स्कॉर्पिन पनडुब्बी आईएनएस कलवरी राष्ट्र को समर्पित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वदेश निर्मित पहली स्कॉर्पिन पनडुब्बी आइएनएस कलवरी राष्ट्र को समर्पित की। कलवरी एक मलयालम शब्द है जिसका अर्थ है टाइगर शार्क। टाइगर शार्क गहरे हिंद महासागर में पाई जाती है।आईएनएस कलवरी का निर्माण मुंबई स्थित मडगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में फ्रांस की रक्षा एवं ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस के सहयोग से किया है। समझौते के तहत स्कॉर्पियन छह पनडुब्बियों का निर्माण होगा। यह पहली पनडुब्बी है।
लड़ाकू पनडुब्बी है आईएनएस कलवरी
- आईएनएस कलवरी डीजल इलेक्ट्रिक लड़ाकू पनडुब्बी है।
- इस पनडुब्बी में रेडिएटेड टेक्नोलॉजी का प्रयोग हुआ है। यह शोर और ध्वनि को कम रखने वाली तकनीक है।
- आईएनएस कलवरी का आकार हाइड्रो-डायनामिक ऑप्टिमाइज्ड है, जिसके कारण इसका इस्तेमाल टॉरपीडो एवं ट्यूब तरीके से एंटी शिप मिसाइल के लिए किया जा सकेगा।
- यह एंटी सरफेस वार, एंटी सबमरीन वार, बारूदी सुरंग बिछाने में भी सक्षम होगी।
- परियोजना के फ्रांस छह पनडुब्बियों के निर्माण में भारत का सहयोग करेगा। आईएनएस कलवरी पहली पनडुब्बी है। दूसरी पनडुब्बी आईएनएस खंदेरी का परीक्षण चल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की 'ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2017' रिपोर्ट जारी, भारत में ई-कचरे के खतरे पर चेताया
संयुक्त राष्ट्र की ओर से 'ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2017' जारी की गई। इसमें भारत में सुरक्षा उपायों के बिना ई-कचरे की रीसाइक्लिंग के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण को होने वाले गंभीर खतरों के प्रति चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2016 में दो मिट्रिक टन ई-कचरा पैदा हुआ। प्रति व्यक्ति के लिहाज से यह करीब 1.5 किलो है।यह रिपोर्ट इंटरनेशनल टेलीकॉम्युनिकेशंस यूनियन, यूएन यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल ठोस कचरा प्रबंधन एसोसिएशन के सहयोग से बनी है। रिपोर्ट के अनुसार 2016 में दुनियाभर में 4.47 करोड़ टन यानी प्रति व्यक्ति 6.1 किलोग्राम ई-कचरा पैदा हुआ था। विश्व में चीन सबसे अधिक ई-कचरा पैदा करता है। वहां 7.2 मीट्रिक टन ई-कचरा पैदा हुआ।
भारत में ई-कचरा संबंधी नियम 2011 में आए। नियमों के तहत उत्पादकों पर अपने उत्पादों से पैदा होने वाले कचरे को निपटाने की जिम्मेदारी डाली गई है।
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