घटना दिनांक : 25 जनवरी, 2019
- भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीन हस्तियों को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने की घोषणा की।
- जनसंघ के प्रमुख नेता व सामाजिक कार्यकर्ता रहे नानाजी देशमुख, संगीतकार भूपेन हजारिका और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत से सम्मानित किया जाएगा। देशमुख और हजारिका को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा।
- उपरोक्त तीनों हस्तियों को भारत रत्न मिलने की घोषणा के बाद अब तक कुल 48 हस्तियां इस सम्मान से सम्मानित हो चुकी हैं।
नानाजी देशमुख
- नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर सन 1916 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के गांव कडोली में हुआ था।
- नानाजी के पिता का नाम अमृतराव देशमुख था तथा माता का नाम राजाबाई था। नानाजी के दो भाई एवं तीन बहने थीं।
- नानाजी बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दैनिक शाखा में जाया करते थे। जब वे 9वीं कक्षा में अध्ययनरत थे, उसी समय उनकी मुलाकात संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार से हुई। आगे की पढ़ाई के लिए नानाजी 1937 में पिलानी गए।
- सन् 1940 में उन्होंने नागपुर से संघ शिक्षा वर्ग का प्रथम वर्ष पूरा किया।
- ग्रामोदय से राष्ट्रोदय के अभिनव प्रयोग के लिए नानाजी ने 1996 में स्नातक युवा दम्पत्तियों से पांच वर्ष का समय देने का आह्वान किया। पति-पत्नी दोनों कम से कम स्नातक हों, आयु 35 वर्ष से कम हो तथा दो से अधिक बच्चे न हों। इस आह्वान पर दूर-दूर के प्रदेशों से प्रतिवर्ष ऐसे दम्पत्ति चित्रकूट पहुंचने लगे। चयनित दम्पत्तियों को 15-20 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता था। प्रशिक्षण के दौरान नानाजी का मार्गदर्शन मिलता था।
- राजनीतिक संगठन के रूप में भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय नानाजी को उत्तरप्रदेश में भारतीय जनसंघ के महासचिव का प्रभार दिया गया। नानाजी के जमीनी कार्य ने उत्तरप्रदेश में पार्टी को स्थापित करने में अहम भूमिका निभायी। 1957 तक जनसंघ ने उत्तरप्रदेश के सभी जिलों में इकाइयाँ खड़ी कर लीं। इस दौरान नानाजी ने पूरे उत्तरप्रदेश का दौरा किया जिसके परिणामस्वरूप जल्द ही भारतीय जनसंघ उत्तरप्रदेश की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बन गयी।
- 27 फरवरी 2010 को नानाजी देशमुख का देहांत हुआ।
भूपेन हजारिका
- भूपेन हजारिका 8 सितंबर 1926 को असम में जन्मे थे। हजारिका 10 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। हजारिका को गाने की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी। वे गुवाहाटी में पले-बढ़े, जहां वे सिर्फ 10 साल की उम्र में असमिया भाषा में गाने गाते थे।
- 1936 में कोलकाता में भूपेन ने गायक, संगीतकार और गीतकार बनने की यात्रा शुरू हुई। 1942 में भूपेन ने आर्ट से इंटर की पढ़ाई पूरी की। साथ ही बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से उन्होंने एमए किया।
- हजारिका ने गुवाहाटी में ऑल इंडिया रेडियो में गाना शुरू कर दिया था। हजारिका बंगाली गानों को हिंदी में अनुवाद कर उसे अपनी आवाज देते थे। हजारिका को कई भाषाओं का ज्ञान था। जब एक बार वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी गए तो उनकी मुलाकात प्रियंवदा पटेल से हुई। दोनों ने अमेरिका में 1950 में शादी कर ली।
- 1952 में प्रियंवदा ने बेटे को जन्म दिया। 1953 में हजारिका अपने परिवार के साथ भारत लौट आए।
- हजारिका ने अपने जीवन में एक हजार गाने और 15 किताबें लिखी हैं। उन्होंने 'रुदाली', 'मिल गई मंजिल मुझे', 'साज', 'दरमियां', 'गजगामिनी', 'दमन' और 'क्यों' जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत गाए।
- हजारिका को 1975 में नेशनल अवॉर्ड, 1977 में पद्मश्री और 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें 2009 में असोम रत्न और इसी साल संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 2011 में पद्मभूषण और 2012 में मरणोपरांत पद्मविभूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
- 5 नवंबर 2011 को 85 वर्ष की आयु में भूपेन हजारिका का मुंबई में निधन हुआ।
प्रणब मुखर्जी
- प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसम्बर 1935 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ।
प्रणब मुखर्जी के पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी है।
प्रणब मुखर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में एमए के साथ साथ कानून की डिग्री भी हासिल की। वे वकील, पत्रकार और प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्राप्त है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी ने 1969 में राज्य सभा सांसद के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
केंद्रीय सरकार में रहते हुए प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री से लेकर विदेश विभाग और रक्षा मंत्री तक का पदभार भी संभाला है।
प्रणब मुखर्जी ने 25 जुलाई 2012 को भारत के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।
प्रणब मुखर्जी ने 'द कोलिएशन ईयर्स: 1996-2012' नामक पुस्तक लिखी है।
प्रणब दा के नाम से प्रसिद्ध प्रणब मुखर्जी को सन् 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया।
प्रणब मुखर्जी को सन् 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला।
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