सीएसआईआर स्थापना दिवस
(CSIR Foundation Day)
आज का दिन : 26 सितंबर 2024
- वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (अंग्रेजी नाम-Council of Scientific & Industrial Research - CSIR) की स्थापना 26 सितंबर, 1942 को हुई थी। यह सीएसआईआर का 83वां स्थापना दिवस है।
- वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् देश को अमूल स्प्रे से लेकर एड्स की सस्ती दवा और दूध की शुद्धता मापने के यंत्र से लेकर सुपर कंप्यूटर जैसी समानांतर गणना तकनीक तक देने वाला एक स्वायत्त संस्थान है।
- सीएसआईआर का पंजीकरण भारतीय सोसायटी पंजीकरण धारा 1860 के अंतर्गत हुआ है। हालांकि इसका वित्त प्रबंध भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा होता है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष और मंत्रालय के मंत्री इसके उपाध्यक्ष होते हैं। इसके प्रशासन को महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) पद का अधिकारी संभालता है। वर्तमान यानी सन् 2024 में डॉ. एन. कलाइसेल्वी सीएसआईआर के महानिदेशक हैं।
- सीएसआईआर ने कोरोना महामारी से मुकाबले के लिए यूवी (अल्ट्रा वायलेट) तकनीक तैयार की है। इससे कोरोना वायरस को पूरी तरह नष्ट किया जाता है। प्रयोगशाला में सफल परीक्षण के बाद संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को इस नई यूवी तकनीक से सुरक्षा प्रदान की गई है। सीएसआईआर ने वर्ष 2023 को बाजरा वर्ष (Millet Year) के रूप मनाया।
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद देश का सबसे बड़ा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान करने एवं इस क्षेत्र में देश को विकास के पथ पर ले जाने वाला संस्थान है। इस संस्थान के तहत देश में 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 दूरस्थ केन्द्र, 3 नवोन्मेषी कॉम्प्लेक्स और 5 यूनिट कार्यरत हैं। इन सभी में 4600 से ज्यादा वैज्ञानिक और लगभग 8000 तकनीकी कर्मी कार्यरत हैं।
- वर्ष 1942 में सीएसआईआर की स्थापना शांतिस्वरूप भटनागर की अध्यक्षता में की गई थी और भटनागर के नेतृत्व में ही इस संस्थान का विस्तार हुआ।
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की ओर से सन् 1987 से प्रतिवर्ष 'सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार' दिया जा रहा है। इसके अलावा सीएसआईआर की ओर से ग्रामीण विकास के लिए वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय नवोन्मेष हेतु पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
- सीेसआईआर ने 1952 में हिंदी में विज्ञान पत्रिका 'विज्ञान प्रगति' का प्रकाशन शुरू किया था। हिन्दी के इस मासिक प्रकाशन में हाल के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित विकास, खोज, आविष्कार, लेख, फीचर, विज्ञान कथा, विज्ञान कविता, प्रश्नोत्तरी, साइंटून (विज्ञान कार्टून) और डॉक्यूड्रामा के रूप में तकनीकी प्रगति के बारे में जानकारी दी जाती है। हाल ही सूरत में 14-15 सितंबर, 2022 को आयोजित दूसरे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में 'विज्ञान प्रगति' को वर्ष 2022 का राष्ट्रीय राजभाषा कीर्ति पुरस्कार (प्रथम स्थान) प्राप्त हुआ है।
सीएसआईआर निम्न क्षेत्रों में कार्यरत
- रेडियो, अंतरिक्ष भौतिकी, महासागर विज्ञान, भूभौतिकी, रसायन, औषध, जीनोमिकी, जैवप्रौद्योगिकी, नैनोप्रौद्योगिकी, खनन, वैमानिकी, उपकरण, पर्यावरणीय इंजीनियरी, सूचना प्रौद्योगिकी
- सीएसआईआर निम्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाता है-
- पर्यावरण, स्वास्थ्य, पेयजल, खाद्य, आवास, ऊर्जा, कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्र
पेटेंट पोर्टफोलियो
- वर्तमान में सीएसआईआर प्रौद्योगिकी के चुनिंदा क्षेत्रों में देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व दिलवाने के लिए अपने पेटेंट पोर्टफोलियो को मजबूत कर रहा है। सीएसआईआर को देश के किसी भी अन्य सार्वजनिक संस्थान से अधिक अमेरिकी पेटेंट हासिल हैं। सीएसआईआर प्रतिवर्ष औसतन लगभग 200 भारतीय पेटेंट और 250 विदेशी पेटेंट फाइल करता है।
'हल्दीघाटी' की दूसरी लड़ाई
- परंपरागत भारतीय ज्ञान के अनुसार हल्दी को घाव भरने के उपयोग में लाया जाता है। लेकिन इस पर यूएस पेटेंट कार्यालय ने विदेश में पेटेंट जारी कर दिया। इसके विरुद्ध सीएसआईआर ने एक 'नियम आधारित' संघर्ष एवं अनुसन्धान किया। भारत के प्राचीन संस्कृत व पाली ग्रंथों और अन्य नियम-कानूनों के द्वारा सीएसआईआर ने सिद्ध किया कि हल्दी का घाव भरने में उपयोग प्राचीन भारतीय ज्ञान है। इसके बाद यूएस पेटेंट कार्यालय ने इस पेटेंट को रद्द कर दिया। मीडिया ने इस मामले को 'हल्दीघाटी की दूसरी लड़ाई' नाम दिया, जिसमें सीएसआईआर की बदौलत भारत की जीत हुई।
सीएसआईआर की मुख्य देन
- भारत का पहला सुपर कंप्यूटर
- स्वतंत्र भारत में विकसित 14 नए ड्रग्स में से 11
- अमूल बेबी फूड
- नूतन स्टोव
- महिलाओं हेतु सहेली
- ए नानस्टेराइडल वंस-ए-वीक ओरल गर्भनिरोधक गोली
- मलेरिया रोकने हेतु ई-मल
- अस्थमा हेतु हर्बल चिकित्सा संबंधी एजमॉन
- सरस - 14 सीटर वाला 2 इंजन का टर्बोप्रॉप विमान
- भारत का पहला पेरलेल कम्प्यूटर फ्लोसॉल्वर
- सोनालीका तथा स्वराज ट्रैक्टर्स
- मतदाताओं के लगाई जाने वाली अमिट स्याही
'सागर से दवा' परियोजना
- सीएसआईआर हमारे समुद्रों की भी गहराई से छानबीन कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में 'सागर से दवा' परियोजना पर शोध जारी है। हमारा देश समुद्री संसाधन से संपन्न है। इसीलिए सीएसआईआर के वैज्ञानिक हर्बल उपचार और दवाइयों के विकास करने हेतु समुद्री वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को उपयोग में लाने के लिए शोधरत है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें