विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
(World Day Against Child Labour)
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| विश्व बाल श्रम निषेध दिवस थीम-2026 Red card to child labour: Fair play for children, decent work for adults |
- विश्व भर में प्रतिवर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा सन् 2002 में पहली बार विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया गया।
- विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाने और कम उम्र बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए लोगों को प्रेरित करना है। इसके साथ ही बाल श्रम को खत्म करने के लिए आवश्यक प्रयास करना है।
- भारत के कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की शुरुआत हुई। सत्यार्थी ने 17 जनवरी 1998 को फिलीपींस के मनीला से बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक जनजागरण यात्रा शुरु की थी। यह यात्रा 6 जून 1998 को जेनेवा में समाप्त हुई। इस यात्रा की दो मुख्य मांगें थीं- बाल श्रम के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय कानून बनाना और वर्ष में एक विशेष दिन बाल मजदूरों को समर्पित करना। जब यह यात्रा जिनेवा पहुंची तब वहां आईएलओ का एक महत्वपूर्ण वार्षिक सम्मेलन चल रहा था। सत्यार्थी को सम्मेलन में बाल श्रम पर अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2002 से प्रतिवर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाना शुरू किया गया। कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 में शांति का नोबेल प्रदान किया गया।
- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मजदूरी देकर कराया गया कार्य या बंधुआ मजदूरी 'बाल श्रम' कहलाती है।
- संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2021 को 'बाल श्रम उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय वर्ष' (2021 International Year for the Elimination of Child Labour) के रूप में मनाया गया था। यूएन ने 2025 तक बाल श्रम की कुप्रथा को समाप्त करने का लक्ष्य रखते हुए इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
- आईएलओ की ओर से जिनेवा में 3 से 14 जून, 2024 तक अंतरराष्ट्रीय श्रम कॉन्फ्रेंस का 112वां सत्र आयोजित किया जा रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में विश्व में लगभग 138 मिलियन बच्चे बालश्रम में फंसे हैं यानी हर 10 में से एक बच्चा बंधुआ मजदूर है। बाल श्रम करने वाले बच्चों की संख्या वर्ष 2000 और 2020 के बीच 85.5 मिलियन घटी है। प्रतिशत में बात करें तो 16 प्रतिशत से 9.6 प्रतिशत हो गई। दुनिया में मात्र 26.4 प्रतिशत बच्चे ही सामाजिक सुरक्षा संबंधी नकद लाभ प्राप्त कर पाते हैं।
मराकेश में बाल श्रम उन्मूलन पर 6वां वैश्विक सम्मेलन
- आईएलओ की ओर से मरोक्को के मराकेश में बाल श्रम उन्मूलन पर 6वां वैश्विक सम्मेलन 11 से 13 फरवरी, 2026 तक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में बाल श्रम के खिलाफ मराकेश ग्लोबल फ्रेमवर्क फॉर एक्शन एक ठोस रोडमैप और इंडिकेटर देता है। यह इंटीग्रेटेड तरीकों से बाल श्रम से निपटने में मदद करता है, जो हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
सन्धि संख्या 182
- अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के 187 सदस्य देशों ने दासता, देह व्यापार और तस्करी सहित बाल मजदूरी के खराब रूपों से बच्चों की रक्षा करने वाली सन्धि को पारित किया है। 'सन्धि संख्या 182' के नाम से इसे आईएलओ ने जिनेवा में वर्ष 1999 में पारित किया था। इस पर हस्ताक्षर करने वाला आखिरी देश प्रशान्त क्षेत्र का द्वीपीय देश टोन्गा था।
भारत में बाल श्रम के विरुद्ध संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 24 के तहत कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध किया गया है।
- बाल श्रम के मामले में केन्द्र और राज्य सरकारें अपने-अपने कानून बना सकती हैं।
- फैक्ट्रीज अधिनियम 1948 14 साल से कम उम्र के बच्चों के नियोजन पर प्रतिबंध लगाता है। इस अधिनियम में 14-18 साल के किशोरों को रोज साढ़े चार घंटे के काम का ही प्रावधान करते हुए उनको रात के घंटों में काम करने से प्रतिबंधित किया गया है।
- खदान एक्ट (1952) के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का खदान में काम करना प्रतिबंधित है।
- बाल श्रम (प्रतिषेध और नियमन) अधिनियम, 1986 में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को उन 16 व्यवसायों और 65 प्रक्रियाओं में रोजगार पर पाबंदी लगाई गई है, जो बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। अक्टूबर, 2006 में सरकार ने घरेलू क्षेत्र और ढाबों और धर्मशालाओं में बच्चों के काम करने को भी खतरनाक व्यवसायों की सूची में डाला। सितंबर, 2008 में अत्यधिक ताप या शीत, यांत्रिक ढंग से मछली पकडऩा, गोदाम, पेंसिल उद्योग, पत्थरों की घिसाई जैसे व्यवसायों और प्रक्रियाओं को प्रतिबंधित सूची में डाला गया।












