बुधवार, 22 मई 2024

22 मई 2024 : अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

(International Day for Biological Diversity)


आज का दिन : 22 मई 2024

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अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2024 Theme :
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  • प्रतिवर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से 1992 से प्रतिवर्ष सम्पूर्ण विश्व में 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस अथवा विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जैव विविधता की परिभाषा इस प्रकार है-धरातलीय, महासागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिकीय तंत्रों में उपस्थित अथवा उससे संबंधित तंत्रों में पाए जाने वाले जीवों के बीच विभिन्नता जैव विविधता है।
  • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र-भोजन, औषधीय पौधों का महत्व आदि को प्रदर्शित करके जैव विविधता के महत्व एवं उसके न होने पर होने वाले खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
  • वर्ष 2024 में जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए 21 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2024 तक कोलंबिया में जैविक विविधता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
  • संयुक्त राष्ट्र 2021-2030 दशक को 'पारिस्थतिकी तंत्र बहाली' (Ecosystem Restoration) के रूप में मना रहा है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2021-2030 दशक को 'सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान' (Ocean Science for Sustainable Development) के रूप में भी मनाया जा रहा है। ये दोनों ही दशक जैव विविधता से जुड़े हुए हैं।


समृद्धतम जैव विविधता वाले 17 देशों में भारत भी शामिल

  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से दुनिया के समृद्धतम जैव विविधता वाले 17 देशों की सूची में भारत भी शामिल है। इन 17 देशों में विश्व की लगभग 70 प्रतिशत जैव विविधता विद्यमान है। सूची के अन्य 16 देशों में दक्षिण अफ्रीका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कांगो, मेडागास्कर, इंडोनेशिया, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस, ब्राजील, कोलम्बिया, इक्वेडोर, मेक्सिको, पेरू, अमेरिका और वेनेजुएला आदि शामिल हैं।
  • दुनिया के जैव विविधता का मात्र 2.4 प्रतिशत ही भारत में है, लेकिन दुनिया के ज्ञात जीव जंतुओं का लगभग 5 प्रतिशत भारत में पाया जाता है। भारत में लगभग 49,000 वनस्पति प्रजातियाँ एवं 89,000 प्राणी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • भारत का दुनिया में वनस्पति-विविधता के आधार पर 10वां, क्षेत्र सीमित प्रजातियों के आधार पर 11वां और फसलों के उद्भव और विविधता के आधार पर छठा स्थान है।
  • भारत के 23.39 प्रतिशत भू-भाग पर पेड़ और जंगल फैले हुए हैं।
  • भारतीय संसद ने भारत में जैवविविधता के संरक्षण के लिए 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' पारित किया था। इसी अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) की स्थापना 2003 में की गई।
  • भारत सरकार ने देश भर में 18 बायोस्फीयर भंडार स्थापित किये हैं जो जीव जंतुओं के प्राकृतिक भू-भाग की रक्षा करते हैं।
  • विश्व में जैव विविधता वाले 25 ऐसे हॉट स्पॉट या आकर्षण के केंद्र हैं, जो जैविक भौगोलिक क्षेत्र हैं। यहां दुनिया के लगभग 60 प्रतिशत पौधों, पक्षियों, स्तनपाई प्राणियों, सरीसृपों और उभयचर प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है। इन हॉट स्पॉट्स को मनुष्यों से खतरा है।
  • 1988 में किए गए अध्ययन में पहचाने गए 18 हॉटस्पॉट में से दो भारत में खोजे गए। ये दो क्षेत्र पश्चिमी घाट और पूर्वी हिमालय थे। हाल ही में संशोधित 25 हॉटस्पॉट की सूची में चुने गए दो क्षेत्र पश्चिमी घाट/श्रीलंका और भारत-बर्मा क्षेत्र को शामिल किया गया है। ये दोनों ही विश्व के आठ शीर्ष सर्वाधिक महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सम्मिलित हैं। पश्चिमी घाटों को सहयाद्री पहाडिय़ां भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में लगभग 1,60,000 वर्ग कि.मी. का क्षेत्रफल आता है और यह क्षेत्र देश के दक्षिणी छोर से गुजरात तक 1600 कि.मी. तक फैला हुआ है। पश्चिमी घाट दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं को रोकते हैं इसलिए इन पहाडिय़ों की पश्चिमी ढलानों पर हर साल भारी बारिश होती है। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यहां पाई जाने वाली वानस्पतिक विविधताएं गणना से लगभग परे हैं।
  • भारत में जैव विविधता के संरक्षण और विकास के लिए एक अनूठा जीवमंडल पश्चिमी भारत के राजस्थान राज्य में जैसलमेर शहर में स्थित है। यह 3162 वर्ग किमी का क्षेत्र में फैला हुआ सबसे बड़े राष्ट्रीय पार्कों में से एक है। मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान थार रेगिस्तान के पारिस्थितिकी तंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उद्यान का 20 प्रतिशत भाग रेत के टीलों से सजा हुआ है ।
  • 1971 में रामसर, ईरान में झीलों पर हुए सम्मेलन में एक अंतरराष्ट्रीय संधि हस्ताक्षर किए गये जो झीलों और अपने संसाधनों से झीलों के संरक्षण और सही उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।


*अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2024 का विषय/थीम*

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