प्रादेशिक सेना दिवस
Territorial Army Day
आज का दिन : 9 अक्टूबर, 2020
- भारतीय संविधान सभा ने सितंबर, 1948 में प्रादेशिक सेना अधिनियम पारित किया था। इसके बाद प्रादेशिक सेना की स्थापना 9 अक्टूबर, 1949 में की गई थी।
- देशभर में प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को प्रादेशिक सेना दिवस मनाया जाता है।
- प्रादेशिक सेना एक स्वैच्छिक नागरिक सेवा है। इसमें सामान्य श्रमिक से लेकर सुयोग्य तकनीकनिशियन तक शामिल हो सकते हैं।
- प्रादेशिक सेना में भारत के सभी नागरिक, जो शरीर से समर्थ हों, इसमें भर्ती हो सकते हैं। आयु सीमा 18 और 35 वर्ष हैं, जो सेवानिवृत्त सैनिकों और तकनीकी नागरिकों के लिए शिथिल की जा सकती हैं।
- प्रादेशिक सेना नियमित भारतीय सेना के बाद दूसरी रक्षक सेना है। युद्ध के दौरान प्रादेशिक सेना की तैनाती की जाती है। करगिल युद्ध में भी इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये आर्मी युद्ध या लड़ाई के दौरान मार्गदर्शक की भूमिका निभाने से लेकर सेना तक की मदद करती है।
- आम नागरिक सेना में भर्ती होने के अपने शौक और देश की सेवा के जज्बे को पूरा करने के लिए प्रादेशिक सेना में भर्ती हो सकते हैं।
- प्रसिद्ध क्रिकेटर कपिल देव और महेन्द्र सिंह धोनी लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में प्रादेशिक सेना का हिस्सा बन चुके हैं। राजनीतिज्ञ और क्रिकेट प्रशासक अनुराग ठाकुर भी प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट बने।
- प्रादेशिक सेना के पास सुरक्षा से जुड़ी कई जिम्मेदारियां हैं। आतंकविरोधी अभियान में सेना की मदद करने से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। यही नहीं, युद्ध में हिस्सा लेकर सैन्य संस्थानों और छावनियों की सुरक्षा भी प्रादेशिक सेना के हाथों में होती है।
- प्रादेशिक सेना में अनेक विभाग कार्यरत हैं। इनमें आम्र्ड कोर, तोपखाना कोर, इंजीनियर कोर, संकेत कोर, पैदल सेना, सेना सेवा कोर, सेना चिकित्सा कोर तथा विद्युत और यांत्रिक इंजीनियरी कोर आदि।
- प्रादेशिक सेना में दो प्रकार की यूनिट हैं : 1. नागरिक और 2. प्रांतीय। प्रांतीय यूनिटों में ग्रामीण परिवेश के जवान भर्ती किए जाते हैं, जो दो या तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। नागरिक यूनिटोंमें महानगरों या बड़े शहरों के जवानों को भर्ती किया जाता है, जिन्हें साप्ताहिक परेड प्रणाली के अनुसार प्रशिक्षित दिया जाता है। इन्हें शाम के समय, रविवार तथा छुट्टियों में अथवा चार दिन के प्रशिक्षण शिविरों में प्रशिक्षित किया जाता है।
- 'सावधानी व शूरता' प्रादेशिक सेना का ध्येय वाक्य है।
आज ही के दिन विश्व डाक दिवस भी मनाया जाता है।

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