प्रसिद्ध हिंदी लेखिका कृष्णा सोबती को वर्ष 2017 का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला यह देश का सर्वोच्च पुरस्कार है। 53वें पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कृष्णा सोबती ने भारत विभाजन से लेकर, स्त्री-पुरुष संबंधों, भारतीय समाज में आते बदलाव और मानवीय मूल्यों के पतन जैसे विषयों को बेबाकी से कहानियों में उतारा है। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय किया गया है। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाली हिंदी की 11वीं रचनाकार हैं। वर्ष 2016 में बांग्ला कवि शंख घोष को यह पुरस्कार दिया गया था।
ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने बताया कि डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में हुई निर्णायक मंडल की बैठक में कृष्णा सोबती को पुरस्कार दिए जाने का फैसला किया किया। निणार्यक मंडल में गिरीश्वर मिश्र, शमीम हनफी, हरीश त्रिवेदी, रमाकांत रथ और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीला धर मंडलोई आदि शामिल हैं। कृष्णा सोबती को पुरस्कार में 11 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र, वाग्देवी की प्रतिमा तथा प्रतीक चिह्न प्रदान किए जाएंगे।
1966 में अपनी पुस्तक 'मित्रो मरजानी' से वे साहित्य में चर्चित हुईं। नई कहानी के दौर में 'बादलों के घेरे', 'सिक्का बदल गया' से उनकी पहचान बनी। 'जिंदगीनामा', 'समय सरगम', 'हम हशमत', 'डार से बिछुड़ी', 'ऐ लड़की', 'जैनी मेहरबान सिंह' उनकी चर्चित कृतियां हैं।
ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने बताया कि डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में हुई निर्णायक मंडल की बैठक में कृष्णा सोबती को पुरस्कार दिए जाने का फैसला किया किया। निणार्यक मंडल में गिरीश्वर मिश्र, शमीम हनफी, हरीश त्रिवेदी, रमाकांत रथ और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीला धर मंडलोई आदि शामिल हैं। कृष्णा सोबती को पुरस्कार में 11 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र, वाग्देवी की प्रतिमा तथा प्रतीक चिह्न प्रदान किए जाएंगे।
मित्रो मरजानी से चर्चित हुईं कृष्णा सोबती
कृष्णा सोबती का जन्म अविभाजित भारत के गुजरात (अब पाकिस्तान में) में 18 फरवरी, 1925 को हुआ। विभाजन के बाद वे दिल्ली में बस गईं। उन्हें 1980 में 'जिन्दी नामा' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फेलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है।1966 में अपनी पुस्तक 'मित्रो मरजानी' से वे साहित्य में चर्चित हुईं। नई कहानी के दौर में 'बादलों के घेरे', 'सिक्का बदल गया' से उनकी पहचान बनी। 'जिंदगीनामा', 'समय सरगम', 'हम हशमत', 'डार से बिछुड़ी', 'ऐ लड़की', 'जैनी मेहरबान सिंह' उनकी चर्चित कृतियां हैं।
1961 में स्थापना हुई थी ज्ञानपीठ पुरस्कार की
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य जगत के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कारों में शामिल है। टाइम्स ऑफ इंडिया समूह द्वारा संचालित भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट की ओर से प्रदान किए जाने वाले इस पुरस्कार की स्थापना 1961 में की गई। इसके प्रथम विजेता मलयालम भाषा के लेखक जी. शंकर कुरुप (1965) थे। वहीं वर्ष 2015 (51वां ज्ञानपीठ पुरस्कार) के लिए यह पुरस्कार गुजराती लेखक रघुवीर चौधरी को प्रदान किया गया है। वर्तमान में इसके विजेता को 11 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र, वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा और शॉल प्रदान किया जाता है। शुरुआत में इसकी धनराशि एक लाख रुपए थी। पूर्व में यह पुरस्कार लेखक-साहित्यकार की एकल कृति के लिए प्रदान किया जाता था। बाद में भारतीय साहित्य में संपूर्ण योगदान (लाइफ टाइम अचीवमेंट) के लिए भी प्रदान किया जाने लगा। हिन्दी भाषा के लेखकों ने इस पुरस्कार को सर्वाधिक 11 बार जीता है। वहीं कन्नड़ भाषा के साहित्यकारों ने इसे 8 बार प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट की स्थापना सन् 1961 में की गई थी, लेकिन प्रथम पुरस्कार वर्ष 1965 में प्रदान किया गया। ट्रस्ट के गठन के बाद साहित्य मनीषियों ने इस पुरस्कार के स्वरूप का निर्धारण करने के लिए कई गोष्ठियां की, तब जाकर वर्ष 1965 में पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार का निर्णय लिया गया।ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार
| नाम | वर्ष | भाषा | |
|---|---|---|---|
| 1 | जी. शंकर कुरुप | 1965 | मलयालम |
| 2 | ताराशंकर बंद्योपाध्याय | 1966 | बांग्ला |
| 3 | डॉ. के.वी.पुतप्पा | 1967 | कन्नड़ |
| उमाशंकर जोशी | 1967 | गुजराती | |
| 4. | सुमित्रानंदन पंत | 1968 | हिन्दी |
| 5. | फिराक गोरखपुरी | 1969 | उर्दू |
| 6. | विश्वनाथ सत्यनारायण | 1970 | तेलुगू |
| 7. | विष्णु डे | 1971 | बंगाली |
| 8. | रामधारीसिंह दिनकर | 1972 | हिन्दी |
| 9. | दत्तात्रेय रामचंद्र बेन्द्रे | 1973 | कन्नड़ |
| गोपीनाथ मोहंती | 1973 | उडिय़ा | |
| 10. | विष्णु सखाराम खाण्डेकर | 1974 | मराठी |
| 11. | पी.वी.अकिलंदम | 1975 | तमिल |
| 12. | आशापूर्णा देवी | 1976 | बांग्ला |
| 13. | के.शिवराम कारंत | 1977 | कन्नड़ |
| 14. | स.ही.वात्सायन 'अज्ञेय' | 1978 | हिन्दी |
| 15. | वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य | 1979 | असमी |
| 16. | एस.के.पोटाकट | 1980 | मलयालम |
| 17. | अमृता प्रीतम | 1981 | पंजाबी |
| 18. | महादेवी वर्मा | 1982 | हिन्दी |
| 19. | मास्ती वेंकटेश आयंगर | 1983 | कन्नड़ |
| 20. | थाकाझी शिवशंकर पिल्लई | 1984 | मलयालम |
| 21. | पन्नालाल पटेल | 1985 | गुजराती |
| 22. | सच्चिदानंद राउत राय | 1986 | उडिय़ा |
| 23. | विष्णुवामन शिरवाडकर | 1987 | मराठी |
| 24. | डॉ. सी. नारायण रेड्डी | 1988 | तेलुगू |
| 25. | कर्तुल एन. हैदर | 1989 | उर्दू |
| 26. | वी.के. गोकाक | 1990 | कन्नड़ |
| 27. | सुभाष मुखोपाध्याय | 1991 | बांग्ला |
| 28. | नरेश मेहता | 1992 | हिन्दी |
| 29. | सीताकांत महापात्र | 1993 | उडिय़ा |
| 30. | यू.आर.अनंतमूर्ति | 1994 | कन्नड़ |
| 31. | एम.टी. वासुदेवन अय्यर | 1995 | मलयालम |
| 32. | महाश्वेता देवी | 1996 | बांग्ला |
| 33. | अली सरदार जाफरी | 1997 | उर्दू |
| 34. | गिरीश कर्नाड | 1998 | कन्नड़ |
| 35. | निर्मल वर्मा | 1999 | हिन्दी |
| गुरुदयाल सिंह | 1999 | पंजाबी | |
| 36. | इंदिरा गोस्वामी | 2000 | असमी |
| 37. | राजेन्द्र केशवलाल शाह | 2001 | गुजराती |
| 38. | डी. जयकांतन | 2002 | तमिल |
| 39. | विन्दा करांदीकर | 2003 | मराठी |
| 40. | रहमान राही | 2004 | कश्मीरी |
| 41. | कवि कुंवर नारायण | 2005 | हिंदी |
| 42. | रवीन्द्र केलकर | 2006 | कोंकणी |
| सत्यव्रत शास्त्री | 2006 | संस्कृत | |
| 43. | ओ. एन. वी. कुरुप | 2007 | मलयालम |
| 44. | अखलाक मोहम्मद खान 'शहरयार' | 2008 | उर्दू |
| 45. | अमरकांत व श्रीलाल शुक्ल | 2009 | हिंदी |
| 46. | चन्द्रशेखर कंबर | 2010 | कन्नड़ |
| 47. | डॉ. प्रतिभा राय | 2011 | उडिय़ा |
| 48. | डॉ. रावुरी भारद्वाज | 2012 | तेलुगू |
| 49. | केदारनाथ सिंह | 2013 | हिंदी |
| 50. | भालचन्द्र नेमाड़े | 2014 | मराठी |
| 51. | रघुवीर चौधरी | 2015 | गुजराती |
| 52. | शंख घोष | 2015 | बांग्ला |
| 53. | कृष्णा सोबती | 2015 | हिंदी |
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