गोपीचंद थोटाकुरा भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री, देश के पहले अंतरिक्ष पर्यटक
19 मई 2024 को अंतरिक्ष यात्रा कर आंध्र प्रदेश में जन्मे गोपीचंद थोटाकुरा देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। थोटाकुरा ने जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन की कमर्शियल अंतरिक्ष यात्रा के दौरान 19 मई, 2024 को उड़ान भरी। 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद ऐसी उपलब्धि पाने वाले वे दूसरे भारतीय हैं। गोपीचंद को भारत के पहले अंतरिक्ष पर्यटक के रूप में भी जाना जाएगा। उनके साथ ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट में 6 यात्री अंतरिक्ष में गए। कैप्सूल एनएस-25 का उपयोग किया गया। इस यात्रा में सर्वाधिक उम्र के अंतरिक्ष यात्री 90 वर्षीय अमेरिकी एड ड्विट भी शामिल थे। वे अमेरिका के पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं। कैप्सूल पृथ्वी की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में 10 मिनट तक रहा। इस दौरान कर्मन रेखा को पार किया। इसके बाद सुरक्षित जमीन पर उतर आया। गोपीचंद आज भी भारतीय नागरिक हैं। इससे पहले कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, राजा चारी और सिरिशा बंदला अंतरिक्ष में जा चुके हैं, लेकिन वे भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक थे। इस तरह गोपीचंद थोटाकुरा भारतीय मूल के छठे अंतरिक्ष यात्री बने हैं।
सात्विक-चिराग की जोड़ी ने जीता थाईलैंड ओपन, दुनिया की नंबर वन जोड़ी बनीं
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विक साईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने थाईलैंड ओपन बैडमिंटन-2024 का पुरुष युगल का खिताब जीता। बैंकॉक में भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की जोड़ी को हराया। सात्विक और चिराग की जोड़ी का यह वर्ष 2024 का दूसरा खिताब है। इससे पहले उन्होंने फ्रेंच सुपर खिताब जीता है। इस जीत के बाद सात्विक-चिराग की जोड़ी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुंच गई है। बीडब्लूयएफ की ताजा रैंकिंग में इस जोड़ी को 99670 अंक मिले हैं।
मद्रास हाईकोर्ट ने अंगप्रदक्षिणम प्रथा पर रोक हटाई
हाल ही मद्रास हाईकोर्ट ने दक्षिण भारत की अंगप्रदक्षिणम प्रथा पर वर्ष 2015 से लगी रोक हटाई है। हाईकोर्ट ने इसे राइट टू प्राइवेसी में मानते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को धार्मिक प्रथा मनाने का मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने अंगप्रदक्षिणम को संविधान के अनुच्छेद 19(5) के तहत रखा है, जिसमें लोगों को चलने-फिरने और वाहन परिवहन का अधिकार दिया गया है। अंगप्रदक्षिणम प्रथा में अन्य समुदायों के लोग ब्राह्मणों द्वारा इस्तेमाल कर छोड़े गए केले के पत्तों पर लेटते हैं। इस प्रथा में भक्त चाहे किसी भी समुदाय के हों, वे अंगप्रदक्षिणम प्रथा में भाग लेते हैं।
सीआईएसएफ को संसद की सुरक्षा का जिम्मा
20 मई, 2024 से संसद की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ को सौंपा गया है। पिछले दस वर्षों से संसद की सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के पास था। अब 3300 से ज्यादा सीआईएसएफ कर्मी संसद की सुरक्षा संभालेंगे।
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