सुनिश्चित करने और सार्वजनिक व्यय के पहिये को निरंतर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

 

शून्य भेदभाव दिवस

(Zero Discrimination Day)


  • संयुक्त राष्ट्र के यूएनएड्स द्वारा प्रतिवर्ष 1 मार्च को शून्य भेदभाव दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मनाने की घोषणा दिसंबर, 2013 में विश्व एड्स दिवस पर की गई और वर्ष 2014 के 1 मार्च को पहला 'शून्य भेदभाव दिवस' मनाया गया। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य उम्र, लिंग, राष्ट्रीयता, जातीयता, रंग आदि सभी भेदभावों को दरकिनार कर सभी को समान अधिकारों की पैरवी करना है। शून्य भेदभाव दिवस का प्रतीक तितली को चुना गया है।


*शून्य भेदभाव दिवस-2026 का विषय/थीम*

People First

शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

28 फरवरी 2026 : राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

(National Science Day)

आज का दिन : 28 फरवरी 2026

  • देश में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
  • 28 फरवरी, 1928 को महान् भारतीय वैज्ञानिक भारत रत्न प्रो. चंद्रशेखर वेंकट रमन ने अपनी उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज 'रमन इफेक्ट/रमन प्रभाव' को दुनिया के सामने रखा।
  • रमन प्रभाव और प्रो. सी.वी. रमन की उपलब्धियों की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए सन् 1986 से भारत में 28 फरवरी को 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मनाया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को मनाने का उद्देश्य विद्यार्थियों और जनसाधारण को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पूरे देश में मनाया जाता है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर वैज्ञानिकों के आख्यान, निबंध, लेखन, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनियां, संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से 2025 को ‘क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ के रूप में मनाया गया था। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने अप्रेल 2023 में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन लॉन्च किया, जिसे 2023 से 2031 तक क्रियान्वित किया जाएगा।

*राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2026 का विषय/थीम*

विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक
Women in Science: Catalyzing Viksit Bharat


प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रमन

  • प्रो. सी.वी. रमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ। उनका निधन  21 नवम्बर 1970 कर्नाटक के बंगलौर में हुआ।
  • प्रो. सी.वी. रमन को 'रमन प्रभाव' के लिए वर्ष 1930 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • सन् 1954 में प्रो. सी.वी. रमन को भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  • सन् 1957 में उन्हें लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया गया।

रमन प्रभाव

  • जब कोई एकवर्णी प्रकाश द्रवों, गैसों या ठोसों से होकर गुजरता है तो उसमें आपतित प्रकाश के साथ अत्यल्प तीव्रता का कुछ अन्य वर्णों का प्रकाश देखने में आता है। इसमें मूल प्रकाश की किरणों के अलावा स्थिर अंतर पर बहुत कमजोर तीव्रता की किरणें भी उपस्थित होती हैं। इन किरणों को रमन-किरणें कहा जाता है।
  • प्रो. रमन ने शुरुआत में सूर्य के प्रकाश को बैंगनी फिल्टर से गुजार कर प्राप्त बैंगनी प्रकाश किरण पुंज को द्रव से गुजारा। निर्गत प्रकाश पुंज मूलत: तो बैंगनी रंग का ही था, लेकिन जब इसे हरे फिल्टर से गुजारा तो इसमें बहुत न्यून मात्रा में हरी किरणों का अस्तित्व भी देखने में आया।

नए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की स्थापना

  • भारत सरकार ने 21 सितंबर, 2023 को नए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना की। ये पुरस्कार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में प्रदान किए जाएंगे। इन पुरस्कारों की स्थापना से विभिन्न विज्ञान विभागों द्वारा प्रदान किए जा रहे लगभग 300 विभिन्न पुरस्कार रद्द हो गए हैं।
  • नए पुरस्कारों को 'राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार' के नाम से जाना जाएगा। ये देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार होंगे। 
  • राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और अन्वेषकों द्वारा व्यक्तिगत रूप से या टीमों में किए गए उल्लेखनीय और प्ररेणादायी योगदान को मान्यता देना है।
  • देश में सरकारी, निजी क्षेत्र के संगठनों में काम करने वाले वैज्ञानिक/प्रौद्योगिकीविद्/अन्वेषकों या किसी भी संगठन से इतर काम करने वाला कोई भी व्यक्ति, जिसने विज्ञान, प्रौद्योगिकी या प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार के किसी भी क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधान या नवाचार या आविष्कार के संदर्भ में विशिष्ट योगदान दिया हो, वे पुरस्कार प्राप्त करने के पात्र होंगे। विदेश में रहकर भारतीय समुदायों या समाज को लाभ पहुंचाने में असाधारण योगदान देने वाले भारतीय मूल के लोग भी पुरस्कार के पात्र होंगे।

अब राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की चार श्रेणियां

  • 1. विज्ञान रत्न पुरस्कार : विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में की गई जीवन भर की उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाएगा।
  • 2.  विज्ञान श्री पुरस्कार : विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाएगा।
  • 3.  विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार : 45 वर्ष की आयु तक के युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया जाएगा।
  • 4. विज्ञान टीम पुरस्कार : तीन या अधिक वैज्ञानिकों/शोधकर्ताओं/अन्वेषकों की एक टीम को दिया जाएगा, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में एक टीम के रूप में काम करके असाधारण योगदान दिया हो।


इन क्षेत्रों में दिए जाएंगे राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार

  • राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 13 क्षेत्रों अर्थात् भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग साइंस, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी और अन्य में प्रदान किया जाएगा।


राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के लिए नामांकन और पुरस्कार समारोह

  • पुरस्कारों की इन सभी श्रेणियों के लिए नामांकन हर साल 14 जनवरी को आमंत्रित किए जाएंगे। 28 फरवरी (राष्ट्रीय विज्ञान दिवस) तक नामांकन खुले रहेंगे। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल 11 मई (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस) को की जाएगी। सभी श्रेणियों के पुरस्कारों के लिए पुरस्कार समारोह 23 अगस्त (राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस) को आयोजित किया जाएगा। सभी पुरस्कारों में एक सनद और एक पदक होगा।