शनिवार, 5 अप्रैल 2025

5 अप्रेल 2025 : राष्ट्रीय समुद्री दिवस

राष्ट्रीय समुद्री दिवस

(National Maritime Day)

आज का दिन : 5 अप्रेल 2025

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  • देश में प्रतिवर्ष 5 अप्रेल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है।
  • राष्ट्रीय समुद्री दिवस भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से मनाया जाता है।
  • 5 अप्रेल 1919 को बॉम्बे (मुंबई) से लंदन के लिए पहले भारतीय वाणिज्यिक पोत एसएस लॉयल्टी को रवाना किया गया था। इसी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है।
  • एसएस लॉयल्टी जहाज का स्वामित्व सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड के पास था, जो उस समय की सबसे बड़ी स्वदेशी पोत परिवहन कंपनी थी।
  • पहली बार यह दिवस 5 अप्रेल 1964 को मनाया गया था। वर्ष 2025 में 62वां राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य भारत की गौरवशाली समुद्री परंपरा और इतिहास का उत्सव मनाना है।
  • वैश्विक स्तर पर सितंबर माह के अंतिम गुरुवार को विश्व समुद्री दिवस मनाया जाता है।
  • भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से प्रति दो वर्ष में भारत समुद्री सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इस बार यह उत्सव मुंबई में 27 से 31 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित किया जाएगा। भारत समुद्री सप्ताह के दौरान 100 देशों और 1,00,000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
  • प्रधानमंत्री ने वर्ष 2021 में 'मैरीटाइम इंडिया विजन-2030' जारी किया था। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में भारतीय समुद्री उद्योग को विश्व के शीर्ष मानकों के समकक्ष लाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौकरियों में 12 प्रतिशत स्थानों पर भारतीय कार्य कर रहे हैं। अब मैरीटाइम इंडिया विजन-2030 के तहत यह आंकड़ा 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने एसटीसीडब्ल्यू कन्वेंशन और समुद्री श्रम कन्वेंशन (एमएलसी) दोनों पर हस्ताक्षर कर रखे हैं।
  • वर्तमान में भारत में 146 समुद्री प्रशिक्षण संस्थान हैं। वही देश में भारतीय नाविकों की संख्या 280,000 से अधिक है।

सागरमाला परियोजना

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रेल, 2016 को सागरमाला योजना को लॉन्च किया था। यह योजना भारत की 7500 किमी लंबी तटरेखा, 14,500 किमी के नौचालन योग्य संभावित जलमार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार जलमार्गों में रणनीतिक स्थान का उपयोग करने के लिए शुरू की गई। सागरमाला योजना का मुख्य उद्देश्य देश में पत्तन आधारित विकास करना है। सागरमाला योजना या कार्यक्रम में प्रमुख रूप से 5 घटक शामिल हैं। ये हैं-1. पत्तन यानी पोट्र्स का आधुनिकीकरण एवं नए पत्तनों का विकास, 2. पत्तन संपर्कता बढ़ाना, 3. पत्तन आधारित औद्योगिकीकरण, 4. तटीय समुदाय का विकास और 5. भारत में तटीय पोत परिवहन एवं अंतर्देशीय जलमार्ग को प्रोत्साहित करना।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस पुरस्कार

  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर समुद्री क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिष्ठित हस्तियों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। हालांकि अभी तक पुरस्कारों की घोषणा नहीं की गई है। ये पुरस्कार इस प्रकार हैं-
  • 1. सागर सम्मान वरुण पुरस्कार: भारतीय नौवहन और/या संबद्ध समुद्री उद्योगों में निरंतर और उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को पहचान और सम्मान देने के लिए वरुण पुरस्कार ।
  • 2. उत्कृष्टता के लिए सागर सम्मान पुरस्कार: भारतीय नौवहन या भारतीय समुद्री उद्योग में नौवहन व्यवसाय, वाणिज्यिक संचालन, मानव संसाधन विकास, समुद्री प्रौद्योगिकी और औद्योगिक संबंधों के प्रबंधन के क्षेत्रों में वरिष्ठ कार्यात्मक स्तर पर व्यक्तियों को उनकी आजीवन असाधारण और विशिष्ट उपलब्धियों या प्रदर्शन के लिए पहचान और सम्मान ।
  • 3. वीरता के लिए सागर सम्मान पुरस्कार: भारतीय नाविकों (अधिकारियों सहित) को भारत या अन्य जगहों पर मर्चेंट नेवी में उनके शौर्यपूर्ण अनुकरणीय कार्यों के लिए वीरता पुरस्कार।
  • 4. उत्कृष्ट समुद्री प्रशिक्षण संस्थान, उत्कृष्ट भारतीय शिपिंग कंपनी, नाविकों के उत्कृष्ट भारतीय नियोक्ता, नाविकों के उत्कृष्ट विदेशी नियोक्ता, उत्कृष्ट भारतीय बंदरगाह और उत्कृष्ट भारतीय टर्मिनल को भारतीय नौवहन और भारतीय नाविकों के लिए उनके द्वारा निरंतर योगदान दिए जाने के साथ ही साथ उन्हें अधिकतम प्रयास करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान और पुरस्कार।

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर

  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय गुजरात के लोथल में 'राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर' (एनएमएचसी) का निर्माण कर रहा है। एनएमएचसी का निर्माण ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्र में किया जा रहा है। 3500 करोड़ रुपए की इस परियोजना की आधारशिला मार्च, 2019 में रखी गई थी। इसके पहले चरण का कार्य इसी वर्ष 2025 में पूर्ण होने की संभावना है। यह देश का अपनी तरह का पहला परिसर होगा जहां भारत की समृद्ध और विविध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा।

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025

4 अप्रेल 2025 : अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस

अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस

(International Mine Awareness Day)

आज का दिन : 4 अप्रेल 2025


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  • प्रतिवर्ष 4 अप्रेल को अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से 8 दिसंबर 2005 को अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। प्रथम इंटरनेशनल माइन अवेयरनेस दिवस 4 अप्रैल, 2006 को मनाया गया था।
  • अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस को 'खान जागरूकता और खदान कार्य में सहायता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' (International Day for Mine Awareness and Assistance in Mine Action) भी कहा जाता है। यह दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को लैंडमाइंस के कारण पैदा हुए खतरे से सुरक्षा प्रदान करना, स्वास्थ्य और जीवन से सम्बंधित परेशानियों के बारे में जागरूकता फैलाना है।
  • इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस के माध्यम से सरकारों को खदान क्लियरिंग प्रोग्राम विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 1990 के दशक के बाद से अब तक जमीन में बिछाई गई साढ़े पांच करोड़ बारूदी सुरंगों को नष्ट किया गया है। इस जोखिम से अब तक 30 से अधिक देश मुक्त हो चुके हैं।संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार हर घंटे एक व्यक्ति बारूदी सुरंगों के कारण मारा जाता है या घायल होता है।
  • संयुक्त राष्ट्र मौजूदा कानूनी ढांचे के सार्वभौमिकरण के लिए अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करता है और सदस्य राज्यों को उन शासनों का विस्तार करने और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों से नागरिकों की रक्षा के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय उपकरणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह इस काम को इच्छुक राज्यों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से चलाता है।
  • पिछले दो दशकों से संयुक्त राष्ट्र माइन एक्शन सर्विस (UNMAS) प्रभावित लोगों की समस्याओं को सुलझाने और आम नागरिकों के सामने आने वाले विस्फोटक से पैदा हुए खतरों का हल कर रही है।

ओटावा संधि : बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध

  • बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध के लिए ओटावा संधि की गई है। सितंबर 1997 में नॉर्व की राजधानी ओस्लो में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस संधि पर सहमति बनी थी। ओटावा कन्वेंशन का पूरा नाम Convention on the Prohibition of the Use, Stockpiling, Production and Transfer of Anti-Personnel Mines and on Their Destruction है। इस संधि के तहत बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल करने, उनका भंडार बना कर रखने और उत्पादन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। साथ ही ऐसी सामग्री को पूरी तरह नष्ट करने का प्रावधान भी किया गया था। इस संधि पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया कनाडा के ओटावा शहर में हुई थी, इसलिए इसे ओटावा संधि कहा जाता जाता है। वर्ष 1999 में यह संधि लागू हुई। वर्ष 2024 तक इस संधि पर 164 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। 

*अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस-2025 का विषय/थीम*

Safe Futures Start Here

 


बुधवार, 2 अप्रैल 2025

2 अप्रेल 2025 : विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस

विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस

(World Autism Awareness Day)

आज का दिन : 2 अप्रेल 2025

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  • प्रतिवर्ष 2 अप्रेल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार सन् 2008 में विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 2 अप्रेल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस या विश्व ऑटिज्म दिवस मनाने का संकल्प 18 दिसंबर 2007 को अपनाया।
  • 2012 के विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस (World Autism Awareness Day) पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।
  • ऑटिज्म यानी स्वलीनता एक मानसिक रोग है, जिसके शिकार बच्चे अपने आप में खोए रहते हैं। इस बीमारी के कारण बच्चों के विकास पर भी प्रभाव पड़ता है।  इसी बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
  • ऑटिज्म में 8 माह से 5 वर्ष के बच्चों में इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इनमें कम या नहीं बोलना, मिलने-जुलने में रुचि कम होना, सामान्य बच्चों की तुलना में धीमा होना, जिद करना शामिल हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2 अप्रेल, 2025 को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस के उपलक्ष्य में एक वर्चुअल इवेंट का आयोजन जाएगा जिसका विषय Advancing Neurodiversity and the UN Sustainable Development Goals (SDGs) रखा गया।

*विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस-2025 का विषय/थीम*

Advancing Neurodiversity and the UN Sustainable Development Goals (SDGs)
 

मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

1 अप्रेल 2025 : ओडिशा दिवस

ओडिशा दिवस

(Odisha Day)

आज का दिन : 1 अप्रेल 2025

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  • प्रतिवर्ष 1 अप्रेल को ओडिशा दिवस मनाया जाता है। इसे 'उत्कल दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
  • ब्रिटिश शासन के अंतर्गत 1 अप्रेल 1936 को ओडिशा को अलग राज्य के रूप में पहचान मिली थी। तब यह बंगाल प्रेसीडेंसी का एक हिस्सा था। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष उत्कल दिवस मनाया जाता है।
  • ओडिशा प्राचीनकाल में कलिंग साम्राज्य का भाग था। इस पर मौर्य सम्राट अशोक की विजय और उसके बाद उनके हृदय परिवर्तन की घटना इतिहास प्रसिद्ध है।
  •  ओडिशा सरकार की ओर से वर्ष 2025 का उत्कल दिवस ओडिया पक्ष (1 अप्रेल) से ओडिया नववर्ष (14 अप्रेल) तक मनाया जाएगा। इस दौरान राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी 1 अप्रेल को कटक जिले के सत्यभामापुर में ओडिया पक्ष समारोह में भाग लेंगे। 
  • हाल ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दूसरे राज्यों के स्थापना दिवस यानी स्टेट डे को मनाने की घोषणा की है। इसकी शुरुआत दिल्ली में 1 अप्रेल को ओडिशा स्थापना दिवस यानी उत्कल दिवस मनाकर की जाएगी।
  • वर्तमान यानी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं।

रविवार, 30 मार्च 2025

30 मार्च 2025 : अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस

अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस

(International Day of Zero Waste)

आज का दिन : 30 मार्च 2025

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  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहला अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस 30 मार्च 2023 को मनाया जा रहा है।
  • तुर्किए सहित 105 देशों की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 दिसंबर, 2022 को इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित किया।
  • अपशिष्ट यानी कचरा आज पूरी दुनिया के लिए समस्या बन गया है। अगर समय रहते इसे रीसायकिल करने पर काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह विकराल रूप धारण कर लेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस संयुक्त राष्ट्र के 2030 के सतत विकास लक्ष्य 11 और 12 की प्राप्ति में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में प्रतिवर्ष 2224 बिलियन टन ठोस अपशिष्ट पैदा होता है, जिसमें से मात्र 55 प्रतिशत ही प्रबंधित या रीसायकिल हो पाता है।
  • इसी प्रकार प्रतिवर्ष 931 मिलियन टन खाद्यान्न बर्बाद होता है और 14 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा जल में शामिल होकर उसे दूषित करता है। हर मिनट एक ट्रक के बराबर प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंका जा रहा है।
  • शून्य अपशिष्ट पहल से कचरे का बेहतर प्रबंधन कर हम पर्यावरण की रक्षा, खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या ई-कचरा है। इस ई-कचरे का 75 प्रतिशत सुरक्षित रूप से प्रबंधित नहीं किया जा रहा है।

*अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस-2025 का विषय/थीम*
Towards zero waste in fashion and textiles

30 मार्च 2025 : राजस्थान दिवस

राजस्थान दिवस

(Rajasthan Day)


आज का दिन : 30 मार्च 2025

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, संवत 2082

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  • प्रतिवर्ष 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है।
  • राजस्थान सरकार ने इस बार इसे हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाने का निर्णय किया है। वर्ष 2025 में 30 मार्च के दिन ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 2082 है। इसलिए इस दिन राजस्थान दिवस मनाया जा रहा है। राजस्थान सरकार के अनुसार संवत् 2006 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर राजस्थान की स्थापना की हुई थी और उस दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में तिथि 30 मार्च 1949 थी।
  • 30 मार्च, 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसी बड़ी रियासतों का विलय होकर 'वृहत्तर राजस्थान संघ' बना था। इसी दिन को राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है।
  • राजस्थान दिवस-2025 पर राजस्थान सरकार की ओर से 25 से 31 मार्च तक साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 25 मार्च को बाड़मेर में महिला सम्मेलन, 26 मार्च को बीकानेर में किसान सम्मेलन, 27 मार्च को भरतपुर में अन्त्योदय कल्याण समारोह, 28 को भीलवाड़ा में विकास एवं सुशासन उत्सव, 29 मार्च को कोटा में युवा एवं रोजगार उत्सव और जयपुर में रन फॉर फिट राजस्थान, 30 मार्च को हर जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम और 31 मार्च को लॉजिस्टिक, डेटा सेंटर एवं टेक्सटाइल पॉलिसी जारी करने का कार्यक्रम रखा गया है।
  • वर्तमान यानी सन् 2025 में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं।

ऐसे हुआ राजस्थान का गठन

  • देश की आजादी के समय राजस्थान या राजपूताना में 22 देशी रियासतें थीं। इनमें एक रियासत अजमेर मेरवाडा प्रांत को छोड़ कर शेष देशी रियासतों पर देशी राजा महाराजाओं का ही राज था। अजमेर-मेरवाडा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का कब्जा था। 
  • राजस्थान के एकीकरण में भारत सरकार के तत्कालीन देशी रियासत और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी. पी. मेनन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इनकी सूझबूझ से ही राजस्थान के वर्तमान स्वरूप का निर्माण हुआ।
  • 18 मार्च 1948 को शुरू हुई राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया कुल सात चरणों में 1 नवंबर 1956 को पूरी हुई।

राजस्थान के एकीकरण के सात चरण

  • 18 मार्च, 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों का विलय होकर 'मत्स्य संघ' बना। धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदयसिंह राजप्रमुख व अलवर राजधानी बनी।
  • 25 मार्च, 1948 को कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़ व शाहपुरा का विलय होकर राजस्थान संघ बना।
  • 18 अप्रेल, 1948 को उदयपुर रियासत का विलय। नया नाम 'संयुक्त राजस्थान संघ' रखा गया। उदयपुर के तत्कालीन महाराणा भूपाल सिंह राजप्रमुख बने।
  • 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर 'वृहत्तर राजस्थान संघ' बना था। यही दिन राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। अब इसे हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाएगा।
  • 15 अप्रेल, 1949 को 'मत्स्य संघ' का वृहत्तर राजस्थान संघ में विलय हो गया।
  • 26 जनवरी, 1950 को सिरोही रियासत को भी वृहत्तर राजस्थान संघ में मिलाया गया।
  • 1 नवंबर, 1956 को आबू, देलवाड़ा तहसील का भी राजस्थान में विलय हुआ, मध्य प्रदेश में शामिल सुनेल टप्पा का भी विलय हुआ।

राजस्थान के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • राजस्थान 2303' उत्तर अक्षांश से 30012' उत्तरी अक्षांश एवं 69030' पूर्वी देशान्तर से 78017'  पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है।
  • राजस्थान का क्षेत्रफल- 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है।
  • राजस्थान की राजधानी जयपुर है। इसे पिंकसिटी यानी गुलाबीनगर के नाम से भी जाना जाता है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या- 6,85,48,437 है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात- 928/1000 पुरुष पर है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर- 66.1 प्रतिशत है।
  • राजस्थान के दो राज्य पशु हैं- चिंकारा एवं ऊंट। चिंकारा वन्य जीव श्रेणी में तो ऊंट पालतू पशु श्रेणी में राज्य पशु है।
  • राजस्थान का राज्य पक्षी- गोडावण है।
  • राजस्थान का राज्य वृक्ष- खेजड़ी है।
  • राजस्थान का राज्य खेल- बास्केटबॉल है।
  • राजस्थान का राज्य पुष्प- रोहिड़ा है।
  • राजस्थान का अधिकांश भाग मरुस्थलीय है। यहां थार का रेगिस्तान है।
  • राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश एवं दक्षिण पश्चिम में गुजरात है।
  • राजस्थान में बेड़च, बनास, गम्भीरी, कोठारी, चम्बल, पार्वती, बाणगंगा, काली सिन्ध, खारी, माही, लूणी, घग्घर प्रमुख नदियां हैं।
  • राजस्थान में डीडवाना, सांभर, पंचभद्रा, लूणकरणसर, जयसमंद, राजसमंद, पिछोला, पुष्कर, आनासागर, नक्की एवं सिलिसेढ़ प्रमुख झीलें हैं।
  • राजस्थान में गुरु शिखर [माउंट आबू], सेर [माउंट आबू], अचलगढ़ [सिरोही], तारागढ़ [अजमेर] प्रमुख पर्वत चोटियां हैं। ये सभी विश्व की प्राचीन वलित पर्वत शृंखला अरावली की चोटियां हैं। अरावली का अधिकांश भाग राजस्थान में ही है।
  • राजस्थान की विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है।
  • राजस्थान से लोकसभा के लिए 25 सदस्य चुने जाते हैं। वहीं राज्यसभा के लिए 10 सदस्य चुने जाते हैं।
  • राजस्थान में राष्ट्रीय अभयारण्य - रणथम्भौर नेशनल पार्क (सवाई माधोपुर), केवलादेव नेशनल पार्क (भरतपुर), सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर) और मुकुंदरा राष्ट्रीय अभयारण्य (कोटा-चित्तौडगढ़़)। बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व चौथा और धौलपुर-करौली राज्य का पांचवां टाइगर रिजर्व है।
  • देश में राजस्थान का सीमेंट उत्पादन में प्रमुख स्थान है।
  • राजस्थान देश का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है।

सोमवार, 24 मार्च 2025

24 मार्च 2025 : विश्व क्षय रोग दिवस

विश्व क्षय रोग दिवस

(World Tuberculosis Day)


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*विश्व क्षय रोग दिवस-2025 का विषय/थीम*
Yes! We Can End TB: Commit, Invest, Deliver

आज का दिन : 24 मार्च 2025

  • प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है।
  • 24 मार्च 1882 को डॉ. रॉबर्ट कॉख ने टीबी के जीवाणु की खोज की थी। इसलिए प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है।
  • टीबी की बीमारी यानी Tuberculosis को क्षय रोग, तपेदिक रोग भी कहा जाता है।
  • विश्व क्षय रोग दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को टीबी के बारे में जागरुक करना तथा इस रोग की रोकथाम के लिए कदम उठाना है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रतिवर्ष इस दिन के लिए एक विशेष थीम/विषय का चुनाव करता है, जिससे कि टीबी पर काबू पाया जा सके।
  • टीबी बैक्टीरिया (मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस) के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो कि फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह अन्य हिस्सों (एक्सट्रा पल्मोमनरी टीबी/इतर फुफ्फुसीय तपेदिक) को भी प्रभावित करता है।
  • आज मेडिकल साइंस में टीबी रोग का उपचार मौजूद है और इसका निवारण किया जा सकता है।
  • पिछले दशकों में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद टीबी विश्वभर में मृत्यु के शीर्ष दस कारणों में से एक है।

भारत में 2025 में टीबी उन्मूलन का लक्ष्य

  • भारत सरकार ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए 18 मार्च 2025 को नई दिल्ली के भारत मंडपम कन्वेंशन सेंटर में 'भारत नवाचार शिखर सम्मेलन- टीबी उन्मूलन के लिए अग्रणी समाधान' का उद्घाटन किया गया।
  • राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2024 में 26.07 लाख टीबी मामले अधिसूचित किए गए। भारत में टीबी उपचार 2023 में 85 प्रतिशत हो गया है।
  • 7 दिसंबर, 2024 को टीबी मुक्त भारत-100 दिवसीय सघन अभियान सुरू किया गया। इसमें 455 चयनित जिले शामिल हैं। 

स्टॉप टीबी पार्टनरशिप

  • संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की स्थापना वर्ष 2001 में की गई। यह संगठन टीबी से पीडि़त लोगों, समुदायों और देशों की आवाज को मुखर करता है। 
  • वर्तमान यानी 2025 में फिलीपींस के डॉ. टेओडोरो जेवियर हर्बोसा स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के अध्यक्ष हैं। उनसे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने 2021 से 2024 तक 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड' के अध्यक्ष का पदभार संभाला था।

2023 में वाराणसी में हुई थी वन वर्ल्ड टीबी समिट

  •  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की ओर से 24 मार्च 2023 को वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 'वन वर्ल्ड टीबी समिट' का आयोजन किया गया था। इसमें 30 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। वन वर्ल्ड टीबी समिट के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टीबी-मुक्त पंचायत पहल की शुरुआत की थी।

वर्ल्ड टीबी रिपोर्ट-2024

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन सन् 1997 से प्रतिवर्ष विश्व तपेदिक रिपोर्ट यानी वर्ल्ड टीबी रिपोर्ट जारी करता आ रहा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 29 अक्टूबर, 2024 को वर्ल्ड टीबी रिपोर्ट-2024 जारी की। 
  • वर्ल्ड टीबी रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत में 2015 से 2023 तक टीबी की घटनाओं में 17.7 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  • वैश्विक स्तर पर वर्ष 2023 में 8.2 मिलियन नए टीबी मामले दर्ज किए गए। यह 1995 के बाद से डब्ल्यूएचओ द्वारा दर्ज किया उच्चतम आंकड़ा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में अनुमानित 1.25 मिलियन लोगों की मौत टीबी  से हुई।
  • दुनिया के टीबी मामलों का 56 प्रतिशत अकेले पांच देशों में है। ये पांच देश हैं-भारत (26 प्रतिशत), इंडोनेशिया (10 प्रतिशत), चीन (6.8 प्रतिशत), फिलीपींस (6.8 प्रतिशत) और पाकिस्तान (6.3 प्रतिशत)।

भारत में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम

  • भारत सरकार ने देश में सन् 1962 से 'राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (आरएनटीसीपी) चला रखा है।
  • आरएनटीसीपी कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से चलाया जा रहा है।
  • आरएनटीसीपी के तहत देश से सन् 2025 तक टीबी का खात्मा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • राष्ट्रीय रणनीतिक योजना वर्ष 2017-2025 के तहत 'पता लगाना (डिटेक्ट), उपचार (ट्रीट), रोकथाम (प्रिवेंट)- निर्माण (बिल्ड), (डीटीपीबी) के चार रणनीतिक चरणों में कार्य किया जाएगा।

 आरएनटीसीपी के तहत अन्य नई पहल इस प्रकार हैं-

  • निजी क्षेत्रों की भागीदारी- निजी स्वास्थ्य प्रदाता (प्राइवेट हेल्थ प्रोवाइडर इंगेजमेंट) को रोग का पता लगाने एवं टीबी के रोगियों का उपचार करने में शामिल किया गया है।  
  • सक्रिय टीबी के मामलों की खोज (एसीएफ)- वर्ष 2017 में उच्च जोखिम वाली जनसंख्या में एसीएफ के तीन चरणों के माध्यम से टीबी रोगियों का पता लगाया गया था।
  • दैनिक उपचार पद्धति- दवा के बोझ को कम करने के लिए निश्चित दवा संयोजक की शुरुआत की गयी।
  • सार्वभौमिक दवा संवेदनशीलता परीक्षण- पर्याप्त उपचार के लिए सभी टीबी रोगियों में दवा प्रतिरोधिकता की जांच।
  • नई दवा की शुरूआत- बेडाकूलाइन एवं डेलामिनिड जैसी नई विकसित दवाओं की शुरुआत को सात राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में की गयी।
  • पोषण सहयोग- सभी टीबी रोगियों को टीबी उपचार की अवधि के दौरान पोषण संबंधी सहायता के लिए प्रति माह 500 रुपये प्रदान किए जाते है।
  • डिजिटल पहल- निक्षय, 99 डॉट्स, निक्षय औषधि।

*विश्व क्षय रोग दिवस-2025 का विषय/थीम*

Yes! We Can End TB: Commit, Invest, Deliver


रविवार, 23 मार्च 2025

23 मार्च 2025 : विश्व मौसम विज्ञान दिवस

विश्व मौसम विज्ञान दिवस

(World Meteorological Day)

आज का दिन : 23 मार्च 2025

विश्व मौसम विज्ञान दिवस-2025 की थीम
"Closing the early warning gap together"

  • प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्वभर में विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की एक इकाई के रूप में विश्व मौसम विज्ञान संगठन की स्थापना दिवस 23 मार्च, 1950 को की गई थी। इसलिए प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस (World Meteorological Day) मनाया जाता है।
  • विश्व मौसम विज्ञान दिवस (vishw mausam vigyan diwas) को मनाने का उद्देश्य लोगों को मौसम विज्ञान तथा जलवायु में हो रहे परिवर्तनों के बारे में जागरूक करना है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार पिछले 50 वर्षों में 11000 से अधिक मौसम आधारित प्राकृतिक आपदाओं में 2 मिलियन से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इन आपदाओं से 3.64 ट्रिलियन यूएस डॉलर का आर्थिक नुकसान भी हुआ है। इसका मुख्य कारण दुनिया के प्रति 3 व्यक्तियों में से एक का पूर्व चेतावनी प्रणाली यानी अर्ली वार्निंग सिस्टम से नहीं जुड़ा होना रहा।
  • 11 अक्टूबर, 1947 को हुई संधि के अनुसार 23 मार्च, 1950 को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की स्थापना करना तय किया गया। इसके बाद 23 मार्च, 1950 को इस संगठन की स्थापना की गई।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

  • अंग्रेजी शासनकाल में 15 जनवरी, 1875 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में भारतीय मौसम विभाग की स्थापना की गई। सन् 1905 में इसे शिमला, 1928 में पुणे और 1944 में दिल्ली स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्यरत विभाग है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का मुख्य कार्य मौसम संबंधी अनुमान लगाना और मौसम की भविष्यवाणी करना है। वर्तमान यानी 2025 में मृत्युंजय महापात्र भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक हैं।

 *विश्व मौसम विज्ञान दिवस-2025 का विषय/थीम*

"Closing the early warning gap together"

23 मार्च 2025 : शहीद दिवस

शहीद दिवस (बलिदान दिवस)

(Shaheed Diwas)

आज का दिन : 23 मार्च 2025

  • देश में प्रतिवर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस (बलिदान दिवस) मनाया जाता है।
  • 23 मार्च, 1931 को अंग्रेज सरकार ने भारत माता के तीन सपूतों- भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी थी। उन्हीं अमर शहीदों की याद में 23 मार्च का दिन शहीद दिवस/बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन तीनों वीरों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए ही शहीद दिवस मनाया जाता है।
  • अदालती आदेश के मुताबिक भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च, 1931 को सुबह करीब 8 बजे फांसी लगाई जानी थी। लेकिन अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च, 1931 को ही इन तीनों को लाहौर सेंट्रल जल में देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी और शव रिश्तेदारों को न देकर रातों रात ले जाकर सतलुज नदी के किनारे जला दिए।
  • अंग्रेजी हुकूमत ने भगतसिंह और अन्य क्रांतिकारियों की बढ़ती लोकप्रियता और 24 मार्च को होने वाले विद्रोह की वजह से 23 मार्च को ही भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी थी।
  • शहीद भगत सिंह सेवा दल (एसबीएस फाउंडेशन) की ओर से शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में 'बसंती चोला दिवस' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एसबीएस फाउंडेशन की स्थापना 1995 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जितेन्द्र सिंह शंटी ने की थी।
  • पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वर्ष 2022 के शहादत दिवस से राज्य में इस दिन सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थी।

भगतसिंह

भगतसिंह

  • सिक्ख परिवार में पंजाब के लायलपुर में 28 सितंबर, 1907 को शहीद-ए-आजम भगतसिंह का जन्म हुआ।
  • भगतसिंह के पिता गदर पार्टी के नाम से प्रसिद्ध एक संगठन के सदस्य थे, जो भारत की आजादी के लिये काम करता था।
  • भगतसिंह ने अपने साथियों- राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव और जय गोपाल के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज के खिलाफ  लड़ाई की।
  • 8 अप्रैल, 1929 को अपने साथियों के साथ केन्द्रीय विधायी सभा में 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाते हुए बम फेंक दिया था। यह बम विस्फोट किसी की जान लेने के लिए नहीं बल्कि कुंभकर्णी नींद में डूबी अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए किया गया था।
  • क्रांतिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और 23 मार्च, 1931 को लाहौर के जेल में शाम 7:33 बजे फांसी पर लटका दिया गया। उनके शरीर का दाह संस्कार सतलुज नदी के किनारे हुआ था। वर्तमान में हुसैनवाला (भारत-पाकिस्तान सीमा) में राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर, एक बहुत बड़े शहीदी मेले का आयोजन उनके जन्म स्थान फिरोजपुर में किया जाता है।

राजगुरु

राजगुरु
  • राजगुरु का पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरु था।
  • राजगुरु का जन्म 24 अगस्त 1908 को पुणे जिले के खेडा गाँव में हुआ।
  • 6 वर्ष की आयु में पिता का निधन हो जाने से बहुत छोटी उम्र में ही ये वाराणसी विद्याध्ययन करने एवं संस्कृत सीखने आ गये थे। इन्होंने हिन्दू धर्म-ग्रंन्थों तथा वेदों का अध्ययन तो किया ही लघु सिद्धान्त कौमुदी जैसा क्लिष्ट ग्रन्थ बहुत कम आयु में कण्ठस्थ कर लिया था।
  • राजगुरु को कसरत (व्यायाम) का बेहद शौक था और वे छत्रपति शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली के बड़े प्रशंसक थे।
  • वाराणसी में विद्याध्ययन करते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ। चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गये।
  • आजाद की पार्टी के अन्दर इन्हें रघुनाथ के छद्म-नाम से जाना जाता था; राजगुरु के नाम से नहीं।
  • राजगुरु एक अच्छे निशानेबाज भी थे। साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव का पूरा साथ दिया था।

सुखदेव

सुखदेव

  • महान क्रांतिकारी सुखदेव का पूरा नाम सुखदेव थापर था।
  • सुखदेव का जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में 15 मई 1907 को हुआ।
  • लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिये जब योजना बनी तो साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा राजगुरु का पूरा साथ दिया था।
  • सुखदेव ने सन् 1929 में जेल में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किये जाने के विरोध में राजनीतिक बन्दियों द्वारा की गयी व्यापक हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग भी लिया था।
  • गांधी-इर्विन समझौते के सन्दर्भ में इन्होंने एक खुला खत गांधी के नाम अंग्रेजी में लिखा था जिसमें इन्होंने महात्मा जी से कुछ गम्भीर प्रश्न किये थे।

शनिवार, 22 मार्च 2025

22 मार्च 2025 : बिहार दिवस

बिहार दिवस

(Bihar Diwas)

आज का दिन : 22 मार्च 2025


  • प्रतिवर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है।
  • 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर बिहार राज्य की स्थापना की गई थी। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। यह 113वां बिहार दिवस है।
  • सन् 1935 में उड़ीसा (ओडिशा) को इससे अलग कर राज्य बनाया गया।
  • बिहार को राज्य का दर्जा 26 जनवरी 1950 को मिला।
  • सन् 2000 में झारखंड को इससे अलग कर राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
  • वर्तमान यानी सन् 2025 में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान हैं।


बिहार के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • बिहार 21077' उत्तरी अक्षांश से 27031' उत्तरी अक्षांश व 83020' से 88017' पूर्व देशान्तर के मध्य स्थित है। 
  • बिहार के पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखण्ड एवं उत्तर में नेपाल है।
  • बिहार की राजधानी- पटना।
  • बिहार का कुल क्षेत्रफल है- 94,163 वर्ग किलोमीटर।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की जनसंख्या- 10,40,99,452
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में लिंगानुपात- 918/1000 पुरुष पर।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में साक्षरता दर- 61.8 प्रतिशत।
  • बिहार में उच्च न्यायालय पटना में स्थित है।
  • बिहार का राज्य पशु-गौर और राज्य पक्षी-गौरेया या घरेलू गौरेया है।
  • दो छोटे स्वास्तिक के मध्य बोधि वृक्ष बिहार का राजकीय चिह्न है।
  • बिहार की मुख्य भाषाएं- हिन्दी, मगही [मागधी], भोजपुरी, अंगिका, मैथिली हैं।
  • बिहार में द्विसदनीय विधायिका है। इसके अंतर्गत विधानसभा में 243 सदस्य एवं विधान परिषद् में 75 सदस्य हैं। 
  • बिहार से लोकसभा के लिए 40 एवं राज्यसभा के लिए 16 सदस्य चुने जाते हैं।

*बिहार दिवस-2025 का विषय/थीम*
'उन्नत बिहार, विकसित बिहार'

22 मार्च 2025 : विश्व जल दिवस

आज का दिन : 22 मार्च 2025

विश्व जल दिवस

(World Water Day)

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विश्व जल दिवस-2025 की थीम- Glacier Preservation
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिवर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में पहली बार 'विश्व जल दिवस' मनाया गया।
  • 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित 'पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (यूएनसीईडी) में विश्व जल दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
  • विश्व जल दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में पानी का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • विश्व जल दिवस का उद्देश्य है जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना
  •  विश्व जल दिवस पर फोटो प्रदर्शनी लगाई जाती है। जल संरक्षण से संबंधित नाट्य कार्यक्रम होते हैं। तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर की जाती है। जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेमीनार-परिचर्चा के साथ ही टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश प्रसारित होते हैं। स्वच्छ जल और संरक्षण उपायों की प्रतियोगिताओं सहित कई गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
  • वर्ष 2025 का विश्व जल दिवस ग्लेशियर यानी हिमनदों के संरक्षण पर जोर देता है। इसकी थीम भी इसी अनुरूप रखी गई है। एक दिन पूर्व यानी 21 मार्च 2025 को पहला विश्व ग्लेशियर दिवस मनाया गया है।

जल शक्ति अभियान: कैच द रेन-2025

  • भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और हरियाणा सरकार के सहयोग से विश्व जल दिवस 22 मार्च 2025 को 'जल शक्ति अभियान: कैच द रेन-2025' की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण और प्रबंधन के प्रति सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसकी थीम 'जल संचयन जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर' रखी गई है। इस पहल में देश के 148 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 

विश्व जल विकास रिपोर्ट-2025

  • 21 मार्च 2025 को यूनेस्को मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में विश्व जल विकास रिपोर्ट-2025 जारी की गई। वर्ष 2025 की विश्व जल विकास रिपोर्ट का शीर्षक Mountains and glaciers: Water towers है। विश्व जल विकास रिपोर्ट पानी पर संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख रिपोर्ट है। इसमें दुनिया में मीठे पानी के संसाधनों की समग्र स्थिति, उपयोग और प्रबंधन का व्यापक मूल्यांकन किया जाता है। विश्व जल विकास रिपोर्ट यूएन वाटर और यूनेस्को वर्ल्ड वाटर असेसमेंट प्रोग्राम तैयार करते हैं।

 विश्व जल सप्ताह-2025

  • 24 से 28 अगस्त, 2025 तक स्वीडन के स्टॉकहोम में विश्व जल सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष इसकी थीम Water for Climate Action  रखी गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल वाटर इंस्टीट्यूट वर्ष 1991 से इस सप्ताह का आयोजन कर रहा है। 

रियाद में होगा 11वें विश्व जल मंच का आयोजन

  • वर्ल्ड वाटर काउंसिल की ओर से प्रति तीन वर्ष में विश्व जल मंच का आयोजन किया जाता है। पानी पर दुनिया के इस सबसे बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन में लगभग सभी देश भाग लेते हैं। पहले विश्व जल मंच का आयोजन 1997 में मोरक्को के शहर मराकेश में हुआ था। 10वें विश्व जल मंच यानी वर्ल्ड वाटर फोरम का आयोजन 18-24 मई, 2024 को इंडोनेशिया के बाली में आयोजित किया। अगला यानी 11वां विश्व जल मंच सऊदी अरब के रियाद में 22 से 28 मार्च, 2027 होगा।

एक प्रतिशत पानी ही पीने योग्य

  • हमारी पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलोलीटर पानी है। इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है। शेष 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ के ठोस रूप में ध्रुवीय प्रदेशों में है। शेष बचा एक प्रतिशत पानी नदियों, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है। यही पानी पीने योग्य है। इस एक प्रतिशत पानी का 60वां हिस्सा खेती और औद्योगिक कारखानों में उपयोग होता है। शेष 40वाँ हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में उपयोग लेते हैं।
  • सामान्यत: पीने के लिए मानव को प्रतिदिन 3 लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • हमारे देश में तो प्राचीन काल से ही पानी के संचय के अनेक तरीके अपनाए जाते रहे हैं। आज भी हम पारंपरिक तरीकों से पानी बचाएं तो आने वाले संकट को टाला सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया की 2.2 बिलियन आबादी स्वच्छ जल से वंचित है। यानी लगभग हर 3 में से एक व्यक्ति को स्वच्छ जल नहीं मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास (Sustainable Development Goal 6) के तहत वर्ष 2030 तक सभी को स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा है।
  • वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार किया था कि साफ और स्वच्छ पेयजल मानव अधिकार है।

जल जीवन मिशन

  • देश में 'जल जीवन मिशन' की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को की थी। इसके तहत हर घर जल योजना में ग्रामीण भारत के सभी घरों में 2024 तक व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

 *विश्व जल दिवस-2024 का विषय/थीम*

Water for Peace


शुक्रवार, 21 मार्च 2025

21 मार्च 2025 : विश्व ग्लेशियर दिवस

विश्व ग्लेशियर दिवस

(World Glacier Day)

आज का दिन : 21 मार्च 2025

World Glacier Day Theme-2025

  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार 21 मार्च 2025 को विश्व ग्लेशियर दिवस मनाया जा रहा है।
  • आज प्रकृति के जमे हुए प्रहरी ग्लेशियर खतरे में हैं। इसी खतरे की आहट को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह दिवस मनाने का निर्णय किया है।
  • यूएन जनरल असेम्बली ने 14 दिसंबर, 2022 को विश्व ग्लेशियर दिवस (World Day for Glaciers) मनाने का प्रस्ताव पारित किया।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2025 को 'ग्लेशियरों के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष' (International Year of Glaciers’ Preservation, 2025) के रूप में मनाया जा रहा है।
  • विश्व ग्लेशियर दिवस और ग्लेशियरों के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष-2025 को मनाने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूनेस्को और विश्व मौसम विज्ञान संगठन को सौंपी है।
  • विश्व ग्लेशियर दिवस मनाने का उद्देश्य तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों के संरक्षण के प्रति लोगों और सरकारों जागरूक करना है।
  • ग्लेशियर हिम यानी बर्फ की विशाल नदियां हैं, जो हमारी धरती को तराशने के साथ इसकी बदलती लय की गवाही देते हैं। ग्लेशियर हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत जरूरी हैं। ग्लेशियर से मिलने वाले मीठे पानी से करोड़ों लोगों की प्यास बुझती है। ये समुद्र के स्तर को भी नियंत्रित करते हैं।
  • लेकिन आज ये जमे हुए विशालकाय पहाड़ खतरे में हैं। ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन की वजह से ग्लेशियर खतरनाक दर से घट रहे हैं।
  • हमारे देश में भी हिमालय के ग्लेशियर मौजूद हैं। हाल ही प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में पिछले 32 वर्षों में 110 ग्लेशियर लुप्त हो गए।
  • भारत सरकार ने ग्लेशियरों के संरक्षण के लिए हिमालयी राज्यों के कई क्षेत्रों को राष्ट्रीय उद्यान या संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। जैसे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क आदि।
  • हमारे देश में ग्लेशियरों के संरक्षण के लिए कई संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनमें वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण आदि प्रमुख हैं।


*विश्व ग्लेशियर दिवस-2025 का विषय/थीम*
Glaciers: Guardians of Earth's Future


21 मार्च 2025 : अन्तरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस

अन्तरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस

(International Day for the Elimination of Racial Discrimination)

आज का दिन : 21 मार्च 2025

  • दुनिया से नस्लीय भेदभाव और विद्वेष समाप्त करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 21 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन (International Day for the Elimination of Racial Discrimination) दिवस मनाया जाता है।
  • 21 मार्च 1960 को दक्षिण अफ्रीका के शार्पविले नामक स्थान पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने फायरिंग की थी, जिसमें 69 लोग मारे गए थे। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन रंगभेद पर आधारित कानून का विरोध करने के लिए हुआ था।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए प्रतिवर्ष 21 मार्च को यह दिवस मनाने का निर्णय लिया।
  • संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2001 में डरबन में नस्लवाद के खिलाफ विश्व सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसके घोषणा पत्र में नस्लवाद को रोकने पर जोर दिया गया और नस्लवाद से पीडि़तों राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समानता देने पर जोर दिया गया। 2001 के इसी सम्मेलन के परिणामस्वरूप 'डरबन घोषणापत्र व कार्रवाई कार्यक्रम' (Durban Declaration and Programme of Action/DDPA) नामक दस्तावेज, आम सहमति से पारित किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन के 20 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से 22 सितंबर, 2021 को न्यूयॉर्क में विश्व के नेताओं की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की थीम Reparations, racial justice and equality for People of African Descent रखी गई।
  • हाल ही संयुक्त राष्ट्र ने सन् 2015 से 2024 तक 'अंतरराष्ट्रीय अफ्रीकी वंश दशक' (International Decade for People of African Descent) मनाया है। इसकी थीम/विषय People of African descent: recognition, justice and development गई।  1 जनवरी, 2015 से शुरू हुआ 'अंतरराष्ट्रीय अफ्रीकी वंश दशक' 31 दिसंबर, 2024 तक चला।
     

*अन्तरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस-2025 का विषय/थीम*

60th anniversary of the International Convention on the Elimination of All Forms Racial of Discrimination (ICERD)

 

संयुक्त राष्ट्र की ओर से 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस और अन्तरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस के अलावा निम्न दिवस भी मनाए जाते है-
विश्व कविता दिवस
(World Poetry Day)

अंतरराष्ट्रीय नवरोज दिवस
(International Nowruz Day)

विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस
(World Down Syndrome Day)

21 मार्च 2025 : विश्व कठपुतली दिवस

विश्व कठपुतली दिवस

(World Puppet Day)

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विश्व कठपुतली दिवस-2025 का विषय/थीम
Robots, AI and the dream of the puppet?

आज का दिन : 21 मार्च 2025

  • प्रतिवर्ष 21 मार्च को विश्व कठपुतली दिवस मनाया जाता है।
  • यह दिवस पहली बार वर्ष 2003 में मनाया गया। इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय कठपुतली संघ (Union Internationale de la Marionnette) के सदस्यों की ओर से पूरी दुनिया में मनाया जाता है। la Marionnette स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है कठपुतली है। यह संगठन यूनेस्को से जुड़ा एक गैरसरकारी सगंठन है।
  • कठपुतली दिवस मनाने का उद्देश्य सैकड़ों साल पुरानी इस कला को जीवित रखने के साथ ही लोगों में इसके प्रति आकर्षण पैदा करना है।
  • कठपुतलियां हमेशा से मनोरंजन व शिक्षा प्रदान करने का सशक्त माध्यम रही हैं। इसके जरिए सामाजिक मुद्दों को उठाकर जागरुकता का कार्य भी किया गया है।
  • भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आज भी कठपुतली कला जीवित है और लोगों के मनोरंजन के साथ ही जागरुकता भी फैला रही है।
  • संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से प्रदान की जाने वाली प्रतिष्ठित फैलोशिप में कठपुतली कला को भी सम्मिलित किया गया है।


*विश्व कठपुतली दिवस-2025 का विषय/थीम*

Robots, AI and the dream of the puppet?


21 मार्च 2025 : अंतरराष्ट्रीय वन दिवस

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस

(International Day of Forests)

आज का दिन : 21 मार्च 2025


vishv-van-diwas-2025-ki-jankari-hindi-me
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस-2025 का विषय/थीम - Forests and Foods
  • प्रतिवर्ष 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (International Day of Forests) मनाया जाता है। 
  • इसे विश्व वानिकी दिवस या विश्व वन दिवस (WorldForestDay) भी कहा जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सन् 2012 में 21 मार्च को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय वन दिवस या विश्व वन दिवस मनाने की घोषणा की। तब से प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जा रहा है।
  • इतिहास में जाएं तो सन् 1971 यूरोपीय कृषि परिसंघ की 23वीं महासभा में सर्वप्रथम विश्व वानिकी दिवस मनाने का विचार आया। चूंकि दक्षिणी गोलार्द्ध में 21 मार्च को दिन-रात बराबर होते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाने के लिए यह दिन चुना गया।
  • अंतरराष्ट्रीय वन दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को वनों के प्रति जागरुक करना है। यह दिन वनों और वानिकी के महत्व और समाज में उनके योगदान के तौर पर मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2011 को अंतरराष्ट्रीय विश्व वन वर्ष के रूप में मनाया था।
  • भारत में प्रतिवर्ष जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह महोत्सव भारत सरकार द्वारा वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने के लिए आयोजित किया जाता है। सन् 1960 के दशक में इसका सूत्रपात तत्कालीन कृषिमंत्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने किया था।
  • वर्ष 2017 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र फोरम में 2017 से 2030 तक वन संबंधी योजना शुरू की गई। इसके तहत वर्ष 2030 तक विश्व के कुल वन क्षेत्र में 3 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया। यह 3 प्रतिशत लगभग 120 मिलियन हैक्टेयर यानी फ्रांस के दुगुने क्षेत्रफल के बराबर है
  • संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की वर्ष 2020 की 'ग्लोबल फॉरेस्ट रिर्सोसेज असेसमेंट' रिपोर्ट के अनुसार वन दुनिया की 80 प्रतिशत स्थलीय जैव विविधता का घर है। इसमें लगभग 60000 से अधिक पेड़ प्रजातियां हैं। लगभग 1.6 बिलियन लोग भोजन, आश्रय, ऊर्जा, दवाओं और आय के लिए जंगलों पर ही निर्भर हैं। दुनिया में हर साल 10 मिलियन हैक्टेयर जंगल खत्म हो रहे हैं। यानी हर वर्ष आइसलैंड के आकार के बराबर वन नष्ट हो रहे हैं।
  • भारत सरकार ने वनों के संरक्षण, विकास और वनों से जुड़े लोगों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, हरित भारत मिशन, वन अग्नि रोकथाम व प्रबंधन योजना और वन धन योजना आदि प्रमुख हैं।

भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2023 (India State of Forest Report, 2021)

  • भारतीय वन सर्वेक्षण की ओर से हर दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। वर्ष 2023 की रिपोर्ट 21 दिसंबर 2024 को जारी की गई। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 इस शृंखला की 18वीं रिपोर्ट है। 
  • रिपोर्ट के महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं-

  • वर्तमान आकलन के अनुसार देश में कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग कि.मी. है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है। इसमें लगभग 7,15,343 वर्ग कि.मी. (21.76 प्रतिशत) वन क्षेत्र है, जबकि वृक्ष आवरण का क्षेत्रफल 1,12,014 वर्ग कि.मी. (3.41 प्रतिशत) है। 2021 की तुलना में देश में कुल वन और वृक्ष आवरण में 1445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
  • वन क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि करने वाले राज्यों में मिजोरम, गुजरात और ओडिशा शीर्ष तीन में शामिल हैं।
  • वहीं देश में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में 77,073 वर्ग किमी, अरुणाचल प्रदेश में 65,882 वर्ग किमी और छत्तीसगढ़ में 55,812 वर्ग किमी है।


*अंतरराष्ट्रीय वन दिवस-2025 का विषय/थीम*

Forests and Foods