राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस
National Flag Adoption Day
आज का दिन : 22 जुलाई 2026
- देश में प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस मनाया जाता है।
- 22 जुलाई 1947 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज को अंगीकृत किया था, इसी कारण प्रतिवर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। यह एक विशेष संरचना यानी डिजाइन होती है, जिसकी अपनी अलग विशेषता और पहचान होती है।
तिरंगे का इतिहास
- स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रथम ध्वज वर्ष 1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता द्वारा बनाया गया था। जिसे 7 अगस्त, 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की हरी पट्टी में आठ कमल, नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद और बीच की पीली पट्टी पर वन्देमातरम् लिखा था।
- द्वितीय ध्वज 1907 को पेरिस में मैडम भीखाजी कामा और उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था।
- तृतीय ध्वज 1917 में डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था।
- चौथा ध्वज आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने कांग्रेस के बेजवाड़ा सत्र में गांधी जी को दिया था। यह ध्वज लाल व हरे रंग का था। बाद में गांधी जी के कहने पर 1931 में इस ध्वज को केसरिया, सफेद, हरा करके मध्य में चरखे को रखा गया।
- अंत में 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज तिरंगे को 'भारतीय राष्ट्रीय ध्वज' के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया।
- मुख्यत: तिरंगा राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाता है। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति दिल्ली के राजपथ पर और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हैं।
- भारत की आम जनता को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने का श्रेय नवीन जिंदल को जाता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए संघर्ष किया, जिसके बाद भारत सरकार ने 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन करके आम जन को नियमों के साथ ध्वज फहराने का अधिकार दिया।
- गृह मंत्रालय ने भारतीय झंडा संहिता 2002 में संशोधन किया कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते गए और हाथ से बुने या मशीन से बने, कपास / पॉलिएस्टर / ऊन / रेशम / खादी बंटिंग से बना होगा। यह संशोधन 30 दिसंबर, 2021 को लागू हुआ। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज आयुध वस्त्र फैक्टरी, शाहजहांपुर द्वारा निर्मित एक रेशमी झंडा है, जो झंडा संहिता के अनुरूप है। इसके अलावा तिरंगा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए और उस पर मानक चिह्न अंकित होना आवश्यक है। राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली खादी संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं-
- कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ फेडरेशन, हुबली, कर्नाटक
- मध्य भारत खादी संघ, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
- खादी डायर्स एंड प्रिंटर्स, बोरीवली, महाराष्ट्र
- धारवाड़ तालुक गरग क्षेत्रीय सेवा संघ, कर्नाटक।
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