आज का दिन : 24 जनवरी 2020
राष्ट्रीय बालिका दिवस
National Girl Child Day
- भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी, 1966 को प्रधानमंत्री पद संभाला था। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- पहली बार राष्ट्रीय बालिका दिवस सन् 2009 में मनाया गया था।
- संयुक्त राष्ट्र की ओर से अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है।
- भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।
- राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस लड़कियों की असाधारण उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन है, जिन्होंने कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता से हमें गौरवान्वित किया है।
- लड़कियों के प्रति पक्षपात को रोकना और उनके लिए समान अवसर सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। कन्या भ्रूण हत्या को हतोत्साहित करना भी इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस-2020
- राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 10 पीठों का गठन करेगा, ताकि अनुसंधान गतिविधियों के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा सके। इस पहल को 'विश्वविद्यालयों में पीठों की स्थापना' का नाम दिया गया है। इसके तहत प्रशासन, कला, विज्ञान और सामाजिक सुधार में प्रसिद्ध महिलाओं के नाम पर पीठों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सहायता देगा। इस पहल से उच्च शिक्षा के लिए देश की बालिकाओं और महिलाओं को प्रेरित करने की योजना है।
- यूजीसी द्वारा प्रस्तावित और मंत्रालय द्वारा स्वीकृत विषयवार पीठों का विवरण इस प्रकार है-
- 1. प्रशासन - देवी अहिल्याबाई होल्कर
- 2. साहित्य - महादेवी वर्मा
- 3. स्वतंत्रता सेनानी (पूर्वोत्तर) - रानी गायदिनल्यु
- 4. औषधि एवं स्वास्थ्य - आनंदीबाई गोपालराव जोशी
- 5. मंच कला - मदुरै षणमुखवादिव्यू सुब्बुलक्ष्मी
- 6. वन/वन्यजीव संरक्षण - अमृता देवी (बेनीवाल)
- 7. गणित - लीलावती
- 8. विज्ञान - कमला सोहोनी
- 9. कविता एवं रहस्यवाद - लल्ल-दय्द
- 10. शैक्षिक सुधार - हंसा मेहता
- प्रति पीठ के लिए प्रतिवर्ष 50 लाख रुपये का वित्तीय प्रस्ताव किया गया है और सभी 10 पीठों की स्थापना के लिए हर वर्ष लगभग 5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। दिशा-निर्देशों के अनुसार आरम्भ में 5 वर्षों की अवधि के लिए पीठों की स्थापना की जाएगी।
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