प्रधानमंत्री ब्रसेल्स से रिमोट से किया एक्टीवेट
ब्रसेल्स (बेल्जियम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री चार्ल्स मिशेल ने एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन को रिमोट से एक्टीवेट किया। यह दूरबीन भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जिले के देवस्थल में लगाई गई है। 'आर्यभट्ट खगोलदर्शी विज्ञान अनुसंधान संस्थान' (अंग्रेजी नाम - Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences)-एरीज में स्थापित इस ऑप्टीकल टेलीस्कोप का व्यास 3.6 मीटर व्यास है।देवस्थल ऑप्टीकेल टेलीस्कोप व एरीज संस्थान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
◆ दूरबीन का व्यास 3.6 मीटर है।◆ यह एशिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप है।
◆ इस पर करीब 150 करोड़ रुपए की लागत आई है।
◆ इसका स्ट्रक्चर, इनक्लोजर, कोटिंग प्लांट आदि सभी देश में ही तैयार किए गए हैं, जबकि लैंस बेल्जियम में बनाया गया है।
◆ एशिया की पहली ऐसी दूरबीन है जो चारों दिशाओं (360 डिग्री पर) का अध्ययन करने में सक्षम है।
◆ इस दूरबीन धुंधले नजर आने वाले तारों, नई आकाश गंगाओं और दूरस्थ तारों के समूह का अध्ययन किया जा सकेगा। साथ ही तारों की संरचना एवं उनके चुंबकीय क्षेत्र को समझा जा सकेगा।
◆ यह दूरबीन 1000 किमी की दूरी पर 20 मीटर आकार की किसी भी वस्तु का सटीक आकलन कर सकती है। यानी 1000 किमी दूर स्थित एक छोटी सी कार आसानी से पहचानी जा सकती है।
◆ दूरबीन भवन में एक 17 मीटर व्यास और 35 मीटर ऊंचा शीर्ष से घूमने वाला बेलनाकार गुबंद है जिसे पूरी तरह से पहली बार भारत में बनाया गया है।
◆ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 मार्च, 2016 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स से रिमोट से इसका उद्घाटन किया।
वर्ष 2007 में इस पर कार्य करना प्रारंभ किया गया था।
◆ दूरबीन के दर्पण की आपूर्ति जर्मन कंपनी ने की। इस दर्पण की पालिश मास्को (रूस) में की गई।
◆ दूरबीन निर्माण में 93 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की और 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेल्जियम की है।
◆ इसके निर्माण के लिए वर्ष 2007 में बेल्जियम की कंपनी 'एडवांस्ड मैकेनिकल एवं ऑप्टिकल सिस्टम' (एएमओएस) से करार किया गया था।
◆ आर्यभट्ट खगोलदर्शी विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) संस्थान की स्थापना भारत रूस एवं बेल्जियम द्वारा संयुक्त रूप से की गई है।
◆ एरीज संस्थान की ओर से वर्ष 2010 में देवस्थल में 1.3 मीटर व्यास का टेलीस्कोप स्थापित किया गया था।
◆ उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में देवस्थल 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
◆ अंतरिक्ष के अध्ययन के लिए देवस्थल क्षेत्र का सर्वे 1980 से शुरू हो गया था। वायु, ध्वनि, प्रकाश व प्रदूषण के व्यवधान से मुक्त इस स्थान को बड़ी दूरबीन लगाने के लिए चुना गया।
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