शुक्रवार, 27 मार्च 2026

27 मार्च 2026 : विश्व रंगमंच दिवस

विश्व रंगमंच दिवस

(World Theatre Day)

आज का दिन : 27 मार्च 2026

  • प्रतिवर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (International Theatre Institute-ITI) की ओर से पहली बार 27 मार्च, 1962 को विश्व रंगमंच दिवस मनाया गया।
  • विश्व रंगमंच दिवस (World Theatre Day) को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में रंगमंच को बढ़ावा देना और लोगों को रंगमंच के सभी रूपों के मूल्यों से अवगत कराना है।
  • रंगमंच से संबंधित संस्थाओं और समूहों द्वारा इस दिन को विश्व रंगमंच दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है।
  • विश्व रंगमंच दिवस-2026 पर अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) द्वारा मुख्य कार्यक्रम का आयोजन 25 से 27 मार्च, 2026 तक लक्जमबर्ग शहर में आयोजित किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश

  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान प्रतिवर्ष विश्व रंगमंच दिवस पर दुनिया के किसी विशिष्ट रंगकर्मी को विश्व के रंगकर्मियों को संदेश देने के लिए आमंत्रित करता है।
  • सन् 1962 में पहला अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश फ्रांस की जीन काक्टे ने दिया था।
  • वर्ष 2002 में अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड द्वारा दिया गया था।


अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (आईटीआई)

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  • सन् 1948 में अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान की स्थापना यूनेस्को की सहायता से थिएटर और नृत्य की दुनिया से जुड़े लोगों ने की।
  • अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान 100 से अधिक केंद्रों और दुनिया भर में सहयोग से प्रदर्शित कला के सबसे बड़े संगठन के रूप में विकसित हुआ।
  • आईटीआई यूनेस्को, पेरिस में हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस और विश्व रंगमंच दिवस का आयोजन करता है।

भारत में नाट्यकला

  • ऐसा माना जाता है कि नाट्यकला का विकास सर्वप्रथम भारत में ही हुआ।
  • प्राचीन वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद के कतिपय सूत्रों में यम और यमी, पुरुरवा और उर्वशी आदि के कुछ संवाद हैं। इन संवादों में नाट्यजगत से जुड़े लोग नाटक के विकास का चिह्न पाते हैं।
  • कहा जाता है कि ऋग्वेद के इन्हीं संवादों से प्रेरणा ग्रहण कर नाटककारों ने नाटकों की रचना की और क्रमश: नाट्यकला का विकास होता गया।
  • इसी विकास क्रम में भरतमुनि ने उसे शास्त्रीय रूप प्रदान किया। भरतमुनि ने भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ 'नाट्यशास्त्र' लिखा है।
  • संस्कृत के प्रसिद्ध नाटककार कालिदास को 'भारत का शेक्सपीयर' कहा जाता है।

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