शनिवार, 16 जुलाई 2022

हिन्दी भाषा - अनुच्छेद प्रश्न व उत्तर-07

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले अनुच्छेद/गद्यांश/गद्यावतरण (hindi passage) संबंधी अभ्यास प्रश्न

निम्नांकित गद्यावतरण को पढ़कर नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
जैसे धृतराष्ट्र ने लौह निर्मित भीम को अपने अंक में भरकर चूर-चूर कर दिया था- वैसे ही प्राय: पार्थिव व्यक्तित्व कल्पना-निर्मित व्यक्तित्व को खण्ड-खण्ड कर देता है। पर इसे मैं अपना सौभाग्य समझती हूँ कि रवींद्र के प्रत्यक्ष दर्शन ने मेरी कल्पना-प्रतिमा को अधिक दीप्त सजीवता दी; उसे कहीं से खण्डित नहीं किया। पर उस समय मन में कुतूहल का भाव ही अधिक था जो जीवन के शैशव का प्रमाण है। दूसरी बार जब उन्हें 'शांति निकेतन' में देखने का सुयोग प्राप्त हुआ, तब मैं अपना कर्म क्षेत्र चुन चुकी थी। वे अपनी मिट्टी की कुटी 'श्यामली' में बैठे हुए ऐसे जान पडडे मानो काली मिट्टी में अपनी उज्ज्वल कल्पना उतारने में लगा हुआ कोई अद्भुत कर्मा शिल्पी हो। तीसरी बार उन्हें रंगमंच पर सूत्रधार की भूमिका में उपस्थित देखा। जीवन की संध्या बेला में 'शांति निकेतन' के लिए उन्हें अर्थ संग्रह में यत्नशील देखकर न कुतूहल हुआ न प्रसन्नता; केवल एक गंभीर विषाद की अनुभूति से हृदय भर गया। हिरण्यगर्भा धरती वाला हमारा देश भी कैसा विचित्र है! जहां जीवन शिल्प की वर्णमाला भी अज्ञात है वहां वह साधनों का हिमालय खड़ा कर देता है और जिसकी उंगलियों में सृजन स्वयं उतरकर पुकारता है उसे साधन शून्य रेगिस्तान में निर्वासित कर जाता है। निर्माण की इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है कि शिल्पी और उपकरणों के बीच में आग्नेय रेखा खींचकर कहा कि कुछ नहीं बनता या सब कुछ बन चुका।

प्रश्न 1. अंतिम बार टैगोर का दर्शन करने पर लेखिका को विषाद क्यों हुआ?
(अ) इसलिए कि टैगोर जैसे महान कलाकार को भी भौतिक साधन जुटाना पड़ रहा है।
(ब) इसलिए कि लोग कला में विशेष रुचि नहीं रखते हैं।
(स) इसलिए कि अच्छे कार्य के लिए भी आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।
(द) इसलिए कि टैगोर भीख मांगने पर मजबूर हुए।

प्रश्न 2. इस गद्यांश में लेखिका पाठकों को क्या बतलाना चाहती है?
(अ) कल्पना जगत और वास्तविक जगत का भेद
(ब) भारतवर्ष के लिए शांति निकेतन का अवदान
(स) टैगोर जैसे कलाकार की वृद्धावस्था में साधनहीनता पर दु:ख
(द) रवींद्रनाथ ठाकुर का संक्षिप्त परिचय

प्रश्न 3. गद्यांश का केंद्रीय भाव निम्नलिखित में से किस कथन से है?
(अ) भारत जैसे विशाल देश में भी शिल्प कार्य के लिए धन की कमी है।
(ब) धन के बिना किसी संस्था का संचालन नहीं हो सकता है।
(स) महान लोगों को भी सत्कार्य हेतु धन एकत्र करने के लिए भीख मांगना पड़ जाता है।
(द) बड़े लोगों को किसी संस्था के लिए धन एकत्र करने में कठिनाई नहीं होती।

प्रश्न 4. इस गद्यांश के आधार पर कौनसा कथन उपयुक्त है?
(अ) कल्पना-निर्मित शरीर असत्य है और पार्थिव शरीर सत्य है।
(ब) धृतराष्ट्र को भ्रम हो गया था।
(स) कवींद्र रवींद्र के दर्शन से लेखिका का भ्रम मिट गया।
(द) कल्पना वास्तविकता के प्रकट हो जाने पर खण्डित हो जाती है।

उत्तर - 1. (स), 2. (स), 3. (अ), 4. (द)


हिंदी अनुच्छेद/गद्यांश/गद्यावतरण (passage in hindi) संबंधी यह पैराग्राफ यूपीपीसीएस की ओर से आयोजित परीक्षा में पूछा गया।

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