विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले अनुच्छेद/गद्यांश/गद्यावतरण (hindi passage) संबंधी अभ्यास प्रश्न
निम्नांकित गद्यावतरण को पढ़कर नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
निराशा, कुंठा और प्रवंचना की जननी है। इसका अन्तिम रूप पलायन है। यह कभी भी मानव और पशुओं को अपना नहीं बना सकती। इससे लघुता और क्षुद्रता का जन्म होता है। व्यक्ति ग्रन्थियुक्त बन जाता है, जबकि आशा मनुष्य को मुक्त बनाती है। आशावान के मुख मंडल पर सौम्यता विराजती है। निराशावादी चेहरा चिन्ता से घिरा रहता है। वह सीमित तथा तंग दायरे में चक्कर काटता है।
प्रश्न 1. क्या मानवता के विकास का रोडा निराशा है?
(अ) नकारात्मक प्रवृत्ति ऊर्जा-तेज का लोप करती है।
(ब) नकारात्मकता से पुरुषार्थ समाप्त होता है।
(स) नकारात्मकता मानव स्वभाव है।
(द) मानव स्वभाव को समूल नष्ट नहीं किया जा सकता है।
प्रश्न 2. श्रेष्ठ जीवन के लिए व्यक्ति को क्या करना चाहिए-
(अ) व्यक्ति को उद्यमी होना चाहिए
(ब) व्यक्ति में आत्मविश्वास होना चाहिए
(स) व्यक्ति को परजीवी नहीं होना चाहिए
(द) व्यक्ति को संवेदनशील होना चाहिए
प्रश्न 3. मनुष्य के उच्चतर विकास में स्वयं की चिन्तन शक्ति की कौनसी भूमिका है-
(अ) मनुष्य अपने विचारों का दास होता है
(ब) मनुष्य का विवेक ही उसे मार्ग सुझाता है
(स) मनुष्य की उपयोगिता समाज सापेक्ष में है
(द) मनुष्य को निजता का शिकार नहीं बनना चाहिए
प्रश्न 4. समाज में सम्मान पाने हेतु मनुष्य की आचरणशीलता की क्या भूमिका है?
(अ) मनुष्य का आचरण ही पूज्य है न कि जन्म क्षेत्र
(ब) मनुष्य अपनी करनी से देवता बन सकता है
(स) मनुष्य अपने विचारों से सभ्यता के उत्थान में अग्रणी रह सकता है
(द) मनुष्य के संस्कार ही आगामी पीढ़ी का बीज वपन करते हैं
प्रश्न 5. मानव विकास में परिवेश की क्या भूमिका हो सकती है?
(अ) मनुष्य जन्म से बुरा-भला नहीं होता है
(ब) परिवेश से ही मनुष्य के संस्कार-विचार प्रभावित होते हैं
(स) परिवेश से कटा मनुष्य मुख्यधारा से अलग रहता है
(द) भौतिक जगत में परिवेश का बड़ा महत्व है
उत्तर - 1. (ब), 2. (अ), 3. (द), 4. (अ), 5. (ब)
हिंदी अनुच्छेद/गद्यांश/गद्यावतरण (passage in hindi) संबंधी यह पैराग्राफ यूपीपीसीएस की ओर से आयोजित परीक्षा में पूछा गया।
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