अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस
(International Museum Day)
आज का दिन : 18 मई 2026
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| अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026 थीम Museums Uniting a Divided World |
- प्रतिवर्ष 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद या इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम (आईसीओएम) की ओर से सन् 1977 से 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है।
- म्यूजियम डे मनाने का उद्देश्य लोगों को संग्रहालयों के प्रति जागरुक करने के साथ ही अपने इतिहास को संजोने और उससे सीख लेने के लिए प्रेरित करना है।
- अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद के अनुसार, 'संग्रहालय में ऐसी अनेक वस्तुएं सुरक्षित रखी जाती हैं, जो मानव सभ्यता की याद दिलाती हैं। संग्रहालयों में रखी गई वस्तुएं प्रकृति और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित करती हैं।'
- इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम्स की ओर से वर्ष 1948 से प्रतिवर्ष 3 वर्ष में जनरल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाता है। ‘26वीं जनरल कॉन्फ्रेन्स’ चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में 20 से 28 अगस्त, 2022 तक आयोजित की गई। अब वर्ष 2025 में होने वाली 27वीं जनरल कॉन्फ्रेंस के मेजबान शहर के रूप में दुबई को चुना गया। यह कॉन्फ्रेंस 11 से 17 नवंबर, 2025 तक दुबई में आयोजित की गई। इस कॉन्फ्रेंस की थीम The Future of Museums in Rapidly Changing Communities रखी गई।
सन् 1861 में हुई थी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना
- संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भा.पु.स.) [अंग्रेजी - Archaeological Survey of India (ASI)] राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासतों के पुरातत्वीय अनुसंधान तथा संरक्षण के लिए एक प्रमुख संगठन है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना सन् 1861 में की गई थी।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का इतिहास
- भारत में पुरातात्विक और ऐतिहासिक खोज के प्रयासों की शुरुआत सर्वप्रथम सर विलियम जोन्स ने की। उन्होंने 15 जनवरी, 1784 को कलकत्ता में एशियाटिक सोसायटी का गठन किया। सोसायटी ने लोगों को भारत की पुरातन संपदा के बारे में जागरूक किया। सोसायटी ने पांडुलिपियों का संग्रहण किया।
- विलियम जोंस से पूर्व भी टवेर्नियर, फिंच और बर्नियर, थेवेनॉट, कारेरी, फ्रायर, ओविंगटन, हैमिल्टन, एक्वेटिल डु पेरोन, जोसेफ टाईफेंथेलर, विलियम चैंबर जैसे उत्साही और मेहनती लोगों ने भारत के विभिन्न स्मारकों के सर्वेक्षण किए थे।
- सन् 1814 में एशियाटिक सोसायटी द्वारा एकत्र की गई पुरातन भारतीय संपदा के लिए एक संग्रहालय की स्थापना की गई। बाद में एशियाटिक सोसायटी कलकत्ता की तर्ज पर ही मुंबई में सन् 1804 में और चेन्नई में सन् 1818 में ऐसी ही सोसायटी शुरू की गई।
- सन् 1810 में स्मारकों के लिए बंगाल रेगुलेशन पहला था।
- सन् 1833 में जेम्स प्रिंसेप एशियाटिक सोसायटी के सचिव बने। उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अशोक के शिलालेखों की ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को पढऩा रहा।
- इसके बाद भी देश के विभिन्न हिस्सों से भारतीय पुरातत्व को प्रकाश में लाने में अनेक विद्वानों का सहयोग रहा, जिनमें जेम्स फग्र्यूसन, मार्खम किट्टो, एडवर्ड थॉमस, अलेजेंक्डर कनिंघम, वाल्टर एलियट, कॉलिन मैकेंजी, कर्नल मीडोज टेलर, डॉ. स्टीवेंशन आदि नाम उल्लेखनीय हैं।
- जेम्स प्रिंसेप के सहयोगी बंगाल इंजीनियर्स के सेकेंड लेफ्टिनेंट अलेक्जेंडर कनिंघम ने सन् 1848 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए एक योजना तैयार की और इसे ब्रिटिश सरकार के सामने रखा। लेकिन सफल नहीं हुए।
- इसी अवधि के दौरान यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एशियाटिक सोसाइटी की सिफारिशों पर अंग्रेज सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने राशि मंजूर की।
- इसके बाद सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय पुरातत्व की गतिविधियां लगभग ठप रहीं।
- अलेक्जेंडर कनिंघम ने एक बार फिर प्रयास किया और नए प्रस्ताव को लॉर्ड कैनिंग के सामने रखा। इस पर कैनिंग ने उत्तरी भारत में सर्वेक्षण की एक योजना को मंजूरी दी। 1861 में कनिंघम पहले पुरातत्व सर्वेक्षणकर्ता के रूप में नियुक्त किए गए। इस प्रकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना हुई।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का कार्य व उद्देश्य
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का प्रमुख कार्य राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों तथा पुरातत्वीय स्थलों और अवशेषों का रखरखाव करना है । इसके अतिरिक्त, प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अनुसार यह देश में सभी पुरातत्वीय गतिविधियों को संचालित करता है। यह पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 को भी विनियमित करता है।
- राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों तथा पुरातत्वीय स्थलों तथा अवशेषों के रखरखाव के लिए सम्पूर्ण देश को 24 मंडलों में विभाजित किया गया है। संगठन के पास मंडलों, संग्रहालयों, उत्खनन शाखाओं, प्रागैतिहासिक शाखा, पुरालेख शाखाओं, विज्ञान शाखा, उद्यान शाखा, भवन सर्वेक्षण परियोजना, मंदिर सर्वेक्षण परियोजनाओं तथा अन्तरजलीय पुरातत्व स्कन्ध के माध्यम से पुरातत्वीय अनुसंधान परियोजनाओं के संचालन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित पुरातत्वविदों, संरक्षकों, पुरालेखविदों, वास्तुकारों तथा वैज्ञानिकों का कार्य दल है ।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संगठन
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रमुख को महानिदेशक कहा जाता है।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक अलेक्जैंडर कनिंघम (1871-1885) थे। कनिंघम को भारतीय पुरातत्व का जनक भी कहा जाता है।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम भारतीय महानिदेशक राय बहादुर दया राम साहनी (1931 - 1935) थे।
- स्वतंत्र भारत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक एन. पी. चक्रवर्ती (1948 -1950) बनाए गए।
- वर्तमान यानी सन् 2025 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत हैं।
केन्द्रीय पुरातत्व पुस्तकालय
- सन् 1902 में केन्द्रीय पुरातत्व पुस्तकालय की स्थापना नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार सौंध में की गई।

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