राष्ट्रीय समुद्री दिवस
(National Maritime Day)
आज का दिन : 5 अप्रेल 2025
- देश में प्रतिवर्ष 5 अप्रेल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है।
- राष्ट्रीय समुद्री दिवस भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से मनाया जाता है।
- 5 अप्रेल 1919 को बॉम्बे (मुंबई) से लंदन के लिए पहले भारतीय वाणिज्यिक पोत एसएस लॉयल्टी को रवाना किया गया था। इसी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है।
- एसएस लॉयल्टी जहाज का स्वामित्व सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड के पास था, जो उस समय की सबसे बड़ी स्वदेशी पोत परिवहन कंपनी थी।
- पहली बार यह दिवस 5 अप्रेल 1964 को मनाया गया था। वर्ष 2025 में 62वां राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जा रहा है।
- राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य भारत की गौरवशाली समुद्री परंपरा और इतिहास का उत्सव मनाना है।
- वैश्विक स्तर पर सितंबर माह के अंतिम गुरुवार को विश्व समुद्री दिवस मनाया जाता है।
- भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से प्रति दो वर्ष में भारत समुद्री सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इस बार यह उत्सव मुंबई में 27 से 31 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित किया जाएगा। भारत समुद्री सप्ताह के दौरान 100 देशों और 1,00,000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
- प्रधानमंत्री ने वर्ष 2021 में 'मैरीटाइम इंडिया विजन-2030' जारी किया था। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में भारतीय समुद्री उद्योग को विश्व के शीर्ष मानकों के समकक्ष लाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौकरियों में 12 प्रतिशत स्थानों पर भारतीय कार्य कर रहे हैं। अब मैरीटाइम इंडिया विजन-2030 के तहत यह आंकड़ा 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने एसटीसीडब्ल्यू कन्वेंशन और समुद्री श्रम कन्वेंशन (एमएलसी) दोनों पर हस्ताक्षर कर रखे हैं।
- वर्तमान में भारत में 146 समुद्री प्रशिक्षण संस्थान हैं। वही देश में भारतीय नाविकों की संख्या 280,000 से अधिक है।
सागरमाला परियोजना
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रेल, 2016 को सागरमाला योजना को लॉन्च किया था। यह योजना भारत की 7500 किमी लंबी तटरेखा, 14,500 किमी के नौचालन योग्य संभावित जलमार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार जलमार्गों में रणनीतिक स्थान का उपयोग करने के लिए शुरू की गई। सागरमाला योजना का मुख्य उद्देश्य देश में पत्तन आधारित विकास करना है। सागरमाला योजना या कार्यक्रम में प्रमुख रूप से 5 घटक शामिल हैं। ये हैं-1. पत्तन यानी पोट्र्स का आधुनिकीकरण एवं नए पत्तनों का विकास, 2. पत्तन संपर्कता बढ़ाना, 3. पत्तन आधारित औद्योगिकीकरण, 4. तटीय समुदाय का विकास और 5. भारत में तटीय पोत परिवहन एवं अंतर्देशीय जलमार्ग को प्रोत्साहित करना।
राष्ट्रीय समुद्री दिवस पुरस्कार
- पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर समुद्री क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिष्ठित हस्तियों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। हालांकि अभी तक पुरस्कारों की घोषणा नहीं की गई है। ये पुरस्कार इस प्रकार हैं-
- 1. सागर सम्मान वरुण पुरस्कार: भारतीय नौवहन और/या संबद्ध समुद्री उद्योगों में निरंतर और उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को पहचान और सम्मान देने के लिए वरुण पुरस्कार ।
- 2. उत्कृष्टता के लिए सागर सम्मान पुरस्कार: भारतीय नौवहन या भारतीय समुद्री उद्योग में नौवहन व्यवसाय, वाणिज्यिक संचालन, मानव संसाधन विकास, समुद्री प्रौद्योगिकी और औद्योगिक संबंधों के प्रबंधन के क्षेत्रों में वरिष्ठ कार्यात्मक स्तर पर व्यक्तियों को उनकी आजीवन असाधारण और विशिष्ट उपलब्धियों या प्रदर्शन के लिए पहचान और सम्मान ।
- 3. वीरता के लिए सागर सम्मान पुरस्कार: भारतीय नाविकों (अधिकारियों सहित) को भारत या अन्य जगहों पर मर्चेंट नेवी में उनके शौर्यपूर्ण अनुकरणीय कार्यों के लिए वीरता पुरस्कार।
- 4. उत्कृष्ट समुद्री प्रशिक्षण संस्थान, उत्कृष्ट भारतीय शिपिंग कंपनी, नाविकों के उत्कृष्ट भारतीय नियोक्ता, नाविकों के उत्कृष्ट विदेशी नियोक्ता, उत्कृष्ट भारतीय बंदरगाह और उत्कृष्ट भारतीय टर्मिनल को भारतीय नौवहन और भारतीय नाविकों के लिए उनके द्वारा निरंतर योगदान दिए जाने के साथ ही साथ उन्हें अधिकतम प्रयास करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान और पुरस्कार।
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर
- पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय गुजरात के लोथल में 'राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर' (एनएमएचसी) का निर्माण कर रहा है। एनएमएचसी का निर्माण ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्र में किया जा रहा है। 3500 करोड़ रुपए की इस परियोजना की आधारशिला मार्च, 2019 में रखी गई थी। इसके पहले चरण का कार्य इसी वर्ष 2025 में पूर्ण होने की संभावना है। यह देश का अपनी तरह का पहला परिसर होगा जहां भारत की समृद्ध और विविध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा।