शनिवार, 7 मई 2022

करेंट अफेयर्स 2022 : केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर विधानसभा में होंगे 90 सदस्य

करेंट अफेयर्स 2022 : 6 मई 2022

राजपत्र में परिसीमन की अधिसूचना प्रकाशित

केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) ने 5 मई, 2022 को परिसीमन आदेश को अंतिम रूप दिया। केंद्र सरकार ने 5 मई, 2022 को ही राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित कर दी है। अब आगामी विधानसभा चुनाव इसी आधार पर होंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग से जुड़े निम्न बिंदू महत्वपूर्ण हैं-

1. जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग

  • आयोग का गठन 6 मार्च, 2020 को विधि मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर एक साल के लिए किया था। बाद में इसे 6 मई, 2022 तक बढ़ाया गया।
  • आयोग ने परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(ए) तथा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 60(2)(बी) के प्रावधानों के आधार पर लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया है।
  • परिसीमन आयोग अध्यक्ष - न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश)
  • पदेन सदस्य - सुशील चंद्रा (मुख्य चुनाव आयुक्त), के के शर्मा (राज्य चुनाव आयुक्त, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर)

2. विधानसभा क्षेत्र

  • जम्मू-कश्मीर में 90 विधानसभा क्षेत्र होंगे। इनमें जम्मू में 43 और कश्मीर घाटी में 47 विधानसभा सीटें होंगी।
  • 90 सीटों के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के लिए 24 सीटें खाली रखी गई हैं। ये सीटें पहले भी खाली रखी गईं थी।
  • अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए कुल 9 विधानसभा क्षेत्र आरक्षित किए गए हैं। इनमें 6 जम्मू और 3 विधानसभा क्षेत्र कश्मीर के लिए हैं। आरक्षित सीटों की संख्या निर्धारित करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया।
  • प्रत्येक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 18 विधान सभा क्षेत्र होंगे।
  • स्थानीय प्रतिनिधियों की मांग को ध्यान में रखते हुए कुछ विधान सभा क्षेत्रों के नाम भी बदल दिए गए हैं। 58 नंबर विधानसभा (रियासी जिले में) का नाम श्री माता वैष्णो देवी रखा गया है।  बदले जाने वाले नामों में शामिल हैं - तांगमर्ग-एसी का नाम बदल कर गुलमर्ग-एसी, ज़ूनीमार-एसी का नाम बदल कर जैदीबल-एसी, सोनवार-एसी का नाम बदल कर लाल चौक-एसी, पैडर-एसी का नाम बदल कर पैडर-नागसेनी-एसी, कठुआ नॉर्थ-एसी का नाम बदल कर जसरोटा-एसी, कठुआ-साउथ एसी का नाम बदल कर कठुआ एसी, खुर-एसी का नाम बदल कर छंब-एसी, महोर-एसी का नाम बदल कर गुलाबगढ़-एसी, दरहाल-एसी का नाम बदल कर बुधल-एसी आदि।
  • आयोग ने विधान सभा में कश्मीरी प्रवासियों के समुदाय से कम से कम दो सदस्यों (उनमें से एक महिला होनी चाहिए) का प्रावधान और ऐसे सदस्यों को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधान सभा के मनोनीत सदस्यों की शक्ति के समान शक्ति देने की सिफारिश की है। 
  • साथ ही आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि केंद्र सरकार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर से विस्थापित व्यक्तियों के प्रतिनिधियों के नामांकन के माध्यम से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर से विस्थापित व्यक्तियों को जम्मू और कश्मीर विधान सभा में कुछ प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर सकती है।

3. लोकसभा क्षेत्र

  • परिसीमन आयोग ने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की लोकसभा सीटों की संख्या (कुल 5) में कोई बदलाव नहीं किया है।
  • परिसीमन आयोग ने प्रत्येक लोकसभा सीट में 18 विधानसभा क्षेत्र शामिल किए हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के दोनों संभागों जम्मू और कश्मीर में दो-दो लोकसभा सीटें रखी गई हैं। जबकि एक लोकसभा क्षेत्र दोनों संभागों में फैला हुआ है।
  • जम्मू-कश्मीर की पुननिर्धारित पांच लोकसभा सीटें इस प्रकार हैं- 1. श्रीनगर 2. जम्मू, 3. बारामूला, 4. अनंतनाग-राजौरी 5. ऊधमपुर।

4. 1995 में हुआ था जम्मू-कश्मीर में परिसीमन

  • केंद्रशासित प्रदेश बनने से पूर्व तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन; जम्मू और कश्मीर राज्य के संविधान तथा जम्मू और कश्मीर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1957 द्वारा शासित था। जम्मू-कश्मीर में इससे पहले सन् 1963, 1973 व 1995 में परिसीमन की प्रक्रिया हो चुकी है।

5. क्या होता है परिसीमन (Delimitation)

  • किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया को परिसीमन (Delimitation) कहा जाता है। इसका मुख्य आधार जनसंख्या आधारित होता है, लेकिन सीट तय करने के लिए क्षेत्रफल, भौगोलिक परिस्थितियों और संचार आदि की सुविधा पर भी विचार किया जाता है।

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